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क्‍या मौजूदा माहौल में डेट फंड में निवेश करना सुरक्षित है ?

धीरेंद्र कुमार की सलाह है कि फंड कुछ तय मानक के आधार पर चुनिए और निवेश को डायवर्सीफाई करिए

क्‍या मौजूदा माहौल में डेट फंड में निवेश करना सुरक्षित है ?

मौजूदा माहौल में क्‍या हम डेट फंड में निवेश कर सकते हैं ? क्‍या क्रेडिट से जुड़ी समस्‍या पैदा होने पर हमारा निवेश सुरक्षित रहेगा ?
निशांत कजारिया

यह कुछ बातों पर निर्भर करता है। हमने अब तक क्रेडिट से जुड़े कुछ मामले देखे हैं लेकिन यह बहुत ज्‍यादा नुकसान करने वाले नहीं रहे हैं। उदहारण के लिए वोडाफोन आईडिया मामले को लें। यहां बहुत से फंड ने निवेश को एक अलग पोर्टफोलियो में डाल दिया। तो यह क्रेडिट का मामला इस लिहाज से था कि उस सेक्‍युरिटी का क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड हुआ था। लेकिन फंड को पूरा ब्‍याज और प्रिंसिपल वापस मिला और निववेशकों को उनकी रकम मिल रही है।

डेट फंड में जो संकट आज हम देख रहे हैं उसकी वजह क्रेडिट से जुड़ी नहीं है। फ्रैंकलिन टेंपलेटन मामला क्रे‍डिट का मामला नहीं है। इसके बजाए यह निवेशकों के व्‍यवहार से जुड़ा मामला है। एक साथ मिल कर बहुत से निवेशक अपना निवेश भुना रहे हैं।

फ्रैंकलिन टेंपलेटन का मामला उसके निवेश में लि‍क्विडिटी न होने की वजह से है। और यह ऐसे समय में हुआ है जब लोग जोखिम से बच रहे हैं। वास्‍तव में अगर ऐसा दोबारा होता है तो हम दोबारा संकट का दौर देखेंगे। और इस हालात का अनुमान लगाना एक तरह से असंभव है जहां बहुत से निवेशक म्‍युचुअल फंड कंपनी से अपना पैसा निकालने के लिए लाइन लगा देंगे।

फ्रैंकलिन टेंपलेटन का मामला उसके निवेश में लि‍क्विडिटी न होने की वजह से है। और यह ऐसे समय में हुआ है जब लोग जोखिम से बच रहे हैं। वास्‍तव में अगर ऐसा दोबारा होता है तो हम दोबारा संकट का दौर देखेंगे। और इस हालात का अनुमान लगाना एक तरह से असंभव है जहां बहुत से निवेशक म्‍युचुअल फंड कंपनी से अपना पैसा निकालने के लिए लाइन लगा देंगे।

फ्रैंकलिन टेंपलेटन का मामला उसके निवेश में लि‍क्विडिटी न होने की वजह से है। और यह ऐसे समय में हुआ है जब लोग जोखिम से बच रहे हैं। वास्‍तव में अगर ऐसा दोबारा होता है तो हम दोबारा संकट का दौर देखेंगे। और इस हालात का अनुमान लगाना एक तरह से असंभव है जहां बहुत से निवेशक म्‍युचुअल फंड कंपनी से अपना पैसा निकालने के लिए लाइन लगा देंगे।

फ्रैंकलिन टेंपलेटन का मामला उसके निवेश में लि‍क्विडिटी न होने की वजह से है। और यह ऐसे समय में हुआ है जब लोग जोखिम से बच रहे हैं। वास्‍तव में अगर ऐसा दोबारा होता है तो हम दोबारा संकट का दौर देखेंगे। और इस हालात का अनुमान लगाना एक तरह से असंभव है जहां बहुत से निवेशक म्‍युचुअल फंड कंपनी से अपना पैसा निकालने के लिए लाइन लगा देंगे।

मेरा मानना है कि मार्च की घटना को देखते हुए ज्‍यादातर म्‍युचुअल फंड कंपनियों ने खुद को ऊंची लिक्विडिटी से लैस किया है। बहुत से असेट मैनेजमेंट कंपनियों ने सेबी से अनुरोध किया है कि वे अपने कॉरपोरेट डेट फंड में ज्‍यादा अलॉकेशन सॉवरेन डेट के लिए करना चाहती हैं। सेबी ने उनको इस बात की अनुमति भी दी है। इसका कारण यह है कि कं‍पनियां चाहती हैं कि उनका फंड लिक्विड रहे। और जरूरत पड़ने पर उनको लिक्विडिटी की समस्‍या का सामना न करना पड़े। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि पहले जिस तरह का संकट सामने आ चुका है वह दोबारा आ सकता है। हालांकि मेरा मानना है कि संकट का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है और ऐसा फिर हो सकता है। ऐसा तब होता है जब कई तरह के संयोग मिल जाते हैं और बहुत सी चीजें बहुत सी दिशाओं से होने लगती हैं।

ऐसे में थोड़ा सतर्क रहिए। ऐसे फंड में निवेश करिए जो कम जोखिम वाला हो। जिसका निवेश टॉप रेटेड बॉण्‍ड में हो। इसके अलावा छोटा अलॉकेशन कॉरपोरेट डेट में हो और थोड़ा निवेश ऐसे गवर्नमेंट बॉण्‍ड में जिसकी मैच्‍योरिटी कम अवधि की हो। और ऐसे बहुत से विकल्‍प उपलब्‍ध हैं। इसके अलावा इस संकट के बाद अपने फिक्‍स्ड इनकम निवेश को डायवर्सीफाई करना अहम हो गया है।

ये लेख पहली बार जुलाई 31, 2020 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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