
अगर किसी ने 10 साल पहले एक औसत मल्टी कैप इक्विटी फंड में 10,000 रुपए की मंथली एसआईपी की होती तो उसके पास अब तक 24 लाख रुपए हो गए होते। अगर आप एफडी और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में निवेश करते रहे हैं तो आपको यह बड़ी रकम लग सकती है। लेकिन इक्विटी फंड में लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से यह रकम कुछ खास नहीं है।
अब आज की बात करते हैं। आजकल आपको ऐसे बहुत से लोग मिल जाएंगे जो पिछले कई सालों से एसआईपी चला रहे हैं। हमारे समाज में एसआईपी कल्चर जड़े जमा रहा है। यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन समस्या दूसरी है। लोग एसआईपी तो चला रहे हैं लेकिन उनकी एसआईपी में निवेश की रकम बहुत कम है। कुछ समय पहले मेरी मुलाकात एक एसआईपी निवेशक से हुई। उसकी मंथली इनकम 1 लाख रुपए थी। लेकिन वे सिर्फ 3,000 रुपए की मंथली एसआईपी चला रहे हैं। अब अगर आप अपनी कुल इनकम का सिर्फ 3 फीसदी एसआईपी में निवेश करेंगे तो इससे कितनी रकम बनेगी। और आप इस रकम से क्या कर पाएंगे। यह एक बड़ा सवाल है। एसआईपी चलाने वाले ज्यादातर निवेशक ऐसा ही कर रहे हैं।
अगर आपकी एसआईपी में निवेश कम है तो आपको इस पर मिलने वाला रिटर्न तो देख कर अच्छा लगेगा। लेकिन यह रकम इतनी नहीं होगी जिससे आपका भला हो जाए। कुछ माह पहले एक पुराने परिचित मेरे पास आए। वे अपने निवेश से जुड़े मसले पर बातचीत करना चाहते थे। उन्होंने सालों के दौरान अच्छी खासी सेविंग की थी। लेकिन उनकी ज्यादातर सेविंग बैंक एफडी में है। 15 साल पहले मेरी सलाह पर उन्होंने एक अच्छे बैलेंस्ड फंड में 2,500 रुपए की मंथली एसआईपी शुरू की थी। उन्होंने एक दो बार एसआईपी में निवेश बढ़ाया भी था। अब उनके एसआईपी अकाउंट में कुल 12 लाख रुपए हैं। अब वे अपने कुल निवेश को जोड़ कर रिटायरमेंट के बाद जिंदगी के बारे में प्लानिंग कर रहे हैं। हालांकि वे इस बात से काफी खुश हैं कि एसआईपी में हर माह मामूली रकम निवेश करके उन्होंने लाखों रुपए का फंड बना लिया है। लेकिन अगर रिटायरमेंट के बाद की उनकी जरूरतों पर गौर करें तो 12 लाख रुपए बहुत कम है। एसआईपी में निवेश से उनको काफी अच्छा रिटर्न मिला है लेकिन 12 लाख रुपए से उनको अपनी लाइफ को आरामदेह बनाने में खास मदद नहीं मिलेगी।
इसी तरह से अगर किसी ने बड़ी रकम के साथ एसआईपी की शुरूआत की लेकिन निवेश की राशि को बढ़ाना नहीं तो उसे भी भविष्य ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। जैसे अगर किसी ने 2004 में 10000 रुपए की मंथली एसआईपी शुरू की और वह अब भी इतनी ही रकम की एसआईपी चला रहा है।
2004 में एअसआईपी की रकम उसकी कुल इनकम का 20 फीसदी थी, अब यह रकम इनकम का 7 फीसदी रह गई है। आम तौर पर लोगों की इनकम में सालाना इतना इजाफा होता है कि अगर वे एसआईपी में निवेश सालाना 5 फीसदी की दर से बढ़ाता है तो उनको खास दिक्कत नहीं होगी। लेकिन भविष्य में जब वे अपने निवेश को भुनाएंगे तो उनको पता चलेगा कि निवेश में हर साल मामूली इजाफा करने से उनको कितना फायदा हुआ।


