डेट फ़ंड्स में YTM और एवरेज मैच्योरिटी का क्या मतलब है?

डेट फ़ंड्स में YTM और एवरेज मैच्योरिटी का क्या मतलब है?

Published:  11th Dec 2024

यील्ड-टू-मैच्योरिटी और एवरेज-मैच्योरिटी की ज़रूरी जानकारी आपके निवेश के फ़ैसलों को बेहतर बनाएगी

डेट फ़ंड्स में निवेशक के लिए ज़रूरी मेट्रिक्स

डेट फ़ंड्स में निवेश करते समय यील्ड टू मैच्योरिटी (YTM) और एवरेज मैच्योरिटी को समझना निवेशकों लिए बेहद ज़रूरी है. ये दोनों मेट्रिक्स फ़ंड के संभावित रिटर्न और रिस्क का आकलन करने में मदद करते हैं. 

यील्ड टू मैच्योरिटी का मतलब

YTM उस रिटर्न को दर्शाता है जो निवेशक को तब मिलेगा, जब वो डेट फ़ंड के सभी बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड रखता है. अगर डेट फ़ंड का YTM 8% है, तो ये अनुमानित रिटर्न का संकेत देता है, बशर्ते पोर्टफ़ोलियो में कोई बदलाव न हो.

YTM की सीमाएं

YTM केवल एक अनुमान है और ये फ़ंड मैनेजर के पोर्टफ़ोलियो में बदलाव, निवेशक के इनफ़्लो-आउटफ़्लो और रोज़मर्रा के ख़र्च में कटौती की वजह से प्रभावी रिटर्न में कमी आने से असल रिटर्न अलग-अलग हो सकते हैं.

एवरेज मैच्योरिटी का मतलब

एवरेज मैच्योरिटी, ये फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो में शामिल सभी बॉन्ड की मैच्योरिटी का वेटेड एवरेज है. जैसे - 10 साल और 5 साल के दो बॉन्ड (इक्वल वेटेज) का एवरेज मैच्योरिटी = 7.5 साल होगा.

एवरेज मैच्योरिटी की अहमियत 

एवरेज मैच्योरिटी से ये पता चलता है कि फ़ंड ब्याज दरों में बदलाव के प्रति कितना सेंसटिव है. – ज़्यादा मैच्योरिटी: ज़्यादा सेंसटिव  – कम मैच्योरिटी: स्थिर प्रदर्शन

YTM और एवरेज मैच्योरिटी का इस्तेमाल 

YTM का इस्तेमाल संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है. और एवरेज मैच्योरिटी का इस्तेमाल ब्याज दर में बदलाव के प्रति फ़ंड की सेंसटिविटी को समझने के लिए किया जाता है.

फ़ंड का चुनाव कैसे करें? 

अगर आप कम समय के लिए या ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दौर में निवेश कर रहे हैं, तो रिस्क कम करने के लिए कम एवरेज मैच्योरिटी वाले फ़ंड का विकल्प देखें. अगर आपके पास ज़्यादा समय है, तो बड़ी एवरेज मैच्योरिटी वाले फ़ंड ब्याज दर में गिरावट के दौरान बेहतर रिटर्न दे सकते हैं.

ध्यान दें!

आपके निवेश के समय और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से YTM और एवरेज मैच्योरिटी मिलकर सही फ़ंड चुनने में मदद कर सकते  हैं.