बजट स्पेशल

आपके पैसे पर क्या असर डालेगा बजट 2025?

संशोधित टैक्स स्लैब, बेहतर TDS/TCS लिमिट और घर मालिकों के लिए बेनेफ़िट इस वर्ष के बजट में घोषित कुछ अहम बदलाव हैं

Budget 2025 अगले वित्त वर्ष में आपके पैसे को कैसे प्रभावित करेगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2025 में कई प्रमुख रिफॉर्म्स का ऐलान किया, जो टैक्सपेयर्स को उत्साहित करेंगे, टैक्सेशन को सरल बनाएंगे, विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे और वित्तीय समावेशन को बढ़ाएंगे. प्रमुख हाइलाइट्स में टैक्स से जुड़े बदलाव शामिल थे, जिनमें ₹12 लाख तक की इनकम के लिए शून्य कर, अगले सप्ताह पेश किया जाने वाला एक नया इनकम टैक्स बिल, तर्कसंगत TDS/TCS लिमिट और घर मालिकों के लिए ज़्यादा बेनेफ़िट शामिल हैं.

यहां बजट 2025 की सबसे बड़ी घोषणाओं का विवरण दिया गया है और बताया गया है कि वे आपके लिए व्यक्तिगत स्तर पर क्या मायने रखती हैं.

₹12 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं

अगर आपकी सालाना इनकम ₹12.75 लाख (₹12 लाख तक और अतिरिक्त ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन) है, तो आपको कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा.

इससे पहले, नई कर व्यवस्था (new tax regime) के तहत ये सीमा ₹7 लाख (स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ ₹7.75 लाख) थी.

संशोधित टैक्स स्लैब्स

यहां पर मौजूदा और नए स्क्ट्रक्चर के बीच तुलना की गई है

नई कर व्यवस्था कर की दर नई कर व्यवस्था कर की दर
₹3 लाख तक 0% ₹4 लाख 0%
₹3-7 लाख 5% ₹4-8 लाख 5%
₹7-10 लाख 10% ₹8-12 लाख 10%
₹10-12 लाख 15% ₹12-16 लाख 15%
₹12-15 लाख 20% ₹16-20 लाख 20%
₹15 लाख से ज़्यादा 30% ₹20-24 लाख 25%
₹24 लाख से ज़्यादा 30%
₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन सैलरीड टैक्सपेयर्स पर लागू है

TDS और TCS से जुड़े बदलाव

इनकम टैक्स में बदलाव ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है, लेकिन ये देश के नागरिकों को दी जाने वाली एकमात्र बड़ी राहत नहीं है. TDS (स्रोत पर टैक्स की कटौती) और TCS (स्रोत पर इकट्ठा किया गया टैक्स) में भी संशोधन किया गया है.

  • सीनियर सिटिज़ंस के लिए इंटरेस्ट इनकम पर TDS की सीमा को दोगुना करके ₹50,000 से ₹1 लाख और अन्य के लिए ₹40,000 से ₹50,000 कर दिया गया है.
  • TDS के लिए रेंटल इनकम की सीमा सालाना ₹2.4 लाख से बढ़ाकर मासिक ₹50,000 (सालाना ₹6 लाख के बराबर) कर दी गई है, जिससे छोटे मकान मालिकों और किरायेदारों को फ़ायदा होगा.
  • RBI की लिबराइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में धन भेजने पर TCS की सीमा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है.
  • क़र्ज़ द्वारा वित्तपोषित एजुकेशन संबंधी धनराशि भेजने पर TCS हटा दिया गया है, जिससे विदेश में पढ़ाई ज़्यादा सुलभ हो गई है.
  • पहले, किसी फ़ाइनेंशियल ईयर में म्यूचुअल फ़ंड से कुल डिविडेंड पेमेंट ₹5,000 से ज़्यादा होता था, तो TDS काटा जाता था. अब इस लिमिट को बढ़ाकर ₹10,000 कर दिया गया है, जिससे उन निवेशकों की संख्या कम हो जाएगी जो डिविडेंड पर TDS देते हैं (सेक्शन 194K).

नया इनकम टैक्स बिल

अगले सप्ताह एक नया इनकम टैक्स बिल पेश किया जाएगा, जिसमें संभवतः ज़्यादा सरलीकरण तथा बेहतर कंप्लायंस ज़रूरतें शामिल होंगी.

अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई गई

सरकार ने अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को संबंधित एसेसमेंट ईयर के बाद दो वर्ष की मौजूदा सीमा से बढ़ाकर चार साल कर दिया है.

हालांकि, समय पर कंप्लायंस को प्रोत्साहित करने के लिए, अतिरिक्त टैक्स लागू होंगे:

  • अगर अपडेटेड रिटर्न 24 से 36 महीनों के बीच फ़ाइल किया जाता है, तो कुल टैक्स और इंटरेस्ट का 60 फ़ीसदी,
  • अगर 36 से 48 महीनों के बीच फ़ाइल किया जाता है, तो 70 फ़ीसदी.
  • अगर 24 महीने से पहले दाखिल किया जाता है, तो दरें अपरिवर्तित रहती हैं.

KYC का कायाकल्प

सरकार 2025 में एक संशोधित केंद्रीय नो योर कस्टमर (KYC) सिस्टम शुरू करेगी, साथ ही समय-समय पर अपडेट के लिए एक व्यवस्थित ढांचा भी पेश करेगी. इस आधुनिक रजिस्ट्री का उद्देश्य KYC प्रोसेस को सरल बनाना है, जिससे ये यूजर्स के ज़्यादा अनुकूल और कुशल बन सके.

ये भी पढ़िए- टैक्स में राहत से ख़ुशी तो मिलेगी, लेकिन बचत पर असर पड़ सकता है

NPS वात्सल्य टैक्स बेनेफ़िट्स (सिर्फ़ पुरानी कर व्यवस्था के लिए)

  • NPS वात्सल्य में योगदान अब इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD(1B) के तहत कटौती के लिए पात्र होगा, जो मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के समान है.
  • टैक्सपेयर्स अब NPS और NPS वात्सल्य दोनों में निवेश के लिए ₹50,000 तक की कटौती का दावा कर सकते हैं.
  • माना जा रहा है कि ये कोई ख़ास लाभ नहीं है, क्योंकि ये उन लोगों को मिलेगा जो पुरानी कर व्यवस्था के साथ बने रहते हैं, जिसे अपनाने वाले वैसे भी अब बहुत कम हैं और उनकी संख्या घटती जा रही है.

दो प्रॉपर्टी वाले घर मालिकों को राहत

इससे पहले, कोई व्यक्ति अधिकतम दो संपत्तियों को 'अपने कब्जे वाली' (सेल्फ ऑक्युपाइड) के रूप में तभी दावा कर सकता था, जब वो उनमें रह रहा हो या कहीं और रोजगार या व्यावसायिक ज़रूरतों के कारण रहने में असमर्थ हो. ऐसे मामलों में, मानी गई रेंटल वैल्यू शून्य होती थी और कर योग्य इनकम में कोई काल्पनिक आय नहीं जोड़ी जाती थी.

हालांकि, हाल के बजट में इन शर्तों को हटा दिया है, जिससे व्यक्ति हर स्थिति में दो प्रॉपर्टी को सेल्फ ऑक्युपाइड के रूप में दावा कर सकता है और ये सुनिश्चित करता है कि कोई काल्पनिक रेंटल इनकम न हो.

इंश्योरेंस सेक्टर में 100 फ़ीसदी FDI लिमिट

इंश्योरेंस सेक्टर में FDI की सीमा 74 फ़ीसदी से बढ़ाकर 100 फ़ीसदी कर दी गई है, जिससे विदेशी कंपनियों को भारत में प्रवेश करने की अनुमति मिल गई है. ये भारतीय कंज्यूमर्स के लिए अच्छी ख़बर हो सकती है, क्योंकि विदेशी बीमा कंपनियों के प्रवेश से उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है, जो आम तौर पर ग्राहकों के लिए अच्छा है.

हालांकि, 100 फ़ीसदी की सीमा के साथ ये शर्त भी है कि इकट्ठा किए गए प्रीमियम को पूरी तरह से भारत में ही फिर से निवेश किया जाना चाहिए.

ये भी पढ़िए- बजट 2025: टैक्स स्लैब रिवाइज़ होने के बाद अब आप ₹35,000-₹1.1 लाख बचाएंगे

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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