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डेथ मुश्किल होती है. लेकिन उस दुख के बीच फ़ाइनेंशियल पेपरवर्क से निपटना इसे और भी जटिल बना सकता है. फिर भी, ख़ासकर अगर आप किसी के म्यूचुअल फ़ंड निवेश के लिए नॉमिनी हैं तो आपके लिए इस संबंध में तस्वीर साफ़ होनी ज़रूरी है.
सौभाग्य से, म्यूचुअल फ़ंड कंपनियों ने एक स्टैंडर्ड और व्यवस्थित प्रक्रिया बनाई है ताकि नॉमिनी बिना गैर ज़रूरी जटिलताओं के निवेश पर दावा कर सकें. लेकिन आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि ऐसे में क्या करना चाहिए. असल में एक छोटी सी गलती, अधूरा फ़ॉर्म, कोई दस्तावेज खोना या KYC की कमी पूरी प्रक्रिया को रोक सकती है.
ये आर्टिकल आपको वो सब कुछ बताता है जो आपको जानना चाहिए. इसमें शामिल है- स्टेप-बाई-स्टेप प्रक्रिया, कौन से डॉक्युमेंट जमा करने हैं और अगर कोई नॉमिनी नहीं है तो क्या होगा या वसीयत की स्थिति में क्या होता है.
स्टेप-बाई-स्टेप: नॉमिनी म्यूचुअल फ़ंड यूनिट्स का दावा कैसे कर सकता है
1. ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फ़ॉर्म (फॉर्म T3) भरें: ये वो प्रमुख डॉक्युमेंट है जिससे आप प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. आप फ़ॉर्म टी3 को AMFI की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं.
2. डेथ सर्टिफ़िकेट जमा करें: मृतक के डेथ सर्टिफ़िकेट की सेल्फ- अटेस्टेड और नोटरीकृत प्रति जमा करें. अगर नॉमिनी नाबालिग है, तो बर्थ सर्टिफ़िकेट की प्रति भी ज़रूरी हो सकती है.
3. आइडेंटिटी और बैंक प्रूफ़ प्रदान करें: नॉमिनी को अपने पैन कार्ड की सेल्फ-अटेस्टेड प्रति, नॉमिनी का नाम लिखा हुआ एक कैंसिल्ड चेक या हाल की बैंक स्टेटमेंट या पासबुक (3 महीने से ज़्यादा पुरानी नहीं) और KYC एकनॉलेज्ड या भरा हुआ KYC फ़ॉर्म (यदि पहले से KYC-कंप्लायंट नहीं है) जमा करना होगा.
4. क्लेम के साइज़ के आधार पर सिग्नेचर अटेस्टेशन: क्लेम की रक़म के आधार पर सिग्नेचर अटेस्ट कराना ज़रूरी है:
- ₹5 लाख तक के क्लेम के लिए: आमतौर पर बैंक मैनेजर द्वारा सिग्नेचर अटेस्टेशन स्वीकार किया जाता है. अगर नॉमिनी नाबालिग है, तो गार्जियन के सिग्नेचर अटेस्ट होने चाहिए.
- ₹5 लाख से ज़्यादा के क्लेम के लिए: आमतौर पर नोटरी पब्लिक या ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) से अटेस्ट कराना ज़रूरी है. कुछ AMC बैंक अधिकारी के अटेस्टेशन को स्वीकार कर लेते हैं. आप फ़ंड हाउस से इसकी पुष्टि कर सकते हैं.
5. अतिरिक्त डॉक्युमेंट: इनमें शामिल हो सकते हैं: मृतक के आइडेंटिटी प्रूफ़ की सेल्फ अटेस्टेड प्रति (उदाहरण के लिए: पैन, आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी). यदि नॉमिनी नाबालिग है, तो गार्जियन को उनकी ओर से काम करना होगा और अपनी KYC और ID डॉक्युमेंट्स जमा करने होंगे.
सभी दस्तावेजों के सत्यापन और KYC कंप्लायंस की पुष्टि होने के बाद, म्यूचुअल फ़ंड यूनिट्स नॉमिनी को ट्रांसफर कर दी जाएंगी. इसके बाद, नॉमिनी नया यूनिटहोल्डर बन जाता है और वो रिडेम्शन या स्विचिंग जैसे ट्रांजेक्शन कर सकता है.
यदि कई यूनिटधारक हों तो क्या?
ये ध्यान रखना अहम है कि अगर कई यूनिटहोल्डर हैं, तो एक भी यूनिटहोल्डर जीवित रहने तक नॉमिनी का निवेश पर कोई दावा नहीं होगा. ऐसी स्थिति में, म्यूचुअल फ़ंड यूनिट्स ऑटोमैटिक तरीक़े से जीवित यूनिटहोल्डर को ट्रांसफर हो जाती हैं और नॉमिनी का अधिकार केवल सभी यूनिटहोल्डर की डेथ के बाद ही बनता है.
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यदि कोई नॉमिनी नहीं है तो क्या?
जब म्यूचुअल फ़ंड निवेशक की किसी को नॉमिनी बनाए बिना डेथ हो जाती है, तो निवेश को क्लेम करने की प्रक्रिया ज़्यादा जटिल हो जाती है. फ़ंड हाउस को कानूनी वारिस का प्रमाण चाहिए और डॉक्युमेंट क्लेम की रक़म पर निर्भर करते हैं.
ज़रूरी डॉक्युमेंट्स में आमतौर पर शामिल हैं:
- निवेशक का डेथ सर्टिफिकेट
- दावा करने वाले का पैन और KYC डिटेल
- दावा करने वाले का बैंक प्रूफ़
- मृतक का आइडेंटिटी प्रूफ़
क्लेम की वैल्यू के आधार पर:
- ₹5 लाख तक: बैंक द्वारा सिग्नेचर अटेस्ट करना, रिश्ते का प्रूफ़, अन्य कानूनी वारिसों से NOC, क्षतिपूर्ति बॉन्ड, वारिस होने का एफिडेविट.
- ₹5 लाख से ज़्यादा: नोटरी या मजिस्ट्रेट द्वारा सिग्नेचर अटेस्ट हों. आपको रजिस्टर्ड वसीयत और कानूनी उत्तराधिकार का सर्टिफिकेट जैसे लीगल डॉक्युमेंट भी जमा करने होंगे.
- ₹10 लाख से ज़्यादा के क्लेम के लिए: प्रोबेटेड वसीयत या उत्तराधिकार का सर्टिफिकेट अक्सर ज़रूरी होता है.
नॉमिनी vs कानूनी वारिस: अगर वसीयत हो तो क्या?
कई निवेशक मानते हैं कि नॉमिनी ऑटोमैटिक तरीक़े से म्यूचुअल फ़ंड यूनिट्स का मालिक बन जाता है. लेकिन ये हमेशा सही नहीं है.
नॉमिनी कानूनी उत्तराधिकारी नहीं होता — वो केवल निवेश का ट्रस्टी या संरक्षक होता है, जो वास्तविक लाभार्थी की ओर से यूनिट्स प्राप्त करता है. अगर मृतक की एक वैध वसीयत है जिसमें किसी और को सही उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया गया है, तो उस व्यक्ति का निवेश पर कानूनी अधिकार होता है.
हालांकि, म्यूचुअल फ़ंड हाउस अपने रिकॉर्ड के अनुसार यूनिट्स को नॉमिनी को ट्रांसफर कर सकते हैं. अगर नॉमिनी और वसीयत में नामित कानूनी उत्तराधिकारी के बीच कोई विवाद है, तो मामला कानूनी रूप से अदालत में सुलझाना पड़ सकता है.
निवेशक के लिए सलाह: भविष्य में विवादों से बचने के लिए, सुनिश्चित करें कि आपका नॉमिनेशन और वसीयत एक-दूसरे के अनुरूप हों. इनमें अंतर होने से देरी, कानूनी परेशानियां और उत्तराधिकारियों के बीच तनाव हो सकता है.
आखिरी बात
अपनी फैमिली के लिए जीवन को आसान बनाने के लिए दो काम करें:
- अपने सभी फ़ोलियो में नॉमिनी को रजिस्टर करें.
- अपनी वसीयत को अपडेट करें, ताकि ये आपके इच्छित लाभार्थियों को दर्शाए.
अगर आपको क्लेम की प्रक्रिया के किसी भी हिस्से के बारे में संदेह है, तो म्यूचुअल फ़ंड हाउस या अपने डिस्ट्रीब्यूटर से गाइडैंस लेने में संकोच न करें.
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ये लेख पहली बार मई 20, 2025 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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