
जापान का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 27.8 फीसदी सिकुड़ गया। सिंगापुर जीडीपी में 41.2 फीसदी गिरावट के साथ मंदी की गिरफ्त में आ गया है। ये दो हेडलाइन हैं जो दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। जीडीपी में 27.8 फीसदी या 41.2 फीसदी गिरावट सही मायने में बहुत खराब चीज है या यह जितना बुरा दिख रहा है उससे भी ज्यादा बुरा है। सच्चाई तो यह है कि ये आंकड़े फर्जी खबरों से ज्यादा नहीं हैं। आजकल खबरों की दुनिया में हेडलाइन को आकर्षक बनाने के लिए ट्रिक का यूज किया जाता है। यह एक तरह से ट्रिक ही है। इस तरह की हेडलाइन आपको डराने के लिए तैयार की जाती हैं। डर की वजह से आप आर्टिकल को पढेंगे और खबरों को प्रकाशित करने वालों की कमाई होगी।
तो सवाल उठता है कि तथ्य क्या हैं और मैं क्यों कह रहा हूं कि यह आंकड़े फर्जी खबर जैसे ही हैं। सिंगपुर की जीडीपी आंकड़ों की बात करते हैं। अप्रैल-जून तिमाही में सिंगापुर की जीडीपी अप्रैल -जून 2019 तिमाही की तुलना में 12.6 फीसदी कम आंकी गई। जीडीपी और दूसरी कारोबारी और आर्थिक गतिविधियों के आंकडों की तुलना तब अच्छी तरह से हो पाती है जब किसी अवधि की तुलना पिछले साल की समान अवधि से की जाती है।
तो सवाल उठता है कि 41.2 फीसदी गिरावट का दावा आया कहां से। इस साल अप्रैल जून-तिमाही का जीडीपी आंकड़ा इससे पहले की तिमाही यानी जनवरी-मार्च की तुलना में 12.2 फीसदी कम था। यह 41.2 फीसदी का आंकड़ा इस तरह से आया है कि यह मान लिया गया है कि लगातार तीन तिमाही के जीडीपी आंकड़े पिछली तिमाही की तुलना में 12.2 फीसदी कम होंगे। इसमें यह मान लिया गया है कि जीडीपी में गिरावट माह दर माह तिमाही दर तिमाही उसी रफ्तार से जारी रहेगी।
किसी भी तरह से जीडीपी अपने आप में कोई पैमाना नहीं है। वास्तविक दुनिया में भी जीडीपी नाम की कोई चीज नहीं होती है। जीडीपी आंकड़े निकालने का मॉडल भी ऐसा है कि इसमें बहुत सी चीजें मान ली जाती हैं कि ऐस होगा। या एक सामान्य नियम के आधार पर कुछ चीजें तय कर ली जाती हैं। और यह साफ है कि दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं को लेकर तमाम लोगों ने यह मान लिया था कि यह तो होगा ही वैसा कुछ नहीं हुआ। तो आप खुद समझ सकते हैं कि जीडीपी आंकड़े तय करने के मौजूदा तौर तरीकों से जो आंकड़ा निकल कर आता है उसको कितनी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
तो कारोना महमारी का अर्थव्यवस्था पर किस हद तक असर हुआ है यह पता लगाने के लिए हमें किस तरह के आंकड़ों पर गौर करना चाहिए ? इसका जवाब बहुत आसान है। आपको कंपनियों के राजस्व पर गौर करना चाहिए। सरकार कितना टैक्स कलेक्ट कर पा रही है। कारों, जूतों, टीवी की बिक्री की संख्या और लोग कितना डीजल पेट्रोल और शर्ट खरीद रहे हैं। हालांकि आंकड़ों का आपकी बचत और निवेश के लिए क्या मतलब है यह जानने के लिए प्रयास करना पड़ता है लेकिन जीडीपी की हेडलाइन के विपरीत इन आंकड़ों के साथ फायदा यह है कि ये आंकड़े वास्तविक हैं।




