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सारांशः पिछले पांच सालों में निफ़्टी का P/E क़रीब 55 ट्रेडिंग दिनों के लिए 20 से नीचे रहा है. यह फिर वहीं पहुंच गया है. आख़िरी बार ऐसा मार्च 2020 में हुआ था. फ़ंड मैनेजर इसे नोटिस कर रहे हैं और ज़्यादातर बातों पर उनमें कोई मतभेद नहीं है.
30 मार्च 2026 को निफ़्टी 50 का ट्रेलिंग P/E गिरकर 19.62 पर आ गया.
यह कितना दुर्लभ है? एक हिसाब के मुताबिक़ पिछले पांच सालों में निफ़्टी का P/E क़रीब 55 ट्रेडिंग दिनों के लिए 20 से नीचे रहा है. कोविड गिरावट के दौरान 14 दिन. 2021 में 30 दिन. उसके बाद कुछ ही दिनों के लिए. एक बात ध्यान रखने वाली है: NSE ने अप्रैल 2021 में स्टैंडअलोन से कंसॉलिडेटेड अर्निंग्स पर स्विच किया, इसलिए यह गिनती दो अलग PE सीरीज़ को मिलाती है. सटीक संख्या पर बहस हो सकती है. लेकिन जो बात बहस से परे है वो यह है कि किसी भी तरीक़े से 20 से नीचे के आंकड़े बेहद कम रहे हैं.
आख़िरी बार P/E इतना नीचे मार्च 2020 में आया था. उसके बाद अगले चार साल में निफ़्टी तिगुना हो गया.
पिछले एक हफ़्ते में हमने फ़ंड मैनेजर, क्वांट एनालिस्ट और स्ट्रैटेजी डेस्क के नज़रिए जमा किए. प्रशांत जैन. एस नरेन. कैफे़म्यूचुअल के राउंडटेबल पर तीन फ़ंड मैनेजर. ICICI डायरेक्ट की स्ट्रैटेजी टीम. क्वांट म्यूचुअल फ़ंड. इनमें इस बात पर मतभेद है कि आपको कितनी तेज़ी से क़दम उठाना चाहिए. इस बात पर एकमत हैं: रिस्क-रिवॉर्ड काफ़ी अरसे में सबसे बेहतर दिख रहा है.
जैन का कहना है "वाजिब", लेकिन "सस्ता" नहीं
यह फ़र्क़ मायने रखता है. प्रशांत जैन के मार्च नोट में बताया गया है कि निफ़्टी सिर्फ़ 12% नहीं गिरा है. यह 18 महीनों से एक दायरे में भी घूम रहा है. इस समय की गिरावट ने वो काम किया है जो तेज़ गिरावट करती. उनका अनुमान है कि कुल दबाव क़रीब 20% का रहा है. एक साल के फ़ॉरवर्ड अर्निंग्स के 17.5 गुना पर वो मार्केट को वाजिब कहने को तैयार हैं. सस्ता नहीं. वो उस शब्द को लेकर सावधान हैं. उनकी सलाह: अभी से इक्विटी में धीरे-धीरे निवेश करना शुरू करें, हफ़्तों में, एक झटके में नहीं.
नरेन के तीनों मॉडल एक ही दिन हरे हुए
ICICI प्रुडेंशियल के एस. नरेन के पास 3 प्रॉप्रायटरी इंडिकेटर हैं. उनका इक्विटी वैल्यूएशन इंडेक्स, जो P/E, P/B, G-Sec यील्ड और मार्केट-कैप-टू-GDP का मिला-जुला रूप है, 30 मार्च को तीन साल की न्यूट्रल पोज़िशन के बाद ग्रीन हो गया. 2005 से पीछे जाएं तो जब भी यह इंडेक्स ग्रीन ज़ोन में रहा है, निफ़्टी 50 TRI का एक साल का मीडियन रिटर्न 20.6% रहा है और 69% बार रिटर्न 15% से ज़्यादा रहा है.
उनका BAF मॉडल तीन साल में पहली बार 60% इक्विटी से ऊपर गया. उनका सेंटीमेंट मॉडल मार्च में FII की रिकॉर्ड बिक़वाली को कॉन्ट्रेरियन संकेत के तौर पर पढ़ता है. तीनों, एक ही हफ़्ते में.
वो फ़्लेक्सी-कैप, वैल्यू या बिज़नेस साइकल फ़ंड में SIP या STP की सलाह दे रहे हैं. लेकिन वह उम्मीदें संतुलित रखने पर भी स्पष्ट हैं. 2020 में मार्केट सस्ता था और डोमेस्टिक पोज़िशनिंग बेहद नेगेटिव थी. आज गिरावट असली है लेकिन SIP फ़्लो मज़बूत है और रिटेल ओनरशिप रिकॉर्ड ऊंचाई पर है. दोबारा 3 गुना की उम्मीद मत रखें.
मुल्की, गुजराती, श्रीराम
कैफे़म्यूचुअल का अप्रैल आउटलुक, 31 मार्च को आया, जिसमें नवी म्यूचुअल फ़ंड के आदित्य मुल्की, क्वांटम AMC के केतन गुजराती और बड़ौदा BNP परिबास के जितेंद्र श्रीराम को एक मंच पर लाया. वो एक ही गिरावट देख रहे हैं: मार्च में निफ़्टी 10% नीचे, वेस्ट एशिया की उथल-पुथल, कच्चे तेल की उछाल और FII की निकासी की वजह से. एनर्जी और फ़ाइनेंशियल्स को सबसे ज़्यादा चोट लगी.
उनका नज़रिया: अभी मिड और स्मॉल-कैप के मुक़ाबले लार्ज-कैप बेहतर स्थिति में हैं, जब कच्चा तेल महंगा हो तो प्राइसिंग पावर मायने रखती है. SIP जारी रखें, गिरावट पर थोड़ा और लगाएं, अचानक कोई क़दम न उठाएं. और कच्चे तेल पर नज़र रखें. अगर ईरान की स्थिति सामान्य होती है तो हालात लोगों की सोच से ज़्यादा तेज़ी से बदल सकते हैं.
निफ़्टी अपने इतिहास के मुक़ाबले कहां है
यह ICICI डायरेक्ट की मार्च के आख़िर की स्ट्रैटेजी रिपोर्ट से है और इसमें सबसे ज़्यादा डेटा है. निफ़्टी का फ़ॉरवर्ड P/E 17.5 गुना है. यह 5 साल के औसत 19.6 और 10 साल के औसत 18.6 दोनों से नीचे है. संदर्भ के लिए, रूस-यूक्रेन बिकवाली के दौरान 16.8 के निचले स्तर पर था. हम उसी के आसपास हैं.
उनका सेंटीमेंट इंडिकेटर बता रहा है कि मार्केट में बिकवाली ज़रूरत से ज़्यादा हो चुकी है. दूसरे उभरते बाज़ारों के मुक़ाबले भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम, जिसने दो साल तक विदेशी निवेशकों को दूर रखा, पलट गया है: यह अब लंबे समय के औसत से 9% नीचे है. और एक पैटर्न ध्यान देने लायक़ है: भारतीय मार्केट की गिरावट का दौर आमतौर पर 19 महीने से ज़्यादा नहीं चला है. यह वाला छह महीने पुराना है.
उनकी सलाह ख़ास है. 23,000 से नीचे निफ़्टी में हर 200-300 पॉइंट की गिरावट लम्पसम लगाने का मौक़ा है.
और फिर है क्वांट
क्वांट म्यूचुअल फ़ंड अलग है. जहां बाकी सब "धीरे-धीरे" कहते हैं, क्वांट कहता है "एग्रेसिव तरीक़े से." उनका एनालेसिस फ़्रेमवर्क यह संकेत पकड़ रहा है कि निवेशक घबराकर बिकवाली कर चुके हैं और बाज़ार ने अपना निचला स्तर छू लिया है. भारत की GDP चीन से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रही है, अर्निंग्स पलट रही हैं और दरें कम रह रही हैं. वो इसे कोविड के बाद का सबसे बड़ा ख़रीदारी का मौक़ा बता रहे हैं.
शायद. यह एक बड़ा दावा है और बड़े दावों के साथ जो सावधानी आती है वो यहां भी लागू है. लेकिन यह जानना उपयोगी है कि स्पेक्ट्रम का एक सिरा कहां है.
तो आप कहां खड़े हैं
आख़िरी बार इतने फ़ंड मैनेजर 2021 के आख़िर में किसी बात पर एकमत हुए थे, जब सब कह रहे थे कि मार्केट बहुत महंगा है. वो सही थे, बस थोड़े जल्दी. इस बार वो दूसरी दिशा की तरफ़ इशारा कर रहे हैं. दायरा "SIP जारी रखो" से लेकर "एग्रेसिव तरीक़े से रीबैलेंस करो" तक है. कोई यह नहीं कह रहा कि बाहर रहो.
कुछ बातें ध्यान में रखने वाली हैं. P/E रेशियो ट्रेलिंग अर्निंग्स पर चलते हैं. अगर Q4 FY26 या Q1 FY27 के नंबर कमज़ोर आए तो मौजूदा P/E कम आकर्षक लग सकता है भले ही इंडेक्स न हिले. $100 से ऊपर का कच्चा तेल इसे एक ज़िंदा जोख़िम बनाता है. और मार्च 2020 से तुलना सिर्फ़ इतनी दूर तक जाती है. तब रिटेल निवेशक मार्केट छोड़ रहे थे. आज वो अभी भी आ रहे हैं. SIP फ़्लो रिकॉर्ड पर है. गिरावट व्यवस्थित रही है, लेकिन घबराहट भरी नहीं. यह अलग सेटअप है और शायद ज़्यादा मध्यम नतीजा देगा.
इन सबके बावजूद बुनियादी तस्वीर नहीं बदलती. जिस शख़्स के पास लगाने के लिए पैसा है और पांच साल या उससे ज़्यादा का समय है, उसके लिए आंकड़े काफ़ी अरसे में सबसे बेहतर दिखते हैं. समझदारी यह है कि परफ़ेक्ट निचले स्तर का इंतज़ार न करें. पैसा लगाना शुरू करें. थोड़ा-थोड़ा, अगले कुछ हफ़्तों में.
20 से नीचे का P/E अक्सर नहीं आता. यह ज़्यादा देर तक नहीं टिक सकता.
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