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क्या ELSS का दौर ख़त्म लग रहा है? आप ग़लत हो सकते हैं

न्यू टैक्स रिज़ीम में सेक्शन 80C का फ़ायदा नहीं मिलता तो ELSS फ़ंड बेकार लग सकते हैं. लेकिन आप ग़लत हैं.

न्यू टैक्स रिज़ीम में सेक्शन 80C का फ़ायदा नहीं मिलता तो ELSS फ़ंड बेकार लग सकते हैं. लेकिन आप ग़लत हैं.Vinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः जैसे-जैसे ज़्यादा भारतीय न्यू टैक्स रिज़ीम की तरफ़ जा रहे हैं, ELSS फ़ंड की अहमियत कम होती जा रही है. लेकिन इन फ़ंड का सबसे बड़ा फ़ायदा टैक्स बचत नहीं है. यहां जानें क्यों ELSS को अभी से बाहर नहीं करना चाहिए और कुछ निवेशकों के लिए ये अभी भी क्यों काम के हैं.

हर मार्च में टैक्सपेयर बेहतरीन टैक्स-सेविंग निवेश खोजने में जुट जाते थे. ELSS ऐसा ही एक निवेश है.

ELSS (इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम), जिसे टैक्स सेविंग फ़ंड भी कहते हैं, डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड हैं जो सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक के डिडक्शन का फ़ायदा देते हैं. तो पेच क्या है? असल में, यह सुविधा सिर्फ़ ओल्ड टैक्स रिज़ीम में है.

जैसे-जैसे ज़्यादा भारतीय न्यू रिज़ीम की तरफ़ जा रहे हैं, टैक्स का यह फ़ायदा निवेशकों के लिए ग़ायब होता जा रहा है. आंकड़े भी यही दिखाते हैं: पिछले 3 साल में ELSS से ₹388 करोड़ का नेट आउटफ़्लो हुआ है.

लेकिन ज़्यादातर निवेशक यहां एक ग़लती कर रहे हैं. ELSS में टैक्स बचत कभी पूरी कहानी नहीं थी. 80C का पहलू हटा दें तो भी एक दमदार केस बनता है जो तब आसानी से नज़र नहीं आता जब आप सिर्फ़ अपना टैक्स बिल देख रहे हों.

लॉक-इन जो आपके फ़ायदे के लिए काम करती है

ELSS फ़ंड 3 साल के लॉक-इन के साथ आते हैं. ज़्यादातर निवेशक इसे नुक़सान मानते हैं. यह नुक़सान नहीं है.

मार्केट स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाला है और हर तेज़ गिरावट निवेशकों को बाहर निकलने के लिए उकसाती है. ELSS का लॉक-इन वो विकल्प ही हटा देता है: मार्केट के हालात कैसे भी हों, निवेशकों को टिके रहना पड़ता है. यह मजबूरी का धैर्य कोई सज़ा नहीं है. यह अनुशासन है, जो स्ट्रक्चर में बुना हुआ है.

हालांकि एक असली नुक़सान भी है. मान लीजिए कि अगर आपका ELSS फ़ंड 2 साल से कमज़ोर परफ़ॉर्म कर रहा है तो आप पैसा नहीं निकाल सकते. यह कोई छोटी तकलीफ़ नहीं है. पिछड़े फ़ंड में फंसा हर महीना एक ऐसा महीना है जब आपका पैसा सही जगह कंपाउंड नहीं हो रहा. वक़्त के साथ यह फ़ासला भी बढ़ता जाता है.

ELSS के फ़ंड मैनेजर के पास ज़्यादा संभावनाएं होती हैं

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की तरह ELSS फ़ंड भी सभी मार्केट कैप में निवेश कर सकते हैं. लेकिन लॉक-इन उनके मैनेजर को कुछ ऐसा देती है जो फ़्लेक्सी-कैप मैनेजर के पास शायद ही होता है: लंबे नज़रिए से सोचने की आज़ादी.

जब मैनेजर को पता हो कि निवेशक किसी बुरे हफ़्ते में रिडेम्शन नहीं कर सकते तो वो किसी हाई-कन्विक्शन मिडकैप पोज़िशन को शॉर्ट-टर्म उथल-पुथल में बिना डगमगाए थाम सकता है. यह स्ट्रक्चरल धैर्य बेहतर पोज़िशनिंग में बदलता है और रिटर्न में दिखता है.

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आंकड़े इसका साथ देते हैं. 2003 से, 5 साल के रोलिंग रिटर्न बेसिस पर ELSS ने 53% बार फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को और 58% बार Nifty 500 TRI इंडेक्स को पीछे छोड़ा है. यह पिछड़ती हुई कैटेगरी नहीं है. यह एक ऐसी कैटेगरी है जो चुपचाप अपना काम कर रही है.

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ELSS का आउटफ़्लो दरअसल अच्छी ख़बर भी हो सकती है

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की एक समस्या है जो उनसे पीछा नहीं छोड़ती: साइज़.

जैसे-जैसे उनके एसेट बेस में बढ़ोतरी हुई है, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में अहम पोज़िशन लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. असल में बड़ी ख़रीदारी करने से शेयर की क़ीमत में उतार-चढ़ाव का जोखिम पैदा हो जाता है.

नतीजा यह है कि कई फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चुपचाप लार्ज-कैप की तरफ़ खिसक गए हैं, न इसलिए कि उनका मैंडेट बदला, बल्कि इसलिए कि स्केल ने उनके पास कोई और रास्ता नहीं छोड़ा.

ELSS को यह दिक़्क़त नहीं है. जिस आउटफ़्लो ने कैटेगरी को छोटा किया है उसने उसे फुर्तीला भी रखा है. अजीब बात यह है कि जो निवेशक टैक्स बेनेफ़िट खत्म होने की वजह से बाहर जा रहे हैं वो एक दुबली-पतली, बेहतर पोज़िशन वाली कैटेगरी पीछे छोड़ रहे हैं, जो अब उस दौर से ज़्यादा अल्फ़ा बनाने में सक्षम हो सकती है जब सब इसमें घुसना चाहते थे.

तो क्या आपको ELSS में निवेश करना चाहिए?

सारांश में, अगर आप न्यू टैक्स रिज़ीम पर हैं तो ELSS फ़ंड को अभी से बाहर मत करें. कैटेगरी का लॉन्ग-टर्म ट्रैक रिकॉर्ड मज़बूत है और कई मौक़ों पर इसने फ़्लेक्सी-कैप पीयर्स को पीछे छोड़ा है. इसका 3 साल का लॉक-इन वो अनुशासन भी बनाती है जो हर निवेशक के लिए फ़ायदेमंद है, ख़ासकर पहली बार निवेश करने वालों या उनके लिए जो मार्केट में उथल-पुथल आने पर टिके रहना मुश्किल पाते हैं.

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ये लेख पहली बार मार्च 31, 2026 को पब्लिश हुआ.

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