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मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप में क्या अंतर है?

फ़्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फ़ंड्स के बारे में कन्फ़्यूज़ हैं? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं.

फ़्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फ़ंड्स के बारे में कन्फ़्यूज़ हैं? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं.Abhijeet Pandey/AI Generated Image

सारांशः सोचिए, एक फ़ंड है “गंभीर टेस्ट बल्लेबाज़”, जो नियम से खेलता है, और दूसरा है “टी20 का फ़्री-हिटर”, जो कभी भी खेल बदल सकता है तो किसकी स्ट्रैटेजी ज़्यादा असरदार होगी? मल्टी-कैप बनाम फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक डिसिप्लिन वाला “गंभीर बल्लेबाज़” है और दूसरा फ़्री-स्टाइल में खेलता हुआ “टी20 का फ़िनिशर”. दोनों का खेल अलग है, पर जीत दोनों दिला सकते हैं. बस सवाल ये है कि आपके पोर्टफ़ोलियो के लिए किसकी पारी फ़ायदेमंद साबित होगी? तो तैयार रहिए, ये मुक़ाबला सिर्फ़ आंकड़ों का नहीं बल्कि आपके फ़ाइनेंशियल फ़्रीडम के सपनों का भी है.

जैसे भारतीय क्रिकेटर रोहित और विराट की तुलना करना बहुत मुश्क़िल है, ठीक वैसे ही मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स के बारे में राय बनाना उतना ही मुश्क़िल है. क्योंकि ये दोनों ही अपनी जगह बेहतर हैं. असल में, म्यूचुअल फ़ंड्स वेल्थ बनाने का एक शानदार ज़रिया बन चुका है और भारत में ये फ़ंड्स बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये शानदार रिटर्न देते हैं और महंगाई को मात देते हुए लंबे समय में आपके फ़ाइनेंशियल फ़्रीडम के सपनों को सच कर सकते हैं. हम यहां मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप के बारे में विस्तार से बात कर रहे हैं, ताकि आपके लिए इनका फ़र्क साफ़ हो जाए.

मल्टी कैप या फ़्लेक्सी-कैप ही क्यों?

जब बात लंबे समय में पैसा बनाने या महंगाई को हराने की आती है, तो इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स आपके लिए सुपरहीरो बनकर सामने आते हैं. वैल्यू रिसर्च में हम हमेशा से ये सलाह देते हैं कि निवेशक को हमेशा डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स में निवेश करना चाहिए. ताकि आप मामूली जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न कमा सकें. आपकी इस ज़रूरत को फ़्लेक्सी और मल्टी-कैप फ़ंड्स पूरा करते हैं.

ज़रा इनके इतिहास पर ग़ौर करते हैं!

इनके इतिहास पर ग़ौर करें तो 2021 से पहले सिर्फ़ मल्टी-कैप कैटेगरी मौजूद थी. उस समय इन म्यूचुअल फ़ंड्स के फ़ंड मैनेजर के पास पूरी आज़ादी थी कि वो किसी भी साइज़ की कंपनी में निवेश कर सकते थे (लार्ज, मिड और स्मॉल कैप) लेकिन सितंबर 2020 के SEBI सर्कुलर के मुतबिक़, मल्टी-कैप फ़ंड्स को मिनिमम 25 प्रतिशत एलोकेशन लार्ज, मिड या स्मॉल में रखना ज़रूरी हो गया. साथ ही, उस दौर के मल्टी-कैप फ़ंड्स को ये विकल्प दिया गया कि अगर वो इस एलोकेशन को फ़ॉलो नहीं करते हैं तो उन्हें फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी में गिना जाएगा.

मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप में फ़र्क

 
मल्टी-कैप फ़ंड्स फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स
मतलब मल्टी-कैप फ़ंड ऐसा इक्विटी फ़ंड है, जो लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों का मिक्स पोर्टफ़ोलियो बनाता है. फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स एक लचीली इक्विटी स्कीम है, जो किसी भी साइज़ की कंपनी में पैसा लगा सकती है.
इक्विटी में हिस्सा कम से कम 75% इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश. कम से कम 65% इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश.
कंपनी साइज़ में बंटवारा SEBI के नियमों के मुताबिक़़, कम से कम 25% लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप में रखना ज़रूरी. कोई तय बंटवारा नहीं; किसी भी साइज़ की कंपनी में आज़ादी से निवेश.
रिस्क मिड और स्मॉल-कैप में 50% निवेश की वजह से लार्ज-कैप फ़ंड्स से ज़्यादा जोख़िम. बुल मार्केट में ज़्यादा रिटर्न, लेकिन गिरावट दौर में नुक़सान होने की संभावना ज़्यादा होती है. 25-30% मिड और स्मॉल-कैप में निवेश, जो औसत रिटर्न देता है और लॉन्ग-टर्म में जोख़िम को संतुलित करता है.

कुल मिलाकर, ये दोनों कैटेगरी एक ही हैं, बस फ़र्क इतना है कि फ़्लेक्सी-कैप में फ़ंड मैनेजर को आजादी होती है किसी भी साइज़ की कंपनी में निवेश करने की, वहीं मल्टी-कैप को 25:25:25 फ़ीसदी के एलोकेशन का पालन करना होता है.

मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप के फ़र्क का मज़ेदार खेल

मल्टी-कैप फ़ंड्स उनके लिए हैं, जो बड़े रिटर्न के लिए ज़्यादा रिस्क लेने को तैयार हैं. पिछले पांच साल (जब से फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी अस्तित्व में आई है) में इन्होंने औसतन 19.6% का सालाना रिटर्न दिया है. वहीं फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स उनके लिए हैं, जो लार्ज-कैप फ़ोकस्ड फ़ंड चाहते हैं, जिसमें मिड और स्मॉल-कैप का स्मार्ट मिश्रण हो. पिछले पांच साल में इन्होंने औसतन 15.4% का सालाना रिटर्न दिया है.

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स लार्ज, मिड और स्मॉल कैप का डाइवर्सिफ़ाइड एक्सपोज़र देते हैं और Parag Parikh Flexi Cap Fund इस कैटेगरी का सबसे ज़्यादा लोकप्रिय फ़ंड है. वहीं, मल्टी-कैप कैटेगरी में Nippon India Multi Cap Fund सबसे ज़्यादा लोकप्रिय फ़ंड है.

तो, अगर मन में सवाल है कि Parag Parikh Flexi Cap या Nippon India Multi Cap आपके पोर्टफ़ोलियो में होना चाहिए या नहीं, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर जाइए. हमारे एनालिस्ट ने आपके लिए ये काम आसान कर दिया है. उन्होंने ऐसे फ़ंड्स की लिस्ट बनाई है जो हर मार्केट साइकल में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं.

आपकी जीत का समय

सोचिए, अगर सही जगह पर निवेश किया जाए तो आपके पैसे सिर्फ़ बढ़ते ही नहीं, बल्कि आपके सपनों को भी साकार करते हैं. यही काम आपके लिए फ़ंड एडवाइज़र करता है, ये आपके लिए ऐसे फ़ंड चुनने में मदद करता है जो आपकी ज़रूरत और आपके गोल्स के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठते हैं.

ये सिर्फ़ एक टूल नहीं, बल्कि आपकी जीत की दिशा में पहला मज़बूत क़दम है. चाहे वो घर ख़रीदने का सपना हो, बच्चों की पढ़ाई हो या आरामदायक रिटायरमेंट - हर फ़ाइनेंशियल गोल के लिए सही फ़ंड आपके लिए यही सेलेक्ट करता है. तो अब वक्त है पुराने कंफ़्यूज़न को पीछे छोड़ने का. तैयार हो जाइए अपने पैसे को स्मार्ट तरीक़े से ग्रो करने के लिए. सही फ़ंड में निवेश कीजिए और अपने भविष्य को चमकाइए.

निवेश की दुनिया में आपका स्वागत है - जहां से आपकी जीत की कहानी शुरू होती है. और याद रखिए, जो सही समय पर सही क़दम उठाता है, वही असली विजेता साबित होता है.

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ये भी पढ़ें: पोर्टफ़ोलियो है या चिड़ियाघर? जानें असल डाइवर्सिफ़िकेशन का सच!

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