Published: 06th Dec 2024
जानिए क्या FD को Mutual Fund में ट्रांसफ़र करना सही है या नहीं? इसके लिए हम यहां विस्तार में बात कर रहे हैं.
ब्याज दरों में संभावित उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना बहुत मुश्क़िल है. बीते 4-5 साल में, कई फ़ंड मैनेजरों के अनुमान अक्सर ग़लत साबित हुए हैं. निवेश के फ़ैसले सिर्फ़ ब्याज दर के अनुमान के आधार पर नहीं होने चाहिए.
अगले दो से तीन साल में आपको जिन पैसों की ज़रूरत पड़ने वाली है, उसे फ़िक्स्ड डिपॉज़िट या डेट फ़ंड में निवेश करना चाहिए. इससे स्थिरता बनी रहती है यानी, गिरावट का डर कम हो जाता है.
इक्विटी निवेश के लिए आपको वो पैसा इस्तेमाल करना चाहिए जिसकी ज़रूरत आपको 5 से 10 साल तक नहीं पड़ेगी. भले ही आपके पास इक्विटी में निवेश करने के लिए पर्याप्त रक़म हो, लेकिन उसे 100 फ़ीसदी इक्विटी में निवेश करने से बचना चाहिए.
लॉन्ग टर्म गोल के लिए अपने पैसे को इक्विटी में और शॉर्ट-टर्म गोल के लिए डेट फ़ंड में निवेश करना ही सही है. निवेश के लिए फ़ैसले हमेशा फ़ाइनेंशियल गोल के मुताबिक़ होने चाहिए, न कि ब्याज दर या बाज़ार की स्थिति को देखते हुए.
लंबे समय के लिए इक्विटी में निवेश करने के बाद ये सुनिश्चित करें कि आपके पास 20-30% फ़िक्स्ड इनकम हो, ताकि आप किसी झटके का सामना कर सकें. नतीजतन, बाज़ार की गिरावट के दौरान आपका पोर्टफ़ोलियो स्थिर रहता है और नुक़सान कम होता है.
ये लेख निवेश से जुड़ी जानकारी देने के लिए है. इसे निवेश की सलाह न समझें.