Published on: 23rd December 2025

मल्टी-कैप vs फ़्लेक्सी-कैप आपके पोर्टफ़ोलियो के लिए कौन सही?

मल्टी-कैप Vs फ़्लेक्सी-कैप: असली मुक़ाबला 

एक फ़ंड तय नियमों पर चलता है. दूसरा हालात देखकर चाल बदलता है. दोनों इक्विटी फ़ंड्स हैं, दोनों वेल्थ बनाते हैं. पर आपके पैसे के लिए सही चुनाव कौन-सा है.

हर निवेशक यहीं उलझता है 

– दोनों लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाते हैं – दोनों ने महंगाई को मात दी है – दोनों भरोसेमंद कैटेगरी हैं फिर भी फ़ैसला आसान नहीं होता, क्योंकि दोनों का खेलने का अंदाज़ अलग है.

लॉन्ग-टर्म में इक्विटी क्यों ज़रूरी 

लंबे समय में पैसा बढ़ाने के लिए इक्विटी सबसे मज़बूत आधार बनती है. वैल्यू रिसर्च डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स की सलाह देता है, ताकि   – जोख़िम संतुलित रहे – रिटर्न की संभावना बेहतर बने.

2020 का नियम, जिसने खेल बदल दिया 

SEBI के सर्कुलर के बाद मल्टी-कैप में तय हुआ   – लार्ज-कैप: 25% – मिड-कैप: 25% – स्मॉल-कैप: 25%  जो फ़ंड इस ढांचे में नहीं आए, वे फ़्लेक्सी-कैप बन गए. यहीं से असली फर्क शुरू हुआ.

आपके लिए क्या सही है? 

मल्टी-कैप में तय एलोकेशन से   – बुल मार्केट में तेज़ रिटर्न – गिरावट में ज़्यादा उतार-चढ़ाव   फ़्लेक्सी-कैप में फ़ंड मैनेजर हालात देखकर एलोकेशन बदल सकता है, जिससे संतुलन बेहतर रहता है.

रिटर्न की असल तस्वीर 

पिछले 5 सालों में – मल्टी-कैप: 19.6% सालाना रिटर्न, जोखिम ज़्यादा – फ़्लेक्सी-कैप: 15.4% सालाना रिटर्न,  उतार-चढ़ाव कम यानी रफ़्तार और स्थिरता के बीच साफ़ चुनाव.

आपके लिए कौन-सा सही है 

– ज़्यादा जोखिम सह सकते हैं और एग्रेसिव रिटर्न चाहते हैं, तो मल्टी-कैप – संतुलन और स्मार्ट एलोकेशन चाहते हैं, तो फ़्लेक्सी-कैप – Parag Parikh Flexi Cap Fund और Nippon India Multi Cap Fund नामी उदाहरण हैं

अब भी एक सवाल बाक़ी है 

– कौन-सा फ़ंड आपके गोल्स, समय और जोख़िम क्षमता से सबसे बेहतर मेल खाता है. – इसका जवाब ही आपकी वेल्थ जर्नी की दिशा तय करता है.

ज़्यादा जानकारी के लिए नीचे दिए गए स्टोरी लिंक पर क्लिक करें. 

Watch Next