Trending

प्रॉफ़िट बढ़ने के बावजूद TCS के शेयर में गिरावट, जानिए वजह?

कमज़ोर Q1 नतीजों ने निवेशकों को किया निराश

कमज़ोर Q1 नतीजों ने निवेशकों को किया निराशAdobe Stock

TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने पहली तिमाही के नतीजे तो पेश कर दिए हैं. पहली तिमाही में प्रॉफ़िट में 6 प्रतिशत की ग्रोथ और क़रीब 10 अरब डॉलर के नए सौदों की बात सामने आई है. लेकिन ये बातें निवेशकों का दिल नहीं जीत सकीं. सोमवार (14 जुलाई, 2025) को शुरुआती कारोबार में शेयर क़रीब 1 प्रतिशत गिर गया. असल में, शेयर पर दबाव की वजह रेवेन्यू में कमज़ोर ग्रोथ और क्लाइंट बजट को लेकर चिंताएं फिर से उभर आईं.

बात साफ़ है कि भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी के लिए भी, अगर टॉपलाइन में जोश नहीं दिखता, तो मज़बूत बॉटमलाइन काफ़ी नहीं है.

आज की गिरावट का कारण क्या है?

TCS ने पिछले हफ़्ते अपनी फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए. जहां शुद्ध मुनाफ़ा ₹12,760 करोड़ रहा, जो अनुमानों से बेहतर था, वहीं रेवेन्यू में साल-दर-साल सिर्फ़ 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह ₹63,437 करोड़ रहा, जो बाज़ार की उम्मीदों से कम था. और तो और, स्थिर करेंसी के आधार पर रेवेन्यू में 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

बाज़ार को ये पसंद नहीं आया. आज शेयर कमज़ोर खुला और नीचे ही रहा, BSE पर क़रीब 1 प्रतिशत गिरकर लगभग ₹3,242 पर पहुंच गया.

और क्या रहा दिक्कत का सबब? असल में, मैनेजमेंट की टिप्पणी भी अहम रही. सीईओ के. कृतिवासन ने "क्लाइंट-आधारित समस्याओं" और "सतर्क टेक खर्च के माहौल" का जिक्र किया, जिसने निवेशकों को याद दिलाया कि बड़े सौदे हमेशा तुरंत रेवेन्यू में नहीं बदलते.

चिंता की वजह क्या है?

मुद्दा ये नहीं है कि TCS ने क्या किया, बल्कि ये है कि वो आगे क्या करेगा. 9.4 अरब डॉलर के नए सौदों की घोषणा के बावजूद, कंपनी का रेवेन्यू उस गति से नहीं बढ़ा.

इसके अलावा, उत्तरी अमेरिका जैसे प्रमुख बाज़ारों से कमज़ोर मांग और बड़े खातों (जैसे BSNL) में देरी ने निवेशकों को सोचने पर मज़बूर कर दिया कि क्या TCS, इन्फोसिस और HCLTech जैसे आक्रामक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में रफ्तार खो रही है.

हालांकि, आगामी ₹11 प्रति शेयर का डिविडेंड कुछ राहत दे सकता है, लेकिन अभी के लिए, ग्रोथ की दृश्यता बड़ी चिंता है.

लंबी अवधि के निवेशकों को क्या करना चाहिए?

शायद घबराने की जरूरत नहीं. TCS पहले भी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर चुकी है. इसका बिज़नस मज़बूत है, मार्जिन बरकरार हैं और सौदे मिलना उत्साहजनक है. लेकिन अगर आप जल्दी मुनाफ़े की उम्मीद कर रहे हैं, तो निकट भविष्य में रास्ता उबड़-खाबड़ हो सकता है.

धैर्यवान निवेशकों के लिए, ये गिरावट ख़रीदारी का मौक़ा हो सकती है. आखिरकार, आपको 3.9 प्रतिशत की यील्ड और बेजोड़ ट्रैक रिकॉर्ड वाला एक क्वालिटी स्टॉक मिल रहा है.

वैल्थ को लेकर गंभीर हैं?

समझदार निवेशकों के साथ जुड़ें, जो विशेषज्ञों द्वारा चुने गए शेयरों, समय की कसौटी पर खरी रणनीतियों और लंबे समय केअनुशासन के लिए वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र पर भरोसा करते हैं.

अंदाज़ा लगाना बंद करें. बढ़ना शुरू करें. अभी देखें: वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र.

डिस्क्लेमर: ये कोई स्टॉक रेकमंडेशन नहीं है. ये स्टोरी आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंस की सहायता से बनाई गई है और केवल सूचना के उद्देश्य से है. निवेश के फै़सले लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें या किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

एक इंटरनेशनल फ़ंड एकमुश्त रक़म, चार SIP ले रहे हैं

पढ़ने का समय 5 मिनट•आकार रस्तोगी

Reliance Infrastructure सहित 5 शेयरों की FCF यील्ड 30% से ज़्यादा, फिर भी शेयर सस्ते क्यों?

पढ़ने का समय 5 मिनट•सत्यजीत सेन

10 PSU बैंक सस्ते दिख रहे हैं, पर बाज़ार का सवाल भी जायज़ है

पढ़ने का समय 6 मिनट•Lakshya Naredi

NPS Swasthya: हेल्थ कवर के लिए जुड़िए, कॉर्पस बनाने के लिए नहीं

पढ़ने का समय 7 मिनट•आकार रस्तोगी

11 शेयर काग़ज़ पर बेहतर दिखते हैं, फिर भी सस्ते मिल रहे हैं

पढ़ने का समय 5 मिनट•अर्पित सूरी

स्टॉक पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गिरावट का मतलब नुक़सान नहीं होता

आपकी स्क्रीन पर लाल रंग का नंबर कोई नुक़सान नहीं है, आप उस पर कोई कदम उठाकर ही उसे पक्का करते हैं

अन्य एपिसोड

दूसरी कैटेगरी