Published on: 31st December 2025
रिटायरमेंट के बाद तय मासिक इनकम सुरक्षित लगती है. लेकिन क्या वो सच में काम करती है? PFRDA ने NPS में एक ऐसा बदलाव किया है, जो चुपचाप ये सवाल उठाता है कि शायद एन्युटी उतनी सही नहीं, जितनी मानी जाती रही है.
NPS में नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स के लिए अनिवार्य एन्युटी ख़रीद 40% से घटाकर 20% कर दी गई है. अब 80% तक कॉर्पस एकमुश्त निकाला जा सकता है. ₹8 लाख से कम कॉर्पस पर एन्युटी की ज़रूरत ही नहीं. सवाल है, ऐसा क्यों.
जब कोई रेगुलेटर किसी प्रोडक्ट की अनिवार्यता कम करता है, तो वो असल में ये मानता है कि प्रोडक्ट ठीक से काम नहीं कर रहा. भारत में एन्युटी भी ऐसी ही है. ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी सिर्फ़ फ़ायदा नहीं, एक संकेत भी है.
एन्युटी में एकमुश्त रक़म देकर ज़िंदगी भर तय मासिक इनकम मिलती है. लेकिन – रिटर्न 5–7% के आसपास – पूरी इनकम टैक्सेबल – महंगाई से कोई सुरक्षा नहीं ₹50,000 आज भी ₹50,000, और 20 साल बाद भी उतनी ही.
इंश्योरेंस कंपनी आपकी रक़म को महंगाई से ऊपर कमाने के लिए निवेश करती है. आपकी इनकम तय रहती है, उनकी बढ़ती है. 25 साल के रिटायरमेंट में ये फ़र्क़ आपकी फ़ाइनेंशियल स्थिति को धीरे-धीरे कमज़ोर कर सकता है.
एन्युटी सुधारने की बजाय, PFRDA ने रास्ता बदला. अब – NPS से एग्ज़िट 85 साल तक टाली जा सकती है – Systematic Unit Redemption की सुविधा है – पैसा निवेश में बना रहता है, निकासी ज़रूरत के हिसाब से ये SWP जैसा है, लेकिन पेंशन कॉर्पस से.
अब इक्विटी लिमिट 75% से बढ़कर 100% हो गई है. लंबे समय वाले निवेशकों के लिए ये महंगाई से लड़ने का मज़बूत तरीक़ा है. लेकिन इसके लिए – एसेट एलोकेशन समझना होगा – तय इनकम की गारंटी छोड़नी होगी ये हर किसी के लिए नहीं, लेकिन तैयार लोगों के लिए बड़ा मौक़ा है.
कुछ लोगों के लिए तय इनकम सुकून देती है. लेकिन जो अपने रिटायरमेंट फ़ाइनेंस में सक्रिय रहना चाहते हैं, उनके लिए PFRDA ने चुपचाप एक बेहतर रास्ता खोल दिया है. समझदारी हमेशा आदर्श समाधान नहीं, व्यावहारिक समाधान चुनती है.
ये निवेश की सलाह नहीं बल्कि जानकारी के लिए है. अपने निवेश से पहले अच्छी तरह से रिसर्च करें.