SIP को नियम से जारी रखना हर किसी के बस की बात नहीं. ख़ासकर अगर आमदनी अनियमित है (फ़्रीलांसर, बिज़नस ओनर या स्व-रोज़गार), तो ये बात और ज़्यादा सही हो जाती है. ऐसे में STP काम आता है.
अगर इसी कैटेगरी में आते हैं, तो आपको SIP नहीं बल्कि STP (systematic transfer plan) के बारे में सोचना चाहिए. ऐसा इसलिए, क्योंकि SIP के लिए आपको एक निश्चित समय पर और व्यवस्थित रूप से निवेश करना होता है.
आपके पास दूसरा विकल्प- एकमुश्त (lump sum) यानी एक बार में निवेश का है. भले ही, एकमुश्त निवेश अच्छा रिटर्न दे सकता है और निवेश के नज़रिए से सुविधाजनक लगता है, लेकिन तब आप बाज़ार की टाइमिंग के मोहताज़ होते हैं और अच्छे मौक़ों से चूक सकते हैं.
– दूसरा बैंक खाता खोलें या लिक्विड फ़ंड में निवेश करें. अपनी इनकम को वहां जमा करें. – हम चाहेंगे, आप लिक्विड फ़ड में निवेश करें. आमतौर पर इसमें बचत खातों के मुक़ाबले ज़्यादा रिटर्न मिलता है. – अगर आपका पैसा लिक्विड फ़ंड में है, तो STP एक्टीवेट करें.
जब भी आपके पास दो से तीन महीनों में कुछ निवेश के लायक़ रक़म होगी, तो STP फ़ीचर ऑटोमैटिकली आपके पैसे लिक्विड फ़ंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में ट्रांसफ़र हो जाएंगे, जो आपके पैसे को बेहतर तरीक़े से बढ़ाएगा या सुरक्षित करेगा.