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“रिटायरमेंट के बाद ₹20 लाख कहां निवेश करने चाहिए?” हाल ही में एक पाठक ने हमसे ये सवाल पूछा है.
सवाल तो आसान है, लेकिन जवाब? ये उतना आसान नहीं.
असल में, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप इस पैसे से क्या चाहते हैं. क्या आप नियमित रूप से मासिक आमदनी चाहते हैं? क्या आप अगली पीढ़ी के लिए बड़ी रक़म छोड़ना चाहते हैं? या फिर आप चाहते हैं कि आपका निवेश बढ़े और आप बीच-बीच में उसमें से थोड़ा-थोड़ा पैसा निकाल सकें?
तो आइए, तीन स्मार्ट तरीक़ों के बारे में जानते हैं, जिनसे आप अपने ₹20 लाख को अपने रिटायरमेंट के हिसाब से काम में ला सकते हैं.
स्थिति 1: जब नियमित आमदनी पहली प्राथमिकता हो
अगर आपका गोल अपनी बचत से स्थिर आमदनी का स्रोत बनाना है, तो आपको फ़िक्स्ड-इनकम के ऐसे विकल्प चाहिए जो सुरक्षित और भरोसेमंद हों.
सबसे अच्छा विकल्प? सीनियर सिटीजन्स सेविंग स्कीम (SCSS) है. 8.2 प्रतिशत ब्याज के साथ, ये अभी सबसे आकर्षक फ़िक्स्ड-इनकम विकल्पों में से एक है. ये भारत सरकार द्वारा समर्थित है और हर तिमाही में ब्याज देता है.
हालांकि, एक छोटी सी अड़चन है: SCSS में निवेश की सीमा है. आप इसमें अधिकतम ₹30 लाख तक ही निवेश कर सकते हैं. अगर आपने पहले से ही यह सीमा छू ली है, तो आपको दूसरे विकल्प तलाशने होंगे. एक अच्छा रास्ता है सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP), जो शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड से लिया जा सकता है. इससे आपको नियमित आमदनी मिल सकती है.
ख़ास बात ये है, पूरी तरह से फ़िक्स्ड इनकम पर निर्भर रहना लंबे रिटायरमेंट में समझदारी नहीं है. महंगाई को मात देने और अपने कॉर्पस को वास्तविक रूप में कम होने से बचाने के लिए, आपके कुल पोर्टफ़ोलियो का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा इक्विटी में होना चाहिए.
ऐसे में, इक्विटी सेविंग्स फ़ंड एक बीच का रास्ता हो सकता है. अप्रैल 2025 तक, इन फ़ंड्स में आमतौर पर करीब 30 प्रतिशत इक्विटी, बाक़ी डेट और आर्बिट्राज़ रणनीतियों में निवेश होता है. इससे आपका पोर्टफ़ोलियो थोड़ा बढ़ता है, लेकिन पूरी तरह इक्विटी का जोखिम नहीं उठाना पड़ता.
अगर आप SWP का रास्ता चुनते हैं, तो सालाना विदड्रॉल आपके कॉर्पस का 6 प्रतिशत से ज़्यादा न हो. यही वो सही रेशियो है, जो आमदनी देता है, आपके मूलधन को बचाए रखता है और आपके पैसे के खत्म होने के डर को दूर रखता है.
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स्थिति 2: जब आप अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हों
अगर आय आपकी चिंता नहीं है और आप अपने बच्चों के लिए या बस एक बड़ी सुरक्षा देने जैसे गोल्स के लिए पूंजी को समय के साथ बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके पोर्टफ़ोलियो में इक्विटी की ज़रूरत है.
इक्विटी मार्केट की भारी अस्थिरता से बचते हुए बढ़त हासिल करने का एक स्मार्ट तरीक़ा है एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड. ये फ़ंड मुख्य रूप से इक्विटी में निवेश करते हैं, लेकिन इसमें डेट का हिस्सा भी होता है, जो अस्थिरता को कम करता है. 30 अप्रैल, 2025 तक, इस कैटेगरी में औसतन 73 प्रतिशत इक्विटी, 23 प्रतिशत डेट और बाक़ी निवेश नकदी में था.
तो, अगर आप अपने ₹20 लाख को एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड में निवेश करते हैं, तो क्या होगा? (कैलकुलेशन पिछले पांच साल के 10-वर्षीय रोलिंग रिटर्न के आधार पर की गई है.)
- 5 साल में, ये बढ़कर करीब ₹34.59 लाख हो सकता है.
- 10 साल तक इंतजार करें, तो ये ₹59.83 लाख तक पहुंच सकता है.
- 15 साल तक इसे बढ़ने दें, तो आप ₹1.03 करोड़ की वैल्थ तैयार कर सकते हैं.
अब आप सोच रहे होंगे-अगर इक्विटी ही सारा काम कर रही है, तो पूरी तरह इक्विटी में क्यों न जाएं? अच्छा सवाल है. जवाब ये है: रिटायर लोगों के लिए, एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड एक संतुलित विकल्प हैं. इक्विटी में बढ़त मिलती है, जबकि डेट मार्केट के उतार-चढ़ाव में सहारा देता है.
2020 के कोविड क्रैश को याद कीजिए? सेंसेक्स TRI 38 प्रतिशत गिरा था, लेकिन एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स ने बेहतर प्रदर्शन किया और केवल 28 प्रतिशत गिरे जो डेट के उस छोटे से सहारे की वजह से संभव हुआ था. मार्केट के मुश्किल दौर में ये छोटा सा सहारा बड़ा फ़र्क़ डालता है.
स्पष्ट तौर पर, एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स आपको आपका पैसा बढ़ाने का मौक़ा देते हैं, वो भी बिना ज़्यादा तनाव के. अगर आपका नज़रिया लंबी अवधि का है और आपको नियमित रूप से पैसे निकालने की ज़रूरत नहीं है, तो ये आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है.
अगर आपको एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स सही लगते हैं, लेकिन आपको समझ नहीं आ रहा कि कौन सा चुनें, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी मदद कर सकता है. यहां आपको सावधानीपूर्वक चुने गए फ़ंड्स की लिस्ट मिलती है और आपके गोल्स और जोखिम प्रोफ़ाइल के हिसाब से सही विकल्प खोजने में गाइड करता है.
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स्थिति 3: जब आप ग्रोथ के साथ लचीलापन चाहते हों
क्या होगा अगर आप चाहते हैं कि आपका पैसा बढ़ता रहे, लेकिन साथ ही आपको छुट्टियों, अचानक मेडिकल खर्च या अपने पोते-पोतियों को तोहफे जैसी ज़रूरतों के लिए बीच-बीच में उसमें से निकालने की आजादी भी हो?
इसके लिए, अपने ₹20 लाख को इक्विटी और डेट में बराबर बांटने पर विचार करें. जानिए कैसे:
- ₹10 लाख को फ़्लेक्सी-कैप इक्विटी फ़ंड में डालें. इसे बढ़ने दें और इसे तब तक न छुएं, जब तक बहुत ज़रूरी न हो.
- बाक़ी ₹10 लाख को शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड में निवेश करें.
ये क्यों काम करता है: इक्विटी मार्केट अनिश्चित होता है. अगर आपको अचानक पैसे की ज़रूरत पड़ती है और मार्केट नीचे है, तो इक्विटी निवेश बेचने का मतलब होगा नुक़सान को पक्का करना. लेकिन डेट का एक हिस्सा होने से आपके पास एक बफ़र होता है, जिसे आप बिना अपने ग्रोथ इंजन को बाधित किए इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये स्ट्रैटजी किसी एक को ज़्यादा छोड़े बिना, आपको बढ़त और लचीलापन दोनों देती है.
तो, आपको क्या करना चाहिए?
हर रिटायर व्यक्ति के लिए कोई एक “सबसे अच्छा” विकल्प नहीं है-लेकिन आपकी ख़ास ज़रूरतों के लिए सही विकल्प ज़रूर है.
- अगर नियमित आमदनी आपका लक्ष्य है, तो SCSS से शुरुआत करें. अगर आपने पहले से ₹30 लाख की सीमा छू ली है, तो डेट या हाइब्रिड फ़ंड से SWP के ज़रिए कैश फ़्लो बनाए रखें.
- अगर आप भविष्य के लिए वैल्थ तैयार करना चाहते हैं, तो इक्विटी-हैवी हाइब्रिड फ़ंड्स एक संतुलित विकल्प हैं.
- अगर आप दोनों दुनिया का बेहतरीन अनुभव यानी बढ़त के साथ थोड़ा लचीलापन चाहते हैं तो इक्विटी और डेट का 50:50 मिश्रण चुनें.
आपने ₹20 लाख के लिए कड़ी मेहनत की है. अब उसे भी अपना एहसान चुकाने दीजिए, जो आपके लिए समझदारी से काम करके ही हो सकता है.
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ये लेख पहली बार जून 11, 2025 को पब्लिश हुआ.
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