Published: 17th Nov 2024
By: Value Research Dhanak
दुनिया के दिग्गज निवेशकों में से एक वॉरेन बफ़े मानते हैं कि शेयर की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव से निवेश के रिस्की होने का फ़ैसला नहीं होता,जानिए क्यों?
एक्सपर्ट ये दावा करते हैं कि अगर एक स्टॉक ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाले हैं, तो ये एक रिस्की इन्वेस्टमेंट है. वो (high beta stocks) के इस्तेमाल से इस रिस्क की पहचान करते हैं. बीटा एक ऐसा पैमाना है, जो पूरे बाज़ार के उतार-चढ़ावों के मुक़ाबले किसी एक स्टॉक की क़ीमत के उतार-चढ़ाव के बारे में बताता है.
बफ़े चीज़ों को अलग नज़रिए से देखते हैं. उनका कहना है, "एक बेतहाशा उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार का मतलब है कि समय-समय पर मज़बूत कंपनियों की क़ीमत में बिना किसी ख़ास वजह के कमी आएगी." बफ़े के अनुसार, ये एक मौक़ा है, ख़तरा नहीं.
बफ़े का कहना है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव अक्सर कंपनियों की क़ीमतों को ग़लत तरीक़े से तय करता है, जिससे स्मार्ट निवेशकों को कम क़ीमत पर बढ़िया कारोबार ख़रीदने का मौक़ा मिल जाता है. जोख़िम उतार-चढ़ाव में नहीं, बल्कि किसी शेयर के लिए बहुत ज़्यादा क़ीमत चुकाने में है.
हम बफ़े से सहमत हैं. इसकी वजह उनका महान शख्सियत होना नहीं, बल्कि हमारा विश्वास है कि उतार-चढ़ाव सिर्फ़ शोर-शराबा है. अगर आप लंबी अवधि के इन्वेस्टर हैं , तो इस तरह के शोर-शराबे से आपके रिटर्न पर ख़ास असर नहीं पड़ेगा.
हमारा अनालेसिस बफ़े के इस नज़रिए पर भरोसा करता है. हमें एक से ज़्यादा बीटा वाली 10 BSE 200 कंपनियां मिलीं, जिन्होंने बाते 10 साल में (मई 2023 तक) में शानदार रिटर्न दिया है. कंपनियों की लिस्ट देखने के लिए अगली स्लाइड में दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए.