Published: 28th Jan 2025
यूनियन बजट 2025 आने वाला है. मिडिल क्लास की आंखें इस पर टिकी हुई हैं. महंगाई और टैक्स के साथ उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं. क्या इस बजट में उनकी ज़िंदगी थोड़ी आसान होगी?
₹10 लाख कमाने वालों पर 30% टैक्स लगता है. क्या ये सही है? मिडिल क्लास कहता है कि इस इनकम में दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में गुज़ारा करना भी मुश्किल है. सरकार को टैक्स स्लैब बदलना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके.
बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेने के बाद भी नौकरी ढूंढना आज के युवाओं के लिए बड़ा सिरदर्द है. कोविड के बाद भी रोज़गार के मौके कम हैं. मिडिल क्लास के बच्चे पढ़ाई में खूब मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी अच्छी नौकरी नहीं मिलती.
अब तो ऐसा लगता है कि सब्जी खरीदना भी बड़ी बात हो गई है. पेट्रोल ₹100 से ऊपर और फल-सब्ज़ियों के दाम आसमान पर. मिडिल क्लास सोच रहा है, "हमारा बजट तो रसोई में ही ख़त्म हो जाता है.
पिछले कई साल से लोगों की सैलरी वही की वही है. कंपनियां तो मुनाफ़ा कमा रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को उसका फ़ायदा नहीं मिल रहा. घर का किराया, स्कूल की फ़ीस, और रोज़मर्रा का ख़र्च—सब बढ़ गया है.
बीते बजट में बड़े-बड़े टारगेट तो बनें, लेकिन ख़र्च कम किया. जब सरकार कम ख़र्च करती है, तो इकॉनमी धीमी हो जाती है. इसका असर सीधा मिडिल क्लास की जेब पर पड़ता है.
मिडिल क्लास को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. कम टैक्स, महंगाई पर क़ाबू और रोज़गार के नए मौके़. यही उनकी ख्वाहिश है. क्या यह बजट उनकी ज़िंदगी बदल पाएगा?
तो दोस्तों, 1 फ़रवरी को यूनियन बजट में पता चलेगा कि मिडिल क्लास को राहत मिलेगी या नहीं. तब तक आप भी इंतज़ार कीजिए और अपने ख़र्चों को थोड़ा संभालकर रखिए.
इस लेख का उद्देश्य निवेश की जानकारियां देना है. ये निवेश की सलाह नहीं है.