Published on: 23rd December 2025
ज़्यादातर निवेशक रिटर्न टेबल और स्टार रेटिंग देखकर फ़ंड चुनते हैं. समस्या फ़ंड नहीं होती. समस्या होती है, फ़ंड चुनने का ग़लत तरीक़ा. सही फ़ंड वही है जो आपके लिए फ़िट बैठे.
हर साल नए विनर्स आते हैं. अगर हर साल फ़ंड बदलना पड़े, तो रणनीति ही नहीं बचती. निवेश में जीत लिस्ट से नहीं, एक ऐसी प्रक्रिया से मिलती है जिसे हर साल दोहराया जा सके.
फ़ंड देखने से पहले दो सवाल ज़रूरी हैं. – पैसा कितने समय के लिए है – इस पैसे से लक्ष्य क्या है छोटा समय मतलब पूंजी की सुरक्षा. लंबा समय मतलब उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश में टिके रहना.
स्मॉल, मिड और लार्ज कैप का जोख़िम अलग होता है. सबको मिलाकर तुलना करना सबसे आम ग़लती है. – लॉन्ग-टर्म कोर के लिए फ़्लेक्सी कैप या इंडेक्स – ज़्यादा जोख़िम हो तो मिड या स्मॉल कैप सैटेलाइट तुलना हमेशा एक ही कैटेगरी में करें.
– स्टार रेटिंग सिर्फ़ कमज़ोर फ़ंड छांटती है. फ़ैसला नहीं करती. – ट्रेलिंग रिटर्न बीते समय की कहानी है. और रोलिंग रिटर्न बताते हैं कि फ़ंड अलग-अलग बाज़ार दौर में कितना टिकाऊ रहा.
वही फ़ंड ज़्यादा भरोसेमंद होता है जो – अलग-अलग दौर में स्वीकार करने योग्य रिटर्न दे – सिर्फ़ एक तेज़ साल पर निर्भर न हो चमक से ज़्यादा ज़रूरी है, समय के साथ टिके रहना.
काग़ज़ पर अच्छा फ़ंड बेकार हो सकता है, अगर गिरावट में आप उसे बेच दें. और ये सवाल खुद से पूछिए – क्या आपकी स्ट्रैटेजी साफ़ है – पोर्टफ़ोलियो में भूमिका तय है – लागत और एग्ज़िट आपकी टाइमलाइन से मेल खाती है.
सबसे अच्छा फ़ंड वही है, जो आपके समय, रिस्क और निवेश में टिके रहने की क्षमता से मेल खाता हो. एक दोहराई जा सकने वाली प्रक्रिया, हर टॉप-फ़ंड लिस्ट से बेहतर होती है.