स्टॉक इन्वेस्टिंग में P/B Ratio कैसे काम करता है?

P/E की तरह ही, P/B रेशियो कंपनी की वैल्यूएशन की एक आसानी से समझ में आने वाली तस्वीर बताता है.

वैल्यूएशन मेट्रिक्स टूल

वैल्यूएशन मेट्रिक्स ऐसे टूल्स हैं, जिनका इस्तेमाल कंपनियों की फ़ाइनेंशियल ताक़त का पता लगाने के लिए किया जाता है. ये रेशियो कंपनियों की प्रॉफ़िटेबिलिटी, लिक्विडिटी, ऑपरेशनल एफ़िशिएंसी और स्थायित्व का अनालेसिस करते हैं. 

क्या है प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो?

P/B ratio आम तौर पर वैल्यू इन्वेस्टर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला टूल है. P/E रेशियो जो ख़ास तौर से कंपनी की इनकम पर केंद्रित होता है, इसके विपरीत P/B रेशियो से पता चलता है कि कंपनी अपनी एसेट्स (अपनी देनदारियों का भुगतान करने के बाद) की तुलना में कितनी महंगी है.

P/B रेशियो चेक करने के फ़ायदे 

P/B रेशियो कंपनी की वैल्यूएशन की एक आसानी से समझ में आने वाली तस्वीर बताता है जो उसकी नेट वर्थ से संबंधित है. ये ज़्यादा स्थिर है (चूंकि एसेट की क़ीमतें आय की तरह अस्थिर नहीं होती हैं) और इसका इस्तेमाल उन कंपनियों के वैल्यूएशन के लिए भी किया जा सकता है जिन्होंने प्रॉफ़िट नहीं कमाया है. 

P/B रेशियो की ख़ामियां

ये मेट्रिक एसेट्स की अकाउंटिंग पर आधारित है और इसलिए, इससे कंपनी की सभी एसेट्स की सही वैल्यू ज़ाहिर नहीं होती है. इस मीट्रिक की एक और कमी ये है कि एसेट्स की वैल्यू मैनेजमेंट के विवेक पर निर्भर करती है, क्योंकि डेप्रिशिएशन और गुडविल जैसी एंट्रीज़ में एसेट्स की बुक वैल्यू को बढ़ाने या घटाने के लिए हेरफेर किया जा सकता है.

वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स का मतलब 

कुछ कंपनियों का अर्निंग मल्टीपल कम होता है, जहां, निवेशक ज़्यादा ग्रोथ की उम्‍मीद नहीं करते हैं. इन स्‍टॉक्‍स को वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स कहा जाता है.

डिस्क्लेमर

ये लेख निवेश से जुड़ी जानकारी देने के लिए है. इसे निवेश की सलाह न समझें.