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सोमवार को बाज़ार की शुरुआत हफ़्ते जश्न के मूड में की, जब सेंसेक्स 200 पॉइंट से ज़्यादा उछला और निफ़्टी 24,900 के स्तर को पार कर गया. पहली नज़र में ये एक परफे़क्ट बुल रन जैसा लग रहा था. लेकिन थोड़ा गहराई में जाएं, तो साफ़ है कि हर कोई इस जश्न में शामिल नहीं है.
जहां एयरटेल, HDFC बैंक और बजाज फ़ाइनेंस जैसे लार्ज-कैप शेयरों ने बाज़ार को आगे बढ़ाया, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने एक अलग कहानी बयां की-जो उत्साह की बजाय सतर्कता की थी.
आज बाज़ार को क्या चला रहा है?
- सेंसेक्स सुबह के सत्र में 600 पॉइंट की बढ़त के साथ बंद हुआ.
- निफ़्टी 50 ने 24,900 के स्तर को मज़बूती से थामा.
- टाटा मोटर्स के शेयर JLR की मार्जिन दबाव की चेतावनी के बाद लगभग 4% गिर गए.
- स्पाइसजेट ने Q4 में 173% की शानदार नेट प्रॉफ़िट ग्रोथ के दम पर 5% से ज़्यादा की छलांग लगाई.
- ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी के साथ हल्के ऊपर चढ़े.
तो रैली को क्या हवा दे रहा है और डर क्या पैदा कर रहा है?
एक तरफ़, जून के ज़्यादातर समय नेट सेलर रहने के बाद विदेशी निवेशक धीरे-धीरे वापसी कर रहे हैं. डोमेस्टिक म्यूचुअल फ़ंड्स रिकॉर्ड SIP फ्लो के दम पर लगातार पूंजी डाल रहे हैं.
लेकिन दूसरी तरफ़, कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतें (मध्य पूर्व में नए तनाव के कारण) और व्यापक बाज़ार में महंगे वैल्यूएशन निवेशकों को सावधान कर रहे हैं.
पिछले हफ्ते की कमज़ोर क्लोज़िंग और छोटे शेयरों में 'बहुत तेज़, बहुत जल्दी' की भावना को जोड़ें, तो आपको एक स्प्लिट मार्केट की क्लासिक स्थिति दिखती है.
निष्कर्ष:
ये बाज़ार-व्यापी बुल रन नहीं है. यह एक लीडरशिप रैली है, जहां कुछ लार्ज-कैप शेयर औसत को ऊपर खींच रहे हैं, जबकि बाकी पीछे रह गए हैं. यह कोई बुरी बात नहीं-बस इसका मतलब है कि आपको चयन करने की जरूरत है.
खेल में बने रहें, लेकिन उत्साह में सब कुछ दांव पर न लगाएं.





