
यह थोड़ी अजीब बात है कि आम तौर निवेशक उन चीजों के बारे में ज्यादा चिंता करते हैं जिन पर उनका कोई जोर नहीं है। वहीं उन चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं जिनको वे नियंत्रित कर सकते हैं। क्या आप ब्याज दरों को प्रभावित कर सकतें हैं ? नहीं। तो क्या आप यह तय कर सकते हैं कि आप कौन सा स्टॉक किस कीमत पर खरीदेंगे। निश्चित तौर पर आप ऐसा कर सकते हैं।
कुछ समय पहले, मैंने अमेरिका के एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट का लेख पढ़ा था। उनका नाम ब्रूश श्नायर है। श्नायर क्रिप्टोग्राफर और कंप्यूटर सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट हैं। बाद में वे विचारक बनए गए और जोखिम और सुरक्षा को लेकर लिखने लगे। मुझे उनका लेख पढ़ कर एहसास हुआ कि जोखिम और मानवीय प्रतिक्रिया को लेकर उनके विचार निवेश की दुनिया के लिए भी प्रासांगिक हैं।
श्नायर का जो लेख मैंने पढ़ा वह कंट्रोल बायस के बारे में था। उनका कहना था कि आम तौर पर जब कोई चीज हमारे नियंत्रण में होती है तो हम जोखिम को कम करके आंकते हैं और जब स्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं होती है तो हम जोखिम को बढ़ा चढ़ा कर आंकते हैं। इसका सबसे आसान उदाहरण आप फ्लाइट में ट्रैवेल करने के जोखिम और कार ड्राइव करने का जोखिम है। प्लेन में ट्रैवेल करना काफी सुरक्षित है। वहीं भारत में सड़के ड्राइव करने के लिहाज से काफी असुरक्षित हैं। लेकिन बहुत से लोग फ्लाइट में ट्रैवेल करने से डरते हैं जबकि कार ड्राइव करने के जोखिम को लेकर उतने चिंतित नहीं रहते हैं।
लोग कार ड्राइव करते हुए फोन पर बात करते हैं। चैटिंग और टाइपिंग करते हैं और बाइक चलाने तो बाइक चलाते हुए व्हाट्प अप पर भी एक्टिव रहते हैं। शराब पीकर ड्राइव करते हैं। और यह जानते हुए भी ब्रेक और टायर सही कंडीशन में नहीं हैं तब भी मोड़ पर ओवरटेक करते हैं। इसके बावजूद वे फ्लाइट में ट्रैवेल करते हुए डरते हैं। यह सभी चीजें कंट्रोल बायस का उदाहरण हो सकती हैं।
जब हम कोई चीज खुद कर रहे होते हैं तो हमें यह भ्रम होता है कि चीजें हमारे नियंत्रण में हैं। हम जोखिम को कम करके आंकते हैं क्योंकि हम किसी चीज के बारे में काफी कुछ जानते हैं और हमें लगता है कि हम स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं जबकि वास्तव में हम ऐसा नहीं कर सकते हैं। फ्लाइट में बैठे हुए हमको पता नहीं होता है कि कया हो रहा है ऐसे में हमें नियंत्रण का भ्रम नहीं होता है।
मुझे लगता है कि नियंत्रण के भ्रम की वजह से ही लोग निवेश के जोखिम को कम करके आंकते हैं। ज्यादातर लोग शेयरों में निवेश के बारे में उतना नहीं जानते हैं जितना उनको जानना चाहिए। लेकिन इसके बावजूद वे शेयरों में निवेश करते हैं। उनके पास शेयरों के बारे में बहुत सी जानकारी होती है। ऐसे में उनको लगता है कि उनको इतनी जानकारी है कि वे चीजों पर नियंत्रण कर सकते हैं। कोई उनको बताता है कि यह शेयर अच्छा रिटर्न क्यों देगा और उनको लगता है कि चीजे उनके नियंत्रण में हैं।
नियंत्रण का भ्रम ही है जिसकी वजह से कई जानकार इक्विटी निवेशक नए निवेशकों को म्युचुअल फंड में निवेश न करने की सलाह देते हैं। ऐसे लोगों के पास शेयरों के बारे में सही जानकारी होती है लेकिन इनको लगता है कि उनको म्युचुअल फंड में उनके पैसे का क्या हो रहा है उनको कुछ पता नहीं है। म्युचुअल फंड को मैनेज करने वाला इन्वेस्टमेंट मैनेजर पायलट की तरह है और आप नहीं जानते हैं कि वह अपने केबिन में क्या क्या कर रहा है।
निवेश की दुनिया में भी लोग सही तरीका अपनाए बिना निवेश करते हैं। जैसे लोग शराब पीकर कार चलाते हैं या खराब ब्रेक और टायर के साथ भी ड्राइव करते हैं। शेयरों में निवेश करने वाले ज्यादातर इंडीविजुअल निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम को कम करने के तरीके नहीं इस्तेमाल करते हैं। वे अपने निवेश को सही तरीके से डायवर्सीफाइ नहीं करते हैं। वे अपना ज्यादातर निवेश एक या दो शेयरों या सेक्टर में रखते हैं और वे ट्रैक नहीं करते हैं कि उनके स्टॉक के साथ क्या हो रहा है।
वे खुद निवेश कर रहे हैं ऐसे में उनको लगता है कि वे यह जानते हैं कि क्या हो रहा है और अगर हालात खराब होते हैं तो वे इसे संभाल सकते हैं।