फंड वायर

फ़ंड हाउस भारतीय शेयर बाज़ार को लेकर उत्साहित हैं या चिंतित?

आइए भारतीय शेयर बाज़ार की स्थिति को विस्तार से जानते हैं

क्या म्यूचुअल फ़ंड हाउस अब भी भारतीय इक्विटी पर भरोसा करते हैं?Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः बाज़ार ने हाल में थोड़ी राहत की सांस ली है. स्मॉल-कैप लाल निशान में हैं. रिटेल निवेशक थोड़े चिंतित हैं. मगर चुपचाप, म्यूचुअल फ़ंड्स अपने नेट इक्विटी एक्सपोज़र को बढ़ा रहे हैं. हमने भारत के टॉप बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स के पोर्टफ़ोलियो में इस साल हुए बदलाव पर ग़ौर किया. इससे फ़ंड मैनेजर के अगले क़दम को लेकर साफ़ संकेत मिलते हैं..

बीते कुछ सालों में भारतीय निवेशकों ने मार्केट को लगभग एक ही दिशा में जाते देखा है: ऊपर की ओर.

9 अप्रैल 2020 से अब तक, भारतीय शेयर बाज़ार (निफ़्टी 500 TRI द्वारा दर्शाया गया) ने 24.3% की सालाना दर से तेज़ बढ़त हासिल की है. दिलचस्प बात ये है कि ये उससे पिछले पांच साल में देखी गई मात्र 1.8% की ग्रोथ की तुलना में एक बड़ी छलांग है.

कोविड के बाद आई ये शानदार बढ़त एक पूरी नई निवेशक पीढ़ी लेकर आई है, जिसने मार्केट में सिर्फ़ तेज़ी के दौर को देखा है. हां, इस साल की शुरुआत में हल्की गिरावट के साथ-साथ बीच में कुछ उतार-चढ़ाव ज़रूर रहे, मगर कुल मिलाकर सफ़र काफ़ी सुगम रहा.

लेकिन 2025 में ये रफ़्तार कुछ थमी है. मार्केट इस साल अब तक सिर्फ़ 6% ऊपर है, जबकि स्मॉल-कैप गिरावट में हैं. ऐसे में कई निवेशकों को ये ठहराव अनजान लग रहा है और वो सोच रहे हैं कि आगे क्या किया जाए.

तो, हमने देखा कि म्यूचुअल फ़ंड हाउस (यानी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां) क्या कर रही हैं. क्या फ़ंड हाउस अब भी भारतीय इक्विटी को लेकर उत्साहित हैं, या धीरे-धीरे सतर्क रुख़ अपना रहे हैं?

बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स के ज़रिए बाज़ार के मूड को समझना

फ़ंड मैनेजरों की सोच का अंदाज़ा लगाने के कई तरीक़े हैं. इनमें एक ख़ास बैरोमीटर है बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड (BAF), जिन्हें डायनमिक एसेट एलोकेशन फ़ंड भी कहा जाता है.

ये हाइब्रिड फ़ंड होते हैं जो इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं. लेकिन पारंपरिक फ़ंड्स के विपरीत, इनका मिश्रण तय नहीं होता. ये मार्केट की स्थिति के हिसाब से अपने एलोकेशन को बदलते रहते हैं.

जब बाज़ार अस्थिर दिखते हैं, तो ये इक्विटी घटाकर डेट की ओर रुख़ करते हैं. जब वैल्यूएशन आकर्षक लगते हैं, तो ये विपरीत (contrarian) रुख़ अपनाते हैं और जब दूसरे लोग डरे हुए होते हैं, तब इक्विटी में ख़रीदारी करते हैं. फ़ंड हाउसेज का कहना है कि ये डायनमिक स्ट्रैटेजी उन्हें बढ़त हासिल करने और गिरावट को कम करने में मदद करती है, जिससे ये उन निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो जाते हैं जो कठोरता के बजाय लचीलेपन को पसंद करते हैं.

दरअसल, BAFs दो वजहों से अलग दिखते हैं

  1. लचीलापन: ये मार्केट वैल्यूएशन, ब्याज दरों और मैक्रो संकेतकों के आधार पर एक्सपोज़र बदलते हैं. जब शेयरों के वैल्यूएशन ऊंचे हों, तो डेट की ओर झुकते हैं; और जब मार्केट गिरता है, तो फिर से इक्विटी की ओर लौटते हैं.
  2. हेजिंग: कई बार ये अपने इक्विटी हिस्से का कुछ भाग डेरिवेटिव्स के ज़रिए हेज करते हैं. इससे मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर घटता है और टैक्स के लिहाज़ से “इक्विटी” फ़ंड का दर्जा भी बना रहता है.

असल में, बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स लगातार अपने फ़ंड मैनेजरों के बाज़ार की स्थितियों को देखने के आधार पर इक्विटी और डेट के बीच सक्रिय रूप से बदलाव करते रहते हैं, इसीलिए इनका एलोकेशन पैटर्न एक अच्छा संकेत देता है कि फ़ंड मैनेजर मार्केट को कैसे देख रहे हैं. अगर वो इक्विटी में निवेश बढ़ाएं तो ये मार्केट पर भरोसे और अगर घटाएं, तो सतर्कता का संकेत मिलता है.  तो, मौजूदा स्थिति समझने के लिए हमने सभी वैल्यू रिसर्च द्वारा रेटिंग प्राप्त सभी बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स का डेटा देखा कि इस साल अब तक उन्होंने अपने नेट इक्विटी एक्सपोज़र में बढ़ोतरी की है या कमी.

डेटा क्या कहता है

फ़ंड जनवरी 25 सितंबर 25 नेट इक्विटी बदलाव
HDFC (★★★★★) 54.8 62.4 ▲ 7.6
SBI (★★★★★) 42.5 52.7 ▲ 10.2
ABSL Balanced (★★★★) 55.1 53.8 ▼ 1.3
DSP Dynamic Asset Allocation (★★★★) 31.1 39.6 ▲ 8.5
Franklin India Balanced (★★★★) 49.5 49.8 ▲ 0.3
ICICI Pru Balanced Advantage 46.4 49.5 ▲ 3.1
Mirae Asset Balanced Advantage (★★★★) 50.6 52.8 ▲ 2.2
Nippon India Balanced (★★★★) 54.8 62.7 ▲ 7.9
Tata Balanced (★★★★) 49.4 53.8 ▲ 4.4
Axis Balanced Advantage (★★★) 52 56.8 ▲ 4.8
Baroda BNP Paribas Balanced Advantage (★★★) 69 76.8 ▲ 7.8
Edelweiss Balanced Advantage (★★★) 72.6 78.2 ▲ 5.6
HSBC Balanced (★★★) 48.3 42.2 ▼ 6.1
Invesco India Balanced Advantage (★★★) 57.5 60.4 ▲ 2.9
Kotak Balanced Advantage (★★★) 57.2 56.7 ▼ 0.5
Mahindra Manulife Balanced Advantage (★★★) 61.9 63.9 ▲ 2.0
Sundaram Balanced Adv (★★★) 55.6 59.1 ▲ 3.5
Union Balanced Advantage (★★★) 57.9 58.9 ▲ 1.0
Bandhan Balanced Advantage (★★) 50.3 48.6 ▼ 1.7
Bank of India Balanced Advantage (★★) 68.4 69.3 ▲ 0.9
ITI Balanced Advantage (★★) 52.7 60.8 ▲ 8.1
LIC MF Balanced Advantage (★★) 62.8 57.2 ▼ 5.6
NJ Balanced Advantage (★★) 51.2 62.3 ▲ 11.1
PGIM India Balanced Advantage (★★) 66.2 66.2 -
UTI Unit Linked Insurance (★★) 37.2 38.3 ▲ 1.1
Motilal Oswal Balanced Advantage (★) 62.3 96.3 ▲ 34.0
Shriram Balanced Advantage (★) 53.8 64.6 ▲ 10.8
नोट: ये सभी डायरेक्ट प्लान्स के आंकड़े हैं

हमारा निष्कर्ष

  • 26 में से 22 फ़ंड्स ने इस साल अपना इक्विटी एलोकेशन बढ़ाई है, जिसका मतलब है कि ज़्यादातर फ़ंड हाउस भारतीय शेयर बाज़ार को लेकर सकारात्मक हैं. शुरुआती गिरावट ने इन्हें अच्छे वैल्यूएशन पर ख़रीदारी का मौक़ा दिया.
  • 27वां फ़ंड (PGIM) में कोई बदलाव नहीं हुआ.
  • सिर्फ़ चार बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स - ABSL, HSBC, Kotak और Bandhan - ने एक्सपोज़र घटाया, जिसमें से HSBC की 6% की कटौती सबसे बड़ी रही.
  • दिलचस्प बात ये है कि 30 सितंबर 2025 तक सिर्फ़ छह फ़ंड्स का नेट इक्विटी एक्सपोज़र 50% से कम है, जो अलग-अलग फ़ंड हाउस के रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफ़ाइल पर निर्भर करता है.

10% से ज़्यादा इक्विटी बढ़ाने वाले फ़ंड्स

  1. Motilal Oswal Balanced Advantage (इस साल अपने नेट इक्विटी निवेश में 34% की ग्रोथ है)
  2. NJ Balanced Advantage (+11.1%)
  3. Shriram Balanced Advantage (+10.8%)
  4. SBI Balanced Advantage (+10.2% ज़्यादा)

वो फ़ंड जिन्होंने 10% से ज़्यादा जोखिम कम किया

कोई भी नहीं.

मामूली बदलाव वाले फ़ंड (2% ऊपर या नीचे)

  • Franklin India Balanced Advantage (0.3%)
  • Bandhan Balanced Advantage (-1.7%)
  • Kotak Balanced Advantage (-0.5%)
  • Union Balanced Advantage (+1%)
  • Bank of India Balanced Advantage (+0.9%)
  • UTI Unit Linked Insurance (+1.1%)
  • Mahindra Manulife (+2%)

आखिरी बात

अगर बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स को फ़ंड हाउस की धारणा का आइना मानें, तो संदेश साफ़ है: ये भारतीय इक्विटी से तब भी नहीं डरते जब बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना हुआ हो.

दरअसल, चार स्टार या उससे ज़्यादा रेटिंग वाले नौ में से आठ फ़ंड्स ने अपना नेट इक्विटी निवेश बढ़ा दिया है.

इसलिए, भले ही रिटेल निवेशक बाज़ार के ठहराव को लेकर चिंतित हों, लेकिन म्यूचुअल फ़ंड्स अब भी भारतीय इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं.

ऐसे और ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ते रहिए वैल्यू रिसर्च और म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट जो एक पर्सनल फ़ाइनांस मैगज़ीन है जो सबसे अहम सवालों के सटीक जवाब पेश करती है.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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