अगर आप जल्दी निवेश शुरू करते हैं तो आप लंबी अवधि में बड़ी रकम जुटा सकते हैं और अपना वित्तीय लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकते हैं। लेकिन अगर आपकी उम्र 40 के आसपास है और आपने अभी निवेश शुरू नहीं किया है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप खोया हुआ समय तो वापस नहीं पा सकते हैं लेकिन अनुशासन और समझदारी से अब भी आप अपना वित्तीय लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। अगर आपने देर से निवेश शुरू किया है तो आपकी रणनीति दो कदमों पर आधारित होनी चाहिए। पहले तो आपको एसआईपी के जरिए बड़ी राशि में नियमित तौर पर निवेश करनी चाहिए और दूसरे कदम के तौर पर अपने पुराने निवेश को इक्विटी में डालना चाहिए। इक्विटी लंबी अवधि में निवेश के दूसरे विकल्पों की तुलना में ज्यादा रिटर्न देती है और अगर आपके पास निवेश के लिए सीमित समय है तो इक्विटी बेहद अहम हो जाती है।
लेकिन इक्विटी में निवेश करते समय एक सतर्कता रखना बहुत जरूरी है। इक्विटी में आपका निवेश लंबी अवधि जैसे 10 से 15 सालों के लिए होना चाहिए। 5 साल से कम अवधि के लिए इक्विटी में निवेश न करें। आपको नुकसान हो सकता है। कम अवधि में इक्विटी में उतार चढ़ाव काफी अधिक रहता है। ऐसे में एसआईपी के जरिए इक्विटी में निवेश करें। एसआईपी यह सुनिश्चित करती है कि लंबी अवधि में आपके निवेश की लागत औसत हो जाए। इससे निवेश पर रिटर्न बढ़ता है।
दो स्तर पर बनाएं रणनीति
पहले यह स्वीकार करें कि अगर आप जल्दी निवेश शुरू करते हैं तो आप छोटी छोटी रकम नियमित तौर पर निवेश करके अपना वित्तीय लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। और जब आप देरी से निवेश शुरू करते हैं तो आपको उस समय की भरपाई करनी होती है जो आपने गंवा दिया है। मान लेते हैं कि आप 60 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपए की रकम जुटाना चाहते हैं। अगर आप 25 साल की उम्र में निवेश शुरू कर देते हैं तो आपको मंथली एसआईपी के जरिए हर माह सिर्फ 1,540 रुपए इक्विटी फंड में निवेश करना होगा। लेकिन अगर आप 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं तो आपको मंथली एसआईपी के जरिए 10,009 रुपए निवेश करना होगा। इन दोनों केस में सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना गया है।
आपकी रणनीति का दूसरा भाग है कि अपने निवेश से अधिक से अधिक रिटर्न कमाना। हम सब लोग थोड़ी थोड़ी रकम कई जगह पर निवेश करते हैं। जैसे एफडी में, इन्श्योरेंस पॉलिसी में, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में। ये सभी निवेश आपका पैसा डेट में लगाते हैं ऐसे में ज्यादा रिटर्न नहीं मिलता है। आप यह पैसा निकाल कर सिस्टमेटिक ट्रांसफर के जरिए इक्विटी फंड में निवेश कर सकते हैं।
यूनिट लिंक्ड प्लान यानी यूलिट या पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसी न तो अच्छे रिटर्न देती हैं और न उतना इन्श्योरेंस देती हैं जितना आपको जरूरत है। इसी तरह से पीपीएफ में अपना कंट्रीब्यूशन घटा कर न्यूनतम कर दें जिससे आपका अकाउंट मैच्योरिटी तक एक्टिव रहे। अगर आप पीपीएफ में निवेश करके इनकम टैक्स बचाते हैं तो आप इसके बजाए किसी अच्छे टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। टैक्स सेविंग फंड में लॉक इन पीरियड पीपीएफ की तुलना में बहुत कम होता है और यह लंबी अवधि में पीपीएफ की तुलना में काफी अधिक रिटर्न देता है। अगर आपने आवासीय घर या फ्लैट जिसमें आप रहते हैं के अलावा कहीं और प्रॉपर्टी में निवेश किया है तो इसे बेच कर पैसा सिस्टमेटिक तरीके से इक्विटी फंड में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। जमीन और प्रॉपर्टी इक्विटी की तुलना में बहुत कम रिटर्न देती हैं।
इसके अलावा जमीन और प्रॉपर्टी में निवेश करने पर आपका पैसा फंस जाता है और जरूरत पड़ने पर आप इसे तुरंत बेच नहीं सकते हैं। सिस्टमेटिक तरीके से पैसा ट्रांसफर करने के लिए पहले रकम डेट फंड में निवेश करें। यह डेट फंड उसी फंड हाउस का होना चाहिए जिसके इक्विटी फंड में आप पैसा ट्रांसफर करना चाहते हैं। इसके बाद एक से तीन साल की अवधि में धीरे धीरे पैसा इक्विटी फंड में ट्रांसफर करें। आपको एक मुश्त पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करते हुए हो सकता है कि आपका पैसा ऐस समय बाजार में निवेश जब बाजार अपने उच्चतम स्तर पर हो।
ये लेख पहली बार नवंबर 12, 2019 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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