इंटरव्यू

जानिए, आने वाले वक़्त में आपको अपने पोर्टफ़ोलियो में बड़ा बदलाव करना होगा या नहीं?

HDFC AMC की रोशी जैन अपने फ़ंड्स के परफ़ॉर्मेंस और आज के बाज़ार में निवेशकों के लिए ध्यान रखने वाली कई अहम बातें बता रही हैं

जानिए, आने वाले वक़्त में आपको अपने पोर्टफ़ोलियो में बड़ा बदलाव करना होगा या नहीं?

रोशी जैन (सीनियर फ़ंड मैनेजर - इक्विटी, HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड) इंडस्ट्री की सबसे जानी-मानी फ़ंड मैनेजरों में से एक हैं. फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फ़ंड में अपने सफल कार्यकाल के बाद उन्होंने HDFC AMC की बागडोर संभाली, जहां उन्होंने अच्छे नतीजे दिए. उनके मैनेज किये जाने वाले फ़ंड्स - HDFC फ़्लेक्सी कैप, HDFC ELSS टैक्स सेवर और HDFC फ़ोकस्ड फ़ंड का लगातार अच्छा प्रदर्शन उनकी क़ाबिलियत दिखाता है. इन फ़ंड्स की कुल वैल्यू ₹75,000 करोड़ है. अलग-अलग मुद्दों -- आम चुनावों का मार्केट पर असर, उनकी निवेश रणनीति और उनके फ़ंड्स की सफलता के कारणों -- पर रोशी जैन की राय जानने के लिए हमने हाल ही में उनसे ख़ास बातचीत की. उन्होंने इस बारे में भी अपने विचार व्यक्त किए कि क्या निवेशकों को आने वाले वक़्त में पोर्टफ़ोलियो में बड़े बदलाव की ज़रूरत होगी. इस वक़्त चल रही भू-राजनीतिक झड़पों के बीच आप मीडियम-टर्म में मार्केट को कैसे देखती हैं? आप ग्रोथ की संभावनाओं और वैल्यूएशन के संदर्भ में मिड और स्मॉल-कैप सेक्टरों को कैसे देखती हैं? भू-राजनीतिक मुद्दों का निश्चित रूप से इकोनॉमिक ग्रोथ और कॉस्ट ऑफ़ कैपिटल पर असर पड़ता है. नतीजा, इससे मीडियम-टर्म में पूरे मार्केट पर असर पड़ता है. वैसे तो हम आम तौर पर ये सोचते हैं कि भू-राजनीतिक झड़पों को सिर्फ़ नकारात्मक और शार्ट-टर्म असर पड़ता है, पर मोटे तौर पर मेरा मानना ​​है कि भारतीय संदर्भ में वैश्विक मुद्दे कई अवसर भी लेकर आते हैं क्योंकि वैश्विक कंपनियां ऑफ़शोरिंग, सप्लाई चैन डाइवर्सिफ़िकेशन और कॉस्ट-कटिंग के ज़रिए जोख़िम कम करने के बारे में सोचती हैं. जहां तक मिड- और स्मॉल-कैप सेग्मेंट का सवाल है, अच्छी ग्रोथ संभावनाओं और एक आरामदायक लेवरेज़ ने उन्हें अच्छी स्थिति में रखा हुआ है, पर वैल्यूएशन मीडियम-टर्म के काफ़ी सकारात्मक प

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