
एक समय था जब इक्विटी मार्केट में तेज उतार चढ़ाव का दौर आने पर इक्विटी म्युचुअल फंड की हालत खराब हो जाती थी। ऐसे समय में बचत करने वाले निवेश बंद कर देते थे और फंडों में नया निवेश आना बंद हो जाता था। कुछ निवेशक तो बाजार के उतार चढ़ाव से इतना डर जाते थे कि वे अपने फंड बेच कर अपना पैसा निकाल लेते थे। गिरावट और ज्यादा तेज होने पर और ज्यादा निवेशक फंड बेच कर अपना निवेश भुना लेते थे। सलाहकार और विश्लेषक कहते रहते थे कि आप निवेश बनाएं रखें लेकिन उनकी सलाह पर शायद ही कोई ध्यान देता था। उनके लिए इस बात का कोई मतलब नहीं था कि बाजार में गिरावट का दौर निवेश करने के लिए सबसे अच्छा समय होता है।
इस पागलपन का आसान इलाज है सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश। मैं काफी लंबे समय से लिख रहा हूं कि एसआईपी जितना औसत और रिटर्न के बारे में है उतना ही यह किसी व्यक्ति की मानसिकता से भी जुड़ा है। मैंने लगभग एक दशक पहले लिखा था कि एसआईपी के जरिए निवेश करने से निवेशक को मानसिक स्तर पर राहत मिलती है। यानी उसको निवेश को लेकर कोई तनाव नहीं लेना पड़ता है।
निवेशक स्वाभाविक तौर पर बाजार को टाइम करने का प्रयास करते हैं। यानी वे बाजार की बढ़त के दौर में निवेश करते हैं। बाजार में गिरावट आने पर निवेश भुना लेते हैं और इसके बाद निवेश नहीं करते हैं। जबकि निवेशक को इसका ठीक उलटा करना चाहिए। एसआईपी इन सब चीजों की जरूरत को ही खत्म कर देती है। जब आप एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो निवेश की प्रक्रिया ऑटो मोड में होती है। आपको एसआईपी में नियमित तौर पर निवेश करना होता है। एसआईपी की वजह से आपको यह सोचना नहीं पड़ता है कि ज्यादा रिटर्न के लिए कब निवेश करें और कब निवेश न करें।
कई बार मैं सोचता था कि सिर्फ एसआईपी एक मानसिक ट्रिक है जिसकी वजह से निवेशक बाजार की गिरावट में भी निवेश जारी रखता और अपना रिटर्न बढ़ा लेता है लेकिन इसके बावजूद बहुत कम निवेशक एसआईपी अकाउंट खुलवाते थे। हालांकि पिछले कुछ सालों के दौरान एसआईपी को लेकर निवेशकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पिछले कुछ सालों के दौरान म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशक एसआईपी की ओर शिफ्ट हो गए हैं और इसलिए अब वे इक्विटी मार्केट के उतार चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स ऑफ इंडिया एएमएफआई सितंबर के आंकड़ों से ऐसा ही कुछ पता चलता है। एमएफआई हर माह निवेश के आंकड़े जारी करता है। अगर आप इक्विटी निवेश के आंकड़े देखें तो यह बुरी खबर की तरह लगेगा। सितंबर माह में इक्विटी और इक्विटी लिंक्ड फंडों में निवेश का कुल प्रवाह 9,152 करोड़ रुपए से गिर कर 6,609 करोड़ रुपए पर आ गया। यानी 28 फीसदी की गिरावट। लेकिन यह अच्छी खबर है। इसका कारण यह है कि समान अवधि में एसआईपी में निवेश का प्रवाह 8,231 करोड़ रुपए से बढ़ कर 8,263 करोड़ रुपए हो गया।
इसका मतलब है कि गैर एसआईपी निवेशकों ने बाजार में गिरावट आने पर वही किया जैसा वे पहले करते थे। वहीं एसआईपी निवेशकों ने अच्छे या बुरे समय की परवाह किए बिना निवेश करना जारी रखा है। गैर एसआईपी निवेशकों ने गिरावट के समय पैसा निकाला लेकिन एसआईपी निवेशकों पर बाजार के उतार चढ़ाव का खास असर नहीं दिखा और उन्होंने अपना निवेश न सिर्फ बनाए रखा बल्कि और ज्यादा निवेश किया।
एक समय ऐसा भी था जब आप निवेशकों के एक बहुत छोटे समूह को छोड़ कर किसी से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं कर सकते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। अब बहुत कम एसआईपी निवेशक ऐसे हैं जो अब भी पहले की तरह बाजार गिरने पर निवेश करना बंद कर रहे हैं या अपना पैसा निकाल रहे हैं। समय के साथ साथ जैसे जैसे और ज्यादा निवेशक एसआईपी की ओर जाएंगे और बाजार को टाइम करने का प्रयास नहीं करेंगे तो रिटर्न के लिहाज से उनका अनुभव बेहतर होगा और वे निवेश बढाएंगे। एसआईपी निवेशक दूसरे निवेशकों की तुलना में ज्यादा बचत और निवेश करते हैं। वे बाजार गिरने पर निवेश बंद नहीं करते और अच्छे अनुभव की वजह से निवेश उस हद तक बढ़ाते हैं जितना वे कर सकते हैं।
एक पुरानी कहावत है। यह अहम नहीं है कि आप कितना कमाते हैं अहम यह है कि आप बचाते कितना हैं। यह अहम नहीं है कि आप कितना बचाते हैं अहम यह है कि आप निवेश कितना करते हैं। यह अहम नहीं है कि आप निवेश कितना करते हैं अहम यह है कि हम कितनी अच्छी तरह से निवेश करते हैं। यह अहम नहीं है कि आप कितनी अच्छी तरह से निवेश करते हैं अहम यह है कि आप कितने लंबे समय तक निवेश बनाए रखते हैं। अहम सिर्फ इनमें से एक चीज नहीं है इनमें से सभी चीजें अहम हैं।
आप इस कहावत से समझ सकते हैं कि एसआईपी के जरिए निवेश करने वाले क्यों अपना फाइनेंशियल गोल पाने में ज्यादा सफल रहते हैं। अगर आप छोटी रकम निवेश करते और बहुत अच्छा रिटर्न हासिल करते हैं तो इसका कोई मतलब नहीं है। मेरा मतलब है कि आप इसके बारे में अपने दोस्तों से बात कर सकते हो कि या मैं तो एसआईपी में निवेश कर रहा हूं लेकिन इससे आपका ज्यादा भला नहीं होगा। वहीं अगर आप एसआईपी में निवेश शुरू करके निवेश की रकम को समय समय पर बढ़ाते रहते हैं तो लंबे समय में आप एक बड़ी रकम बना लेंगे। इतनी बड़ी रकम जिससे पैसों के लिहाज से आपकी जिंदगी काफी आसान हो जाए।