
कुछ दिन पहले मैंने एक आर्टिकल पढ़ा। यह आर्टिकल किसी ने ट्विटर पर पोस्ट किया था। आर्टिकल में एक पुल के बारे में बात की गई थी। यह पुल चोलुटेका नामक नदी पर बना है। यह सेंट्रल अमेरिका में है। यह पुल काफी जाना माना है। लेकिन यह इतना जाना माना क्यों है और में एक पर्सनल फाइनेंस के कॉलम में इसकी बात क्यों कर रहा हूं यह जानने के लिए आपको पुल का फोटो देखना होगा। तो आप थोड़ा रुकिए और चोलुकेटा नदी पर पुल के लिए सर्च करिए।
आपको पुल और पर्सनल फाइनेंस का संबंध तुरंत दिख जाएगा। आपको अच्छी तरह से बना हुआ पुल दिखेगा लेकिन नदी इस पुल के नीचे नहीं बह रही है बल्कि यह एक तरफ है। जब आप इसे देखते हैं तो यह निश्चित तौर पर मजेदार लगेगा। लेकिन यह उन लोगों के लिए मजेदार नहीं है जो इस पुल पर निर्भर थे। जब यह पुल बनाया गया था तो यह सही जगह पर था। हालांकि पुल का काम खत्म होते ही वहां एक ताकतवर तूफान आया और भयंकर बाढ़ आई। बाढ़ ने संपर्क के लिए बनाई गई रोड को पूरी तरह से बरबाद कर दिया और नदी को नए रास्ते पर बहने के लिए मजबूर कर दिया जो पुल के नीचे नहीं था। अब यह पुल सूखी जमीन पर खड़ा है।
यह दो दशक पहले की बात है। पुल को कुछ ही समय बाद दोबारा बनाया गया। लेकिन उस पुल की फोटो कहीं न कहीं इस बात को याद दिलाती है कि हालात किसी बहुत अच्छे प्लान को भी पूरी तरह से बेकार बना सकते हैं। सालों से या कहें दशकों से पर्सनल फाइनेंशियल प्लानिंग इस तथ्य पर आधारित रही है कि भविष्य एक तय रास्ते पर चलेगा।
इक्विटी और डेट में निवेश डायवर्सीफिकेशन के विचार पर खड़ा है। यहां डायवर्सीफिकेशन के विचार का मतलब है कि एक ही बार में सब कुछ बरबाद नहीं होगा। सभी सेक्टर्स, सभी इंडस्ट्री और सभी देशों का बुरा समय एक साथ नहीं आएगा। अगर आप अपना निवेश इन सभी में फैला देते हैं तो कुछ न कुछ तो ठीक रहेगा और यह आपके निवेश को एक हद तक बचा लेगा। डायवर्सीफिकेशन का मतलब यही है। लेकिन अभी डायवर्सीफिकेशन का विचार चोलुटेका पर बने पुराने पुल की तरह दिख रहा है। मैं यह नहीं कह रहा कि डायवर्सीफिकेशन छोड़ दीजिए। यह अब भी सही तरीके से निवेश करने का एकमात्र तरीका है। लेकिन अगर झटका ज्यादा ही तेज है तो यह उतनी मदद नहीं कर पाता जितना सामानय हालात में कर पाता। जिन निवेशकों ने बिल्कुल डायवर्सीफिकेशन नहीं किया है जिनके निवेश के गलत विकल्प में फंस गए हैं उनको काफी बुरा समय देखना पड़ सकता है।
अब यह कहने की जरूरत नहीं है कि बाजार में सबकुछ ठीक है। कॉरपोरेट के वित्तीय नतीजे आ रहे हैं। आप ऐसी कंपनियां देख सकते हैं कि उनकी बिक्री पर किस तरह से मार पड़ी है। कुछ कंपनियों की बिक्री तो एकदम से गायब हो गई है। उदाहरण के लिए चार माह पहले मैं सोचता था कि आईएनओएक्स निवेश के लिए अच्छा स्टॉक है। लेकिन पहली तिमाही में बिक्री 371 करोड़ रुपए से घट कर 24 लाख रुपए पर आ गई।
यहां तक कि ऐसी कंपनियां जो कम से कम थ्यौरी में जोखिम से परे मानी जा रहीं थी उनकी बिक्री भी घट कर आधी रह गई है। प्रेशर कुकर बनाने वाली कंपनी हाकिंन्स एक ताजा उदाहरण है जो मेरे दिमाग में आ रहा है। अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों है ? ऐसा इसलिए है क्योंकि आईएनओएक्स के कर्मचारी नया प्रेशर कुकर खरीदने नहीं जा रहे हैं भले ही उनका पुराना कूकर टूट गया हो। वे उसे रिपेयर करा लेंगे। और चूंकि आईएनओएक्स कर्मचारी नया प्रेशर कुकर नहीं खरीदेंगे। ऐसे में हाकिंस के कर्मचारी भी सिनेमा दोबारा खुलने पर ज्यादा मूवी नहीं देखेंगे। और अगर वे मूवी देखेंगे भी तो वे महंगे पॉपकॉर्न से परहेज करेंगे जिससे आईएनओएक्स मुनाफा कमाती है।
तो आपको कोविड संकट का दूसरा या तीसरा असर भी देखने को मिलेगा। यह काफी कुछ ऐसा है जिसके बारे में पहले से सोचा नहीं गया था और इसका पहले से पता भी नहीं चलेगा जब कि यह असर दिखना न शुरू हो जाए। काफी हद तक खुद कोविड की तरह रिकवरी के बाद इसके दूसरे असर क्या होंगे इसके बारे में अभी जानकारी नहीं है। यह एक लंबा सफर है और काफी हद तक यह अभी शुरू भी नहीं हुआ है।






