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मुश्किल दौर में भी जारी रखें निवेश

आपको या तो थोड़ा कम रिटर्न मिलेगा या थोड़ा ज्‍यादा रिटर्न

आपको या तो थोड़ा कम रिटर्न मिलेगा या थोड़ा ज्‍यादा रिटर्न

आम तौर पर लोग किसी बाहरी संकट या युद्ध जैसी स्थिति में शिकायत करते हैं कि इसकी वजह से बाजार उतार चढ़ाव का शिकार हो रहा है। मेरा मानना है कि इस बात की चिंता किसी को नहीं करनी चाहिए। अगर आपने इक्विटी में निवेश किया है तो आप पहले से जानते हैं कि इसमें उतार चढ़ाव का दौर आ सकता है। ऐसे में आपको शिकायत नहीं करनी चाहिए। और अगर आप ऐसे देश में पैदा हुए है, जिसका पड़ोंसी देश के साथ दोस्‍ताना रिश्‍ता नहीं है तो भी आपको इसकी शिकायत नहीं करनी चाहिए। आपको उन लोगों का समर्थन करना चाहिए जो पड़ोसी देश को सही रास्‍ते पर लाने के लिए कुछ कर रहे हैं।

निवेशक हैं तो उतार चढ़ाव के लिए रहें तैयार

आपको एक चीज हमेशा याद रखनी चाहिए। आप अपने निवेश को लेकर चाहे जो करें। आपको या तो थोड़ा कम रिटर्न मिलेगा या थोड़ा ज्‍यादा रिटर्न मिलेगा। अगर आप निवेशक हैं तो आपको उतार चढ़ाव का सामना करना ही पड़ेगा। ऐसे में आपको संकट के समय हर क्षण आ रही खबरों को नजर अंदाज करना होगा।

संकट में भी है अवसर

आम तौर पर निवेशक घटनाओं को देखता है और यह सोचने लगता है कि क्‍या उसे इस घटना के बाद अपना निवेश का प्‍लान बदल देना चाहिए। ज्‍यादातर निवेशक सोचते हैं कि अभी अनिश्चितता और उतार चढ़ाव का दौर है। उनको अभी इंतजार करना चाहिए और नया निवेश नहीं करना चाहिए। लेकिन ऐसा करना पूरी तरह से गलत है। पहली बात तो यह है कि किसी घटना का लंबी अवधि में क्‍या असर होगा इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है। और अगर मौजूदा घटना यह संकेत देती है कि आने वाला समय इक्विटी मार्केट के लिए अच्‍छा नहीं होगा। तो आपको तो जरूर निवेश करना चाहिए।

बाजार के शोर से न तय करें निवेश के फैसले

निवेशकों को इन घटनाओं को शोरगुल से ज्‍यादा नहीं समझना चाहिए। उनको इस पर बात पर फोकस करना चाहिए कि उन्‍हें क्‍या करना है। निवेशक अगर इस शोरगुल को सही जानकारी समझ लेगा तो वह अपने जीवन की बड़ी गलती करेगा। बई बार कुछ बड़ी खबरों में शोरगुल सामान्‍य से काफी अधिक हो सकता है। कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जिन्‍हें आप फॉलो करते हैं। लेकिन आपको इन घटनाओं से प्रभावित होकर निवेश से जुड़े फैसले नहीं करने चाहिए।

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