
अच्छे और खराब निवेश में फर्क कैसे करें यह बताने के लिए इन्वेस्टर्स हैंगआउट के कई सत्र की जरूरत पड़ेगी। लेकिन आपको यह फैसला करने के से पहले कौन सा निवेश अच्छा है और कौन सा निवेश खराब दो बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले आपको यह देखना चाहिए बाजार में निवेश का आपका अनुभव कितना है और दूसरी बात कि आप निवेश के जिस विकल्प में निवेश कर रहे हैं वह आपके गोल और निवेश की अवधि के लिहाज से कितना सटीक है।
मेरा मानना है कि निवेशक अपने निवेश से आम तौर पर तब निराश होता है जब वह वह अपने लिए निवेश का ऐसा विकल्प चुन लेता है जो उसकी जरूरतों के हिसाब से सही नहीं होता है। अगर आप कोई बहुत अच्छा इक्विटी फंड चुन लेते हैं जबकि आपने निवेश सिर्फ ढाई साल के लिए किया है और आपको इतनी ही अवधि में अच्छी ग्रोथ चाहिए तो इक्विटी फंड आपकी जरूरत के हिसाब से सही नहीं है। आप इस निवेश से निराश होंगे। इसी तरह से अगर आपको अपनी रकम में अच्छी ग्रोथ चाहिए और आपने किसी अच्छे फिक्स्ड इनकम फंड में निवेश किया है तो आप निराश होंगे क्योंकि ऐसे फंड में आपकी रकम बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी।
मुझे ऐसे तमाम लोग मिले जो अपने निवेश से सिर्फ इसलिए निराश थे क्योंकि उन्होंने निवेश के ऐसे विकल्प में रकम लगाई थी जो उनके लिए सही नहीं था। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत में लोगों की सोच जोखिम से बचने की है और वे इक्विटी मार्केट के जोखिम के साथ खुद को सहज नहीं पाते हैं। इसीलिए पब्लिक प्रॉविडेंड फंड यानी पीपीएफ निवेश इक्विटी और हाइब्रिड फंड में निवेश की गई रकम से दोगुना है। आसान शब्दों में कहें तो हम फिक्स्ड इनकम चाहने वाले लोग हैं जो किसी भी तरह के जोखिम से परहेज करते हैं। इसीलिए हम मुनाफा कमाने के बड़े अवसर से चूक जाते हैं। हालांकि पीपीएफ के अपने फायदे हैं लेकिन लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से यह निवेश का बेहतर विकल्प नहीं है।
मेरी राय में एक अच्छा इक्विटी फंड वह फंड है जिसने पिछले पांच छह साल की अवधि यानी पूरे मार्केब् साइकल में अच्छा प्रदर्शन किया है। एक अच्छे और खराब इक्विटी फंड में अंतर यह है कि अच्छा फंड बढ़ते बाजार में बाजार से थोड़ा अच्छा प्रदर्शन करता है और गिरते बाजार में बाजार की गिरावट से थोड़ा कम गिरता है। इस तरह से अच्छा इक्विटी फंड पूरे मार्केट साइकल में बेंचमार्क से अधिक रिटर्न देता है। ऐसे में यह अच्छा निवेश है।
इसी तरह से फिक्स्ड इनकम फंड एक अच्छा निवेश है या नहीं इसका पता भी पूरे मार्केट साइकल में ही चलता है। फिक्स्ड इनकम फंड के मामले में साइक्लिकल साइकल लंबा होता है। इस तरह के फंड में जोखिम कुछ सालों के अंतर पर बार बार आता है और जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक फंड में निहित जोखिम का पता नहीं चलता है। लेकिन जब ऐसा होता है तब इसका असर बड़े पैमाने पर होता है। पहले के सालों में हम कई बार ऐसी स्थिति देख चुके हैं जब फंड कंपनियों के बॉण्ड ने डिफॉल्ट किया। मौजूदा समय में फिक्स्ड इनकम फंडों में से ज्यादा जोखिम वाले फंडों की पहचान करना आसान हो गया है।
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ये लेख पहली बार जनवरी 24, 2020 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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