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इंडेक्स के बजाय इंडेक्स फ़ंड क्यों ख़रीदें?

इंडेक्स की नकल करना आसान लगता है, लेकिन ऐसा है नहीं. जानिए इंडेक्स फ़ंड क्यों बेहतर हैं.

इंडेक्स के बजाय इंडेक्स फ़ंड क्यों ख़रीदें?Anand Kumar/AI-Generated Image

“अगर मुझे निफ़्टी 50 पसंद है, तो मैं इंडेक्स फ़ंड में निवेश करने के बजाय सीधे इंडेक्स ही क्यों न ख़रीद लूं?”

ये सवाल ठीक है. लेकिन असल बात ये है: आप इंडेक्स को नहीं ख़रीद सकते.

इंडेक्स बस एक नंबर है - कुछ ख़ास शेयरों के समूह से बना एक परफ़ॉर्मेंस बेंचमार्क है. ये कोई सिक्योरिटी या वित्तीय विकल्प नहीं है, जिसे आप ख़रीद सकें. आप बस इसके सारे शेयर ख़रीदकर इसे दोहराने की कोशिश कर सकते हैं. पर ये सुनने में आसान लगता है, लेकिन खुद करना बिल्कुल भी आसान नहीं है. जानिए ऐसा क्यों है?

ज़्यादा ख़र्च, ज़्यादा मेहनत

निफ़्टी 50 की नकल करने के लिए, आपको इसके सभी 50 शेयर ठीक उसी रेशियो में ख़रीदने होंगे. यानी HDFC बैंक, इंफ़ोसिस और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों में बड़ा पैसा लगाना होगा. 30 अप्रैल, 2025 तक, निफ़्टी 50 के शेयरों का हिस्सा (29 मई, 2025 की क़ीमतों के आधार पर), इंडेक्स को दोहराने के लिए कम से कम ₹8-9 लाख होने चाहिए.

इतने पैसे होने पर भी मुश्किलें हैं. शेयर को दशमलव में नहीं ख़रीदा जा सकता, इसलिए राउंड ऑफ़ करने से मिसअलाइनमेंट होता है. साथ ही, आपको 50 अलग-अलग ट्रेड करने होंगे, ख़रीद-बिक्री की क़ीमतों का हिसाब रखना होगा और हर वक्त क़ीमतों पर नज़र रखनी होगी.

दूसरी ओर, इसकी तुलना इंडेक्स फ़ंड से करें. जहां आप सिर्फ़ ₹500 या ₹100 से शुरुआत कर सकते हैं. आपको बिना मेहनत के तुरंत सारे शेयरों का डायवर्सिफ़िकेशन मिलता है और फ़ंड आपके लिए सब कुछ संभाल लेता है, जिसमें शेयर चुनना और ट्रेड करना शामिल है.

इंडेक्स को ट्रैक करना जितना आसान दिखता है उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल है

50 शेयर ख़रीदना तो बस शुरुआत है. जैसे-जैसे बाज़ार की क़ीमतें बदलती हैं, तो शेयरों का रेशियो भी बदलता है. इंडेक्स में समय-समय पर बदलाव भी होते हैं, जैसे कुछ कंपनियां हटाई या जोड़ी जा सकती हैं.

अगर आप नियमित रूप से बदलाव नहीं करते हैं, तो आपका पोर्टफ़ोलियो असल इंडेक्स से अलग होने लगता है. इस अंतर को ट्रैकिंग एरर कहते हैं, जो ध्यान नहीं देने पर समय के साथ बढ़ता जाता है.

इंडेक्स फ़ंड्स इस तरह बनाए गए हैं कि वो इस अंतर को कम रखें. वो अपने आप बदलाव करते हैं और डिविडेंड, मर्जर या स्टॉक स्प्लिट जैसे कामों को संभालते हैं. बिना फ़ंड मैनेजर की मदद के ये सब खुद करना बहुत मेहनत का काम है और ग़लती होने की संभावना रहती है.

टैक्स की मुश्किल से DIY निवेशक नहीं बच सकते

जब भी आप अपने DIY पोर्टफ़ोलियो को रिबैलेंस करते हैं, तो आपको कुछ शेयर बेचने पड़ सकते हैं और हर बिक्री पर टैक्स लग सकता है. छोटे-मोटे बदलाव भी टैक्स का बोझ बढ़ा सकते हैं.

इंडेक्स फ़ंड्स आपको इस मुश्किल से बचाते हैं. फ़ंड अपने अंदर बदलाव करता है, तो आपको टैक्स तब तक नहीं देना पड़ता, जब तक आप अपने फ़ंड की यूनिट्स न बेचें. और तब भी, हर साल ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म गेन टैक्स-फ़्री होता है.

ये सिर्फ़ फ़ायदा नहीं है - ये टैक्स बचाने और पैसा बढ़ाने का एक स्मार्ट तरीक़ा है.

ये भी पढ़ेंः क्या इंडेक्स फ़ंड और ETF एक जैसे होते हैं?

इंडेक्स फ़ंड की फ़ीस का क्या है?

हां, इंडेक्स फ़ंड्स फ़ीस लेते हैं, जिसे कुल एक्सपेंस रेशियो (TER) कहते हैं. निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड्स के लिए ये आमतौर पर 0.05% से 1% सालाना होती है. लेकिन ये छोटी फ़ीस इन चीजों के लिए है:

  • अपने आप बदलाव करना
  • सटीक ट्रैकिंग
  • टैक्स बचाने की सहूलियत
  • आपके लिए सौदों की मेहनत न करना

इसे सुविधा, सटीकता और लंबे समय तक अनुशासन के लिए छोटा सा ख़र्च समझें, जिसे ज़्यादातर DIY निवेशक बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं.

आख़िरी बात

सवाल -“क्यों न इंडेक्स खुद ही बनाया जाए?” - पहले तो अच्छा लगता है. लेकिन जब आप ख़र्च, मेहनत, ग़लती की संभावना और टैक्स के बारे में सोचते हैं, तो जवाब साफ़ हो जाता है.

इंडेक्स फ़ंड में पैसा लगाकर आप सिर्फ़ निवेश नहीं करते. आप सरलता और सुकून ख़रीदते हैं.

और ये सिर्फ़ आसान ही नहीं है, बल्कि ये एक समझदारी भरा क़दम है.

निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फ़ंड की इनवेस्टर एजुकेशन और जागरूकता की पहल

म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए ज़रूरी जानकारी: सभी म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों को एक बार KYC (नो योर कस्टमर) प्रोसेस पूरा करना होता है. निवेशकों को सिर्फ़ SEBI की वेबसाइट पर 'इंटरमीडियरीज़/मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन' के तहत रजिस्टर्ड म्यूचुअल फ़ंड्स के साथ डील करना चाहिए. अपनी शिकायतों के निवारण के लिए, कृपया www.scores.gov.in पर जाएं. KYC, डिटेल में बदलाव और शिकायतों के निवारण के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, mf.nipponindiaim.com/InvestorEducation/what-to-know-when-investing पर विज़िट करें.

म्यूचुअल फ़ंड निवेश मार्केट से जुड़े जोख़िमों के अधीन हैं. कृपया सभी स्कीम से जुड़े दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें.

ये भी पढ़ें: कई इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश करना एक ख़राब स्ट्रैटेजी है?

ये लेख पहली बार जून 10, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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