बुक रिव्यू

मैंने क्यों लिखी-मनी मार्केट्स एंड मिस्टेक्स

मैं चाहता हूं हर निवेशक इसे साथ में रखे, जो उन्हें कई सीख दे सकती है

धीरेंद्र कुमार द्वारा लिखी गई बुक "मनी, मार्केट्स एंड मिस्टेक्स" की ख़ास बातेंAditya Roy/AI-Generated Image

जब मैं पीछे मुड़कर उस बीते हुए साल को देखता हूं तो मुझे मार्केट्स से जुड़े तमाम लोग याद आते हैं. मार्केट्स तो सिर्फ़ स्क्रीन पर नंबर होते हैं जब तक इंसानों ने उन पर अपने डर और उम्मीदों का बोझ न लाद दिया हो. इसीलिए, तीन दशकों तक लिखते रहते हुए भी, मैं बार‑बार उसी विचार पर लौटता हूं: सफल निवेश भविष्य की भविष्यवाणी करने से कम, और खुद को समझने से ज़्यादा जुड़ा है.

ये सोच मेरी नई किताब Money, Markets and Mistakes को पेश करने का आधार बनी. ये इस साल के सबसे महत्वपूर्ण निवेश सबक़ों का एक कॉम्पैक्ट रिकॉर्ड है, जिसे इतिहासकार की तरह नहीं, बल्कि निवेशक के नज़रिये से तैयार किया गया है. जो बात मायने रखती है, वो ये नहीं कि चुनाव जीते या हारे, या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और क्रिप्टोकरेंसी सुर्खियों में छाए रहे हों. अहमियत इस बात की है कि इन घटनाओं का निवेशकों के मन पर क्या असर होता है? क्या उन्होंने धैर्य बनाए रखा? क्या वे बहक गए? क्या उन्होंने कुछ ऐसा सीखा जिससे उन्हें अगली बार मदद मिलेगी?

पिछले साल, मैंने वही पुराना ड्रामा नए रूप में चलते देखा. डेरिवेटिव ट्रेडिंग की सनक नज़र आई, जिसने सामान्य निवेशकों को गरीब बना दिया. नए “AI” प्रोडक्ट्स की बाढ़ दिखी, जो चमत्कार का वादा करती थी. बिटकॉइन को किराने की डिलीवरी में शामिल कर दिया गया, मानो पैसे को लॉयल्टी पॉइंट्स की तरह कई गुना बढ़ाया जा सकता है. ये सब कुछ नया था और फिर भी कुछ नहीं. मैंने इतने साइकल देखे हैं कि “अलग पैकेट देखकर अलग मीठी चीज़” समझना मुश्किल है.

तो मैं, अपनी साप्ताहिक लेखन में, वही करता रहा जिसमें शोर को हटाना और पाठकों को बोरिंग लेकिन काम करने वाली सच्चाइयों- डाइवर्सिफ़िकेशन (diversification), एसेट एलोकेशन (asset allocation), कंपाउंडिंग और जब दुनिया कुछ करने को कहे, तो कुछ ना करने की अनुशासन- की ओर वापस ले जाना शामिल.

ये किताब इन्हीं लेखों को एक जगह इकट्ठा करती है. इसे टेक्स्टबुक की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए. इसे एक निवेशक की साल भर की डायरी की तरह सोचिए जो इस तरह व्यवस्थित है कि आप किसी भी चैप्टर में झांक सकें और देख सकें कि एक सिद्धांत कैसे हाल के मुश्किल दौर में कसौटी पर खरा उतरा. जब आप रिटर्न का पीछा करने को लुभाए जाएंगे, तो आपको ऐसी यादें मिलेंगी कि ज़्यादा छेड़‑छाड़ करने वाले निवेशक अक्सर कम पाते हैं. जब आप अपनी SIP से ऊब जाएंगे, तो आपको ये प्रमाण मिलेगा कि ऊबना ही वेल्थ का सबसे भरोसेमंद साथी है.

और जब आप मार्केट के उतार-चढ़ाव में बह जाएंगे, तो आपको उन लोगों की कहानियां मिलेंगी जिन्होंने सोचा कि उन्होंने शॉर्टकट खोज लिया है, लेकिन लंबा‑चौड़ा रास्ता सीखने को मिला कि कोई शॉर्टकट नहीं होता.

मैं कुछ नया वादा नहीं करता. वास्तव में, आप जो पढ़ेंगे उसका ज़्यादातर भाग आप मुझसे पहले भी पढ़ चुके होंगे. ऐसा जान‑बूझ कर किया गया है. जैसा कि मेरे पसंदीदा लेखकों में शामिल रहे जेसन ज़्वेइग ने कहा है, “हमारा काम ऐसे तरीकों से एक साल में 50 बार वही बात कहना है, जिनमें दोहराव जैसा महसूस न हो.” असल में, निवेश की सच्चाइयां नहीं बदलतीं. जो बदलता है वो वेश है, जिसमें मार्केट आपको भुलाने की कोशिश करता है. मेरा काम है मूल बातों की ओर बार‑बार इशारा करना.

अगर आप सोच रहे हैं कि ये बुक क्यों खरीदें, जबकि ये कॉलम ऑनलाइन पढ़ने को मिल जाते हैं? इसकी वजह ये है कि एक जगह इकट्ठा होने पर ये एक कहानी बताते हैं. ये एक ऐसे साल की कहानी है जब मार्केट्स तेज़ी से चले, पर मानवीय व्यवहार सर्किल्स में घूमते नज़र आए. असल में, एक किताब वेबसाइट से बेहतर साथी होती है. आप इसे अपनी मेज़ पर रख सकते हैं, और जब लालच या डर जैसा महसूस हो तो फिर से इसकी ओर रुख कर सकते हैं.

अगर यहां एक भी विचार आपको एक ग़लती से बचने में मदद करे, तो ये बुक आपके लिए अपनी क़ीमत कई गुना वसूल कर लेगी. इसलिए मैं आपको Money, Markets and Mistakes को पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूं. ये बाज़ार को हराने की कोई गारंटी नहीं है. ये खुद को समझने के लिए एक आइना है. और आखिरकार, वही एकमात्र अच्छी बात है जो मायने रखती है.

और अगर आप ये खुद जांचना चाहते हैं कि ये आपसे ताल्लुक रखती है कि नहीं, तो मैंने एक चैप्टर मुफ़्त पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया है. इसे उस बातचीत का नमूना समझिए जो ये बुक आपके साथ करना चाहती है.

हिंदी में पढ़ें एक फ़्री चैप्टर

अगर आपको ये चैप्टर अच्छा लगे, तो मैं आपको पूरी बुक अपने पास रखने के लिए आमंत्रित करता हूं- ये कुछ ऐसा है जिसे मार्केट्स (या आपकी अपनी भावनाएं) के कोई कदम उठाने के लिए उकसाने की स्थिति में आप कभी‑भी लौट कर इसे पढ़ सकते हैं.

मनी मार्केट्स एंड मिस्टेक्स को यहां ख़रीदिए

असल में, एक बुक की कीमत ज़्यादा नहीं है; लेकिन एक बड़ी ग़लती का खामियाजा कुछ ज़्यादा ही भुगतना पड़ जाता है.

ये लेख पहली बार सितंबर 11, 2025 को पब्लिश हुआ.

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