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सारांशः मुसीब़त कभी पहले से बताकर नहीं आती. इसीलिए एक मज़बूत 'सेफ़्टी नेट' (सुरक्षा कवच) बनाना बेहद ज़रूरी है. यहां जानें, आप अपना पैसा कहां और कैसे निवेश कर सकते हैं, ताकि एक भरोसेमंद 'इमरजेंसी फ़ंड' तैयार किया जा सके.
इमरजेंसी फ़ंड बनाने के लिए कौन से डेट फ़ंड सबसे सही रहते हैं? – सब्सक्राइबर
मुसीब़त कभी दरवाज़ा खटखटाकर नहीं आती. नौकरी जाना, अचानक कोई मेडिकल ख़र्च या घर की कोई ज़रूरी मरम्मत, ये सब तब होते हैं जब आप सबसे कम तैयार होते हैं. ऐसे में पैसों तक जल्दी पहुंच बेहद ज़रूरी हो जाती है.
इसीलिए, इसमें कोई दो राय नहीं है कि इमरजेंसी फ़ंड होना ज़रूरी है. लेकिन उतना ही अहम यह भी है कि यह रक़म कहां रखी जाए. इमरजेंसी की स्थितियों की गंभीरता को देखते हुए, यह रक़म ऐसी जगह होनी चाहिए जो कम जोख़िम वाली हो, स्थिर हो और ज़रूरत पड़ने पर आसानी से निकाली जा सके, जैसे कि डेट म्यूचुअल फ़ंड्स.
इस लेख में हम देखते हैं कि इमरजेंसी कॉर्पस बनाने के लिए कौन से डेट फ़ंड सबसे सही हैं और इसे सही तरीक़े से कैसे बनाएं.
लिक्विड फ़ंड हैं पहली पसंद
ज़्यादातर निवेशकों के लिए लिक्विड म्यूचुअल फ़ंड एक अच्छा शुरुआती विकल्प है.
नाम से ही साफ़ है, ये फ़ंड पैसों तक तुरंत पहुंच देते हैं. यूनिट रिडीम करते ही रक़म 1-2 कामकाजी दिनों के अंदर में आपके खाते में आ जाती है.
इनमें जोख़िम भी बहुत कम होता है, क्योंकि ये फ़ंड आमतौर पर 91 दिनों के भीतर मेच्योर होने वाले शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं. इसीलिए ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का इन पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता और रिटर्न भी स्थिर रहता है.
एक और वजह जो लिक्विड फ़ंड्स को आपके इमरजेंसी फ़ंड को रखने के लिए सबसे अच्छा बनाती है, वो है उनका रिटर्न. सेविंग्स अकाउंट के मुक़ाबले, जहां ब्याज न के बराबर मिलता है, लिक्विड फ़ंड ने एक साल में 5.9% और 3 साल में 6.7% का सालाना रिटर्न दिया है.
इमरजेंसी फ़ंड को सही तरीक़े से बनाएं?
हालांकि, पूरी इमरजेंसी रक़म को एक ही जगह रखना काफ़ी नहीं है. इसलिए इसे कई हिस्सों में बांटना समझदारी है, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रक़म की ज़रूरत कब पड़ सकती है.
लेयर 1: कुछ नक़द हमेशा पास रखें
पहली लेयर में वो रक़म होती है जो तुरंत मिल सके. इसमें आमतौर पर 1-2 महीने के ख़र्च या इमरजेंसी कॉर्पस का 10-20% हिस्सा रखना चाहिए.
यह रक़म सेविंग्स बैंक अकाउंट और स्वीप-इन फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में रखी जा सकती है. इसके अलावा, आपको अपने पास कुछ कैश भी रखना चाहिए.
लेयर 2: लिक्विड फ़ंड में निवेश करें
तुरंत की ज़रूरतें पूरी होने के बाद, अगला क़दम है अपना मुख्य इमरजेंसी रिज़र्व बनाना.
यह लेयर उन इमरजेंसी के लिए है जो आने वाले कुछ दिनों या हफ़्तों में आ सकती हैं. इसमें आदर्श रूप से 3-6 महीने के ख़र्च यानी कॉर्पस का क़रीब 50-60% हिस्सा होना चाहिए.
यहां लिक्विड फ़ंड सबसे सही रहते हैं. ये कम जोख़िम वाले हैं, ठीक-ठाक और स्थिर रिटर्न देते हैं, रिडेम्शन जल्दी होती है और समय से पहले निकालने पर कोई जुर्माना नहीं लगता. इसके अलावा, लिक्विड फ़ंड से होने वाले मुनाफ़े पर टैक्स केवल तभी लगता है, जब आप फ़ंड से बाहर निकलते हैं.
लेयर 3: लंबे समय की ज़रूरतों के लिए बफ़र रखें
भले ही इमरजेंसी फ़ंड का मक़सद तुरंत और अचानक आने वाले ख़र्चों के लिए होता है, लेकिन ऐसी ज़रूरतें बाद में भी उठ सकती हैं. इसीलिए आगे आने वाली ज़रूरतों के लिए भी रक़म अलग रखना उतना ही ज़रूरी है.
इसके लिए शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड में निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. बैंक फ़िक्स्ड डिपॉज़िट भी काम आ सकते हैं, लेकिन लिक्विडिटी की सीमाओं को देखते हुए उनका इस्तेमाल सीमित रखना बेहतर है.
ज़रूरी बात!
इमरजेंसी फ़ंड एक मजबूरी नहीं, एक ज़रूरत है. मुश्क़िल हालात कभी भी दस्तक दे सकते हैं और तैयार रहना उन्हें आसानी से झेलने में मदद करता है.
अगर आप जानना चाहते हैं कि सेफ़्टी नेट बनाने के लिए कौन से लिक्विड या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड सही रहेंगे, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी ज़रूरत के हिसाब से इन्हें चुनने में मदद कर सकता है. साथ ही, आप अपनी फ़ाइनेंशियल ज़रूरतों के मुताबिक़ फ़ंड की रेकमेंडेशन, मार्गदर्शन और पोर्टफ़ोलियो से जुड़ी राय भी पा सकते हैं.
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ये लेख पहली बार मार्च 18, 2026 को पब्लिश हुआ.
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