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कई इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश करना एक ख़राब स्ट्रैटेजी है?

हमेशा ज़्यादा फ़ंड्स का मतलब, ज़्यादा डायवर्सिफ़िकेशन नहीं होता

क्या कई इंडेक्स फ़ंड रखना एक ख़राब निवेश स्ट्रैटेजी है?Aditya Roy/AI-Generated Image

नए निवेशकों के लिए ये एक आम शुरुआती क़दम है. इंडेक्स फ़ंड्स की सादगी और परफ़ॉर्मेंस से प्रभावित होकर, वो अपने ₹1 लाख के कॉर्पस को कई सारे इंडेक्स फ़ंड्स में बांट देते हैं. वे सोचते हैं कि इससे उनका पोर्टफ़ोलियो ज़्यादा डायवर्सिफ़ाइड होगा. आख़िरकार, डायवर्सिफ़िकेशन तो निवेश का गोल्डन रूल है, है ना?

लेकिन, ये इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी शायद उतनी सॉलिड नहीं है. यहां जानिए ऐसा क्यों है.

जब वैरायटी बन जाती है रिपीटिशन

ज़्यादातर इंडेक्स फ़ंड्स एक निश्चित स्टॉक्स की लिस्ट को फ़ॉलो करते हैं और कई बार वो एक ही स्टॉक्स को ट्रैक करते हैं.

ये फ़ंड्स लो कॉस्ट, ट्रांसपेरेंसी और बेंचमार्क रिटर्न के लिए बहुत अच्छे हैं. लेकिन अगर आप ढेर सारे इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश करते हैं, तो हो सकता है कि बिना असल डायवर्सिफ़िकेशन के आप बार-बार एक ही स्टॉक्स ख़रीद रहे हों.

उदाहरण के लिए, भारत के टॉप इंडेक्स - निफ़्टी 50, सेंसेक्स और निफ़्टी 100 - 83 से 85% तक एक जैसे हैं. इसलिए, तीनों को ख़रीदने से आपको तीन अलग-अलग बास्केट नहीं मिलेंगे. आपको ज़्यादातर लार्ज-कैप स्टॉक का एक ही सेट मिलेगा.

इंडेक्स स्टॉक्स की संख्या निफ़्टी 50 के साथ ओवरलैप
निफ़्टी 50 50 --
निफ़्टी 100 100 क़रीब 83% वेट समान
सेंसेक्स 30 क़रीब 85% वेट समान

दो उदाहरणों से समझें

ये सब असल पोर्टफ़ोलियो में कैसे काम करता है, ये समझने के लिए हमने दो काल्पनिक निवेशकों की तुलना की:

  • रोहित ने ₹1 लाख तीन अलग-अलग इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश किया है, जो एक दूसरे से काफ़ी अलग हैं: एक निफ़्टी 50 फ़ंड, एक निफ़्टी मिडकैप 150 फ़ंड और एक निफ़्टी स्मॉलकैप 250 फ़ंड.
  • सीमा ने ₹1 लाख को 10 इंडेक्स फ़ंड्स में बांटा है, जो ज़्यादातर लार्ज और मिड-कैप इंडियन इक्विटी बेंचमार्क पर फ़ोकस करते हैं. इनमें निफ़्टी 50, निफ़्टी नेक्स्ट 50, निफ़्टी 100, निफ़्टी 200, निफ़्टी 500, निफ़्टी 500 लार्ज-मिड-स्मॉल, निफ़्टी लार्ज-मिड कैप 250, निफ़्टी बैंक, BSE सेंसेक्स और BSE 100 इंडेक्स शामिल हैं.

दोनों का फ़ाइनल एक्सपोज़र कुछ ऐसा दिखता है:

स्टॉक रोहित के (3 फ़ंड्स) सीमा के (10 फ़ंड्स)
HDFC बैंक 4.40% 10.40%
ICICI बैंक 3.10% 7.80%
रिलायंस 2.90% 4.90%
इंफ़ोसिस लिमिटेड 1.60% 3.00%
भारती एयरटेल लिमिटेड 1.50% 2.60%
टॉप 5 टोटल 13.50% 28.70%

भले ही सीमा ने ज़्यादा फ़ंड्स में निवेश किया, उसका पोर्टफ़ोलियो ज़्यादा कंसंट्रेटेड हो गया, जिसमें सिर्फ़ पांच कंपनियों में उसका 28% से ज़्यादा पैसा एलोकेट किया गया है. ऐसा इसलिए, क्योंकि संबंधित इंडेक्स में स्टॉक्स का भारी ओवरलैप है.

वहीं, रोहित का पोर्टफ़ोलियो मार्केट कैप (लार्ज, मिड, स्मॉल) में डायवर्सिफ़ाइड है, जिससे सिंगल स्टॉक का कंसंट्रेशन कम है और रिस्क ज़्यादा स्प्रेड है.

तो, कितने फ़ंड्स ज़्यादा हैं?
बात नंबर की नहीं, बल्कि इंडेक्स फ़ंड्स के नेचर की है. कई सारे इंडेक्स फ़ंड्स वैल्यू ऐड कर सकते हैं, लेकिन तभी जब वो फ़ंडामेंटली अलग-अलग मार्केट सेगमेंट्स पर बेस्ड हों.

उदाहरण के लिए, एक लार्ज-कैप फ़ंड (जैसे निफ़्टी 50), एक मिड-कैप फ़ंड (जैसे निफ़्टी मिडकैप 150) और एक स्मॉल-कैप फ़ंड (जैसे निफ़्टी स्मॉलकैप 250) या फिर एक इंटरनेशनल इंडेक्स फ़ंड (जैसे नैस्डैक 100 या S&P 500) को मिलाने से रियल डायवर्सिफ़िकेशन मिल सकता है. तो ध्यान रखने की बात है-कम ओवरलैप और अलग-अलग रिस्क-रिटर्न प्रोफ़ाइल.

सिर्फ़ नाम या बेंचमार्क अलग होने के कारण, कई सारे लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड्स सिर्फ़ जमा करने से कोई ख़ास वैल्यू नहीं मिलती. इससे भी बदतर, इनसे आपको डायवर्सिफ़िकेशन का झूठा भरोसा भी मिल सकता है.

निवेश करने से पहले क्या चेक करें?
कोई नया इंडेक्स फ़ंड जोड़ने से पहले, ये चेकलिस्ट फ़ॉलो करें:

  • क्या ये मार्केट का अलग हिस्सा ट्रैक करता है? (जैसे मिड-कैप, ग्लोबल इक्विटी, स्मॉल-कैप)
  • क्या ये मेरे मौजूदा पोर्टफ़ोलियो के साथ ओवरलैप को कम करता है?
  • क्या इसका रिस्क-रिटर्न प्रोफ़ाइल इतना अलग है कि इसे वाजिब ठहराया जा सके?

आप वैल्यू रिसर्च फ़ंड कंपेयर जैसे टूल इस्तेमाल करके फ़ंड होल्डिंग की तुलना कर सकते हैं. इससे पता चलेगा कि अलग-अलग दिखने वाले फ़ंड्स के बीच कितना ओवरलैप है, जो अक्सर हैरान करने वाला होता है.

ध्यान दें!

इंडेक्स इनवेस्टिंग की ताक़त इसकी सादगी में है. लेकिन अगर आप बिना चेक किए ढेर सारे फ़ंड्स इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं, तो ये सादगी ख़त्म हो जाती है.

ज़्यादा इंडेक्स फ़ंड्स जोड़ने से रिस्क अपने आप कम नहीं हो जाता. दरअसल, जब अंडरलाइंग स्टॉक्स एक जैसे होते हैं, तो आप डायवर्सिफ़िकेशन की आड़ में अपने पोर्टफ़ेलियो को एक ही दांव से भर रहे होते हैं

बेहतर तरीक़ा क्या है? कुछ ऐसे इंडेक्स फ़ंड्स चुनो जो सचमुच एक-दूसरे को कॉम्प्लिमेंट करें. इससे आपको रियल डायवर्सिफ़िकेशन, बेहतर बैलेंस और एक क्लीनर पोर्टफ़ोलियो मिलेगा, जिसे मैनेज करना आसान होगा.

निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फ़ंड की इनवेस्टर एजुकेशन और जागरूकता की पहल.

म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए ज़रूरी जानकारी: सभी म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों को एक बार KYC (नो योर कस्टमर) प्रोसेस पूरा करना होता है. निवेशकों को सिर्फ़ SEBI की वेबसाइट पर 'इंटरमीडियरीज़/मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन' के तहत रजिस्टर्ड म्यूचुअल फ़ंड्स के साथ डील करना चाहिए. अपनी शिकायतों के निवारण के लिए, कृपया www.scores.gov.in पर जाएं. KYC, डिटेल में बदलाव और शिकायतों के निवारण के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, mf.nipponindiaim.com/InvestorEducation/what-to-know-when-investing पर विज़िट करें.

म्यूचुअल फ़ंड निवेश मार्केट जोख़िमों के अधीन हैं, सभी स्कीम से जुड़े दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें.

ये भी पढ़ें: एक ही इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फ़ंड्स का NAV अलग-अलग क्यों होता है?

ये लेख पहली बार मई 27, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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