Published on:  24th December 2025

2026 में अपने लिए बेस्ट म्यूचुअल फ़ंड कैसे चुनें? 

SEBI के नए नियम: लागत घटी या सिर्फ़ तस्वीर बदली? 

दिसंबर 2025 में SEBI ने म्यूचुअल फ़ंड्स के एक्सपेंस रेशियो और ब्रोकरेज से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए. शुरुआती ख़बरों में कहा गया कि निवेश अब सस्ता हो गया है, लेकिन हक़ीक़त इतनी सीधी नहीं है. नए नियम असल में लागत से ज़्यादा पारदर्शिता पर फ़ोकस करते हैं.

क्या सच में एक्सपेंस रेशियो ‘कम’ हुए हैं? 

17 दिसंबर 2025 की बोर्ड मीटिंग के बाद ऐसा लगा कि म्यूचुअल फ़ंड्स के एक्सपेंस रेशियो घटा दिए गए हैं. लेकिन SEBI ने कुल लागत घटाने से ज़्यादा, ये साफ़ करने की कोशिश की है कि निवेशक किस बात के लिए भुगतान कर रहे हैं और कौन-से चार्ज फ़ंड हाउस के कंट्रोल में नहीं हैं.

अब एक्सपेंस रेशियो को देखने का नया तरीक़ा 

SEBI ने टोटल एक्सपेंस रेशियो को नए ढंग से बांटा है. अब Base Expense Ratio (BER) होगा, जो फ़ंड मैनेजमेंट, एडमिनिस्ट्रेशन और डिस्ट्रीब्यूशन जैसी मूल लागत दिखाएगा. इससे निवेशकों को फ़ंड हाउस की असल फ़ीस ज़्यादा साफ़ दिखेगी.

टैक्स और लेवी अब अलग दिखेंगे 

STT, CTT, GST, स्टैम्प ड्यूटी, SEBI फ़ीस और एक्सचेंज फ़ीस जैसे चार्ज अब BER में शामिल नहीं होंगे. ये चार्ज अलग से जोड़े जाएंगे. इसका मतलब ये है कि निवेशक अब साफ़ देख पाएंगे कि कौन-सा खर्च फ़ंड का है और कौन-सा रेगुलेटरी मजबूरी.

BER लिमिट्स घटीं, लेकिन फ़ायदा सीमित क्यों? 

SEBI ने इक्विटी और नॉन-इक्विटी स्कीम्स के लिए AUM स्लैब के हिसाब से BER लिमिट्स घटाई हैं. ज़्यादातर मामलों में कटौती 10 बेसिस प्वाइंट और कुछ स्लैब में 15 बेसिस प्वाइंट तक है. काग़ज़ पर ये राहत लगती है, लेकिन चूंकि टैक्स अब बाहर जुड़ेंगे, कुल लागत में बड़ी कमी नहीं दिखेगी.

छोटी कटौती, लेकिन लॉन्ग-टर्म असर 

लॉन्ग-टर्म में छोटे अंतर भी असर डालते हैं. मसलन, ₹20 लाख का निवेश 20 साल में 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न पर, 10 से 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती से कुछ लाख रुपये ज़्यादा बन सकते हैं. लेकिन यह तभी संभव है जब फ़ंड हाउस पूरी कटौती निवेशकों तक पहुंचाएं.

ब्रोकरेज कैप: यहां दिख सकता है असली फ़ायदा 

SEBI ने ब्रोकरेज पर भी कैप घटाया है. कैश मार्केट में कैप 6 बेसिस प्वाइंट और डेरिवेटिव में 2 बेसिस प्वाइंट कर दिया गया है. ज़्यादा टर्नओवर वाले एक्टिव फ़ंड्स में इससे समय के साथ कुछ वास्तविक बचत हो सकती है, हालांकि असर हर फ़ंड में अलग होगा.

निवेशकों के लिए असल सीख क्या है? 

ये बदलाव म्यूचुअल फ़ंड्स को बहुत सस्ता बनाने से ज़्यादा, लागत को साफ़ और समझने लायक़ बनाने के बारे में हैं. कुल लागत में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. फ़ंड चुनते समय एक्सपेंस रेशियो अहम है, लेकिन अकेला फ़ैक्टर नहीं. सही फ़ंड वही है जो लक्ष्य, क्वालिटी और लागत तीनों में संतुलन रखे.

डिस्क्लेमर 

ये निवेश की सलाह नहीं बल्कि जानकारी के लिए है. अपने निवेश से पहले अच्छी तरह से रिसर्च करें.