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इटर्नल (पहले ज़ोमैटो) का शेयर फिर से चमक रहा है. कंपनी ने FY26 की पहली तिमाही में 70 प्रतिशत की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जिसका बड़ा श्रेय उसकी क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट को जाता है. मार्केट ने इस ख़बर का जश्न मनाया और शेयर ने 311.60 रुपये का नया 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर छू लिया. लेकिन मुनाफ़ा कम होने और लागत बढ़ने के साथ, ये रैली थोड़ी सावधानी की मांग करती है.
क्या है माजरा?
इटर्नल के Q1 के नतीजे दो विपरीत कहानियां बयां करते हैं:
- रेवेन्यू ₹7,167 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 70 प्रतिशत ज़्यादा है. और, ये IPO के बाद से सबसे बड़ी छलांग है.
- नेट प्रॉफ़िट? सिर्फ़ ₹25 करोड़, जो पिछले साल से करीब 90 प्रतिशत कम है. ब्लिंकिट के आक्रामक विस्तार ने इसकी कमर तोड़ दी है.
- ब्लिंकिट ने नेट ऑर्डर वैल्यू में ज़ोमैटो के कोर फूड डिलीवरी बिज़नस को पीछे छोड़ दिया है, जिससे क्विक कॉमर्स अब नया ग्रोथ इंजन बन गया है.
इतना उत्साह क्यों?
तीन कारणों से ज़ोमैटो (या कहें इटर्नल) निवेशकों की नज़रों में है:
- ब्लिंकिट की धमाकेदार रफ्तार: पहले कमज़ोर दिखने वाली ब्लिंकिट अब टॉपलाइन का सबसे बड़ा ड्राइवर बन गई है.
- मार्केट का भरोसा: मॉर्गन स्टेनली ने टारगेट प्राइस को ₹320 तक बढ़ाया, उनका कहना है कि 'डाइल्यूशन का जोखिम कम' है और मार्जिन की संभावना मज़बूत है.
- कैटेगरी में दबदबा: भारत के अभी शुरुआती दौर में चल रहे क्विक कॉमर्स स्पेस में इटर्नल एक ताकतवर पहले खिलाड़ी की तरह दिख रहा है.
लेकिन दूसरी तरफ़? आसमान छूती लागत, सीमित मार्जिन और वैल्यूएशन जो हाई-ग्रोथ टेक स्टॉक्स को भी शर्मिंदा कर दे.
निष्कर्ष
ज़ोमैटो (इटर्नल) अब सिर्फ फूड डिलीवरी की कंपनी नहीं रही, बल्कि ये क्विक कॉमर्स में एक गंभीर खिलाड़ी बन चुकी है. टॉपलाइन शानदार दिख रही है. लेकिन जब तक ब्लिंकिट घाटा देना बंद नहीं करती और मुनाफ़ा बढ़ना शुरू नहीं होता, इसके लिए सही समय का इंतज़ार करना चाहिए.
एक नज़र में आंकड़े
| मेट्रिक | वैल्यू |
|---|---|
| मार्केट कैप | ₹2.62 लाख करोड़ |
| P/E रेशियो | 875.3 |
| P/B रेशियो | 8.6 |
| EPS | ₹0.3 |
| बुक वैल्यू | ₹31.5 |
| ROE | 1.9% |
| ROCE | 1.8% |
| आंकड़े TTM के आधार पर | |
वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन रेटिंग्स
- ओवरआल: 2/5
- क्वालिटी: 3/10
- ग्रोथ: 5/10
- वैल्यूएशन: 2/10
- मोमेंटम: 7/10
हमारी राय
बाक़ी स्टॉक्स की तरह, इटर्नल का शेयर हर दिन ऊपर-नीचे होता है. लेकिन दौलत दिन में नहीं, बल्कि सालों में बनती है. यही वजह है कि लॉन्ग-टर्म निवेश, न कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग, वित्तीय आजादी का असली रास्ता है.
SEBI ने भी कहा है: 91 फीसदी ट्रेडर्स पैसे गंवाते हैं. क्यों? क्योंकि ट्रेडर्स रिएक्ट करते हैं.
इसलिए, लंबी सोच रखें. सही सवाल पूछें: क्या इटर्नल अगले 10 साल में कमाल की कंपाउंडिंग मशीन बन सकती है?
हमारे एनालिस्ट्स ने सारा होमवर्क किया है, गहरी पड़ताल की है और नंबरों को खंगाला है. जानिए कि क्या इटर्नल वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र की लॉन्ग-टर्म रेकमंडेशन लिस्ट में जगह बनाती है.
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डिस्क्लेमर: ये कोई स्टॉक रेकमंडेशन नहीं है. ये स्टोरी आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंस की सहायता से बनाई गई है और केवल सूचना के उद्देश्य से है. निवेश के फै़सले लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें या किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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