
अरुण छाबड़ा नए निवेशक हैं। वे न्यूज चैनलों में अक्सर देखते हैं कि सेंसेक्स में तेजी का दौर चल रहा है। वे अखबारों में भी पढ़ते हैं कि बाजार रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। उनके आसपास के लोग थोड़ा ज्यादा जोखिम उठाते हुए बड़े पैमाने पर मुनाफा कमा रहे हैं। अरुण छाबड़ा भी बाजार से मुनाफा कमाना चाहते हैं लेकिन वे सीधे इक्विटी में निवेश करने को लेकर सहज नहीं हैं क्योंकि इसमें जोखिम अधिक होता है। किसी ने उनको म्युचुअल फंड के बारे में सुझाव दिया और म्युचुअल फंड के बारे में थोड़ी रिसर्च करने के बाद छाबड़ा ने फैसला किया कि उनके लिए म्युचुअल फंड निवेश के लिहाज से सही विकल्प होगा। म्युचुअल फंड अच्छा रिटर्न देते हैं और इसमें इक्विटी जितना जोखिम भी नहीं है। तो ऐसे में अब उनको निवेश के लिए सही फंड चुनना है। उन्होंने एक फंड चुना है लेकिन वे स्कीम के तीन ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं। ये ऑप्शन है डिवीडेंड, डिवीडेंड इन्वेस्टमेंट और ग्रोथ। उन्होंने गौर किया कि डिवीडेंड ऑप्शन के तहत फंड नियमित तौर पर डिवीडेंड डिक्लेयर करता रहता है। लेकिन ग्रोथ ऑप्शन में ऐसा कोई पेमेंट नहीं होता है। इससे उनको लगा कि डिवीडेंड ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद है। हालांकि इस तरह के तमाम निवेशकों की तरह अरुण छाबड़ा भी गलत हैं।
आपके मुनाफे से ही डिवीडेंड देता है फंड
जब म्युचुअल फंड को सिर्फ निवेश और यील्ड के नजरिए से देखा जाता है तो यह मायने नहीं रहता है कि किस ऑप्शन में निवेश किया जा रहा है। डिवीडेंड को अक्सर फंड के प्रदर्शन के संकेत के तौर पर देखा जाता है। यह निश्चित तौर पर सही नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिवीडेंट आपके फंड अकाउंट से ही काट कर आपको दिया जाता है। उदाहरण के लिए जब 2,000 रुपए का निवेश 20 रुपए प्रति यूनिट की एनएवी पर किया जाता है तो अपको फंड की 100 यूनिट मिलती है। इसके बाद फंड को 20 फीसदी मुनाफ होता है। और यूनिट की कीमत 24 रुपए प्रति यूनिट हो जाती है और निवेश की वैल्यू बढ़ कर 2,400 रुपए हो जाती है। अब, फंड 50 फीसदी का डिवीडेंड डिक्लेयर करता है और 500 रुपए का पेमेंट करता है। अब एनएवी की कीमत घट कर 19 रुपए हो जाएगी और इस तरह से होल्डिंग की वैल्यू 2400 रुपए से गिर कर 1900 रुपए हो जाती है। इस तरह से हुआ यह है कि होल्डिंग का एक हिस्सा डिवीडेंड के तौर पर दिया गया है। इसका कोई अतिरिक्त फायदा नहीं है। हालांकि डिवीडेंड का भी एक फायदा है। आपको कुछ अतिरिक्त नहीं मिलेगा लेकिन कुछ टैक्स बचा सकते हैं। इक्विटी म्युचुअल फंड का डिवीडेंड टैकस फ्री होता है। टैक्स बचाने के लिहाज से यह इक्विटी से रिटर्न हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका है। इस टैक्स फ्री डिवीडेंड का इस्तेमाल शार्ट टर्म कैपिटल गेन्स को ऑफसेट करने में भी किया जा सकता है।
डेट फंड में लगता है डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स
वहीं, दूसरी तरफ डेट फंड की बात करें तो फंड द्वारा दिए जाने वाले सभी डिवीडेंड पर 14.1625 फीसदी डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगता है। यह टैक्स उस रकम पर लगता है जिसे फंड डिवीडेंड के तौर पर देना चाहता है। अब अगर फंड निवेशकों को 100 रुपए का डिवीडेंड देना चाहता है तो 100 रुपए में 14.1625 फीसदी जोड़ कर प्रॉफिट बुक करना होगा। इस तरह से फंउ 114.1625 रुपए का डिवीडेंड डिक्लेयर करेगा। इसमें से 14.1625 रुपए डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के तौर पर सरकार के पास जाएंगे और निवेशकों को 100 रुपए मिलेंगे।
टैक्स देनदारी कम करने वाला विकल्प है बेहतर
निवेशकों को ऐसा ऑप्शन चुनना चाहिए जो उनकी टैक्स देनदारी को कम से कम करता हो। अगर डिवीडेंड इनकम टैक्स फ्री है तो डिवीडेंड ऑप्शन या डिवीडेंड रीइन्वेस्टमेंट ऑप्शन बेहतर विकल्प है। इक्विटी फंड में डिवीडेंड टैक्स फ्री है। वहीं अगर कैपिटल गेन्स टैक्स फ्री है ग्रोथ ऑप्शन चुनना शायद बेहतर विकल्प होगा। और अगर दोनों टैक्स फ्री हैं तो दोनों ऑप्शन में कुल रिटर्न एक समान होगा।
ये लेख पहली बार नवंबर 27, 2020 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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