
पिछले पांच माह ज्यादातर निवेशकों और एनॉलिस्ट के लिए बहुत भ्रमित करने वाले रहे हैं। मुझे तो लगता है कि इसकी वजह से कुछ निवेशकों ने इक्विटी निवेश से तौबा कर लिया है और वे अपनी रकम बैंक में रख रहे हैं। जिन लोगों ने इक्विटी में अभी निवेश शुरू ही किया था उनके लिए ऐसा करने की संभावनाएं बहुत ज्यादा थीं। इक्विटी में निवेश बिल्कुल छह अंधे व्यक्तियों और हाथी की कहानी की तरह है। कहानी में हर अंधा व्यक्ति हाथी के अलग अलग अंगों को छूता है और हाथी कैसा है इसको लेकर हर व्यक्ति का अलग-अलग अनुभव सामने आता है। मुझे भरोसा है कि आपने भी यह कहानी सुनी होगी।
सबसे अच्छे समय में भी ऐसा ही होता है। हम लोगों से ज्यादातर लोग जो स्टॉक का विश्लेषण करते हैं और उनमें निवेश करते हैं वे अंधे व्यक्ति की तरह हैं। एक अच्छे निवेश को लेकर हम लोगों की राय अलग अलग होती है। कुछ लोग सबसे पहले पीई अनुपात देखते हैं और इसके आधार पर निवेश चुनने का फैसला करते हैं। वहीं कुछ लोगों को लगता है कि राजस्व की ग्रोथ रेट सबसे अहम है। और कुछ लोग मार्जिन पर दांव लगाते हैं। कुछ लोग डिवीडेंड यील्ड के दीवाने होते हैं। और सट्टेबाजों को लगता है कि बाजार किधर जा रहा है यह भांप कर ही रकम बनाई जा सकती है। हाथी के विपरीत यह जानवर ज्यादा जटिल है।
सामान्य समय में ऐसे ज्यादातर लोग अपने तरीके के साथ चलते रहते हैं। कम वैल्यू पर निवेश आम तौर पर फायदे की बात होती है। किसी स्टॉक की डिवीडेंड यील्ड ज्यादा होने का संबंध इस बात से होता है कि यह बेहतर निवेश है। और ऊंची राजस्व ग्रोथ निश्चित तौर पर अहम है।
लेकिन इनमें से हर एक बात का दूसरा पहलू भी है। किसी कंपनी की वैल्यूएशन इसलिए कम हो सकती है क्योंकि कंपनी अंडरवैल्यूड है या कंपनी गिरावट की ओर है और बाजार इस बात को जानता है। डिवीडेंड यील्ड इसलिए ऊंची हो सकती है क्योंकि कंपनी काफी ज्यादा ऐसा मुनाफा कमा रही है जिसे वितरित किया जा सकता है या ऐसा प्रमोटर की कुछ बाहरी जरूरतों की वजह से भी ऐसा हो सकता है। ग्रोथ अच्छी चीज है लेकिन इसे कृत्रिम तरीके से बढ़ाया जा सकता है। अपने आप में यह हर चीज गुमराह करने वाली हो सकती है। सामान्य समय में हमेशा इस बात के संकेत मिलते हैं कि कुछ मानक और दूसरी चीजें गुमराह करने वाली हो सकतीं हैं। कुल मिला कर ज्यादातर अनुभवी निवेश इन संकेतों को पहचान सकते हैं और इससे बचने के लिए कदम उठा सकते हैं।
हालांकि मौजूदा समय में ज्यादातर संकेतक खास तौर से गुमराह करने वाले हो सकते हैं। पिछले कुछ माह में कीमतों में बड़े पैमाने पर उतार चढ़ाव रहा है और कंपनियों की कमाई में बहुत ज्यादा अस्थिरता रही है। कमाई में अस्थिरता खुद अपने आप में कई असामान्य चीजों को जन्म दे सकती है। बहुत सी कंपनियां निकट भविष्य में इससे उबर जाएंगी। वहीं दूसरी बहुत सी कंपनियों के लिए स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है। कुछ कंपनियां और बेहतर होकर सामने आएंगी क्योंकि कोरोना संकट की वजह से उनकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की हालात और खराब हो जाएगी।
वेल्थ इनसाइट के ताजे अंक में हमारी टीम ने इस बात का जायजा लिया है कि इक्विटी मार्केट में क्या हो रहा है किन घटनाओं का कोई मतलब है और किन घटनाओं क नहीं। सबसे अहम बात यह है कि आपको अनिश्चितता और चीजों का साफ न होना स्वीकार करना होगा। एक निवेशक और एनॉलिस्ट के तौर पर अपने अनुभव से हम इस लायक नहीं हो पाए हैं कि अभी हो रही घटनाओं पर कोई फैसला कर सकें। शायद अगली बार कोई महामारी आने पर हम इसके लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार होंगे लेकिन अभी के बारे में मैं ऐसा नहीं कह सकता। हालांकि हम एक बात को तय मान सकते हैं और इस पर भरोसा कर सकते हैं। और यह है कि निवेश के सिद्धांत नहीं बदलेंगे। अच्छी तरह से कंपनियां चलाने का ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाला और रकम को शेयरहोल्डर्स में बांटने वाला मैनेजमेंट आगे भी ऐसा करता रहेगा। और इसके विपरीत चीजें करने का ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाला मैनेजमेंट भी आगे ऐसा ही करता रहेगा।
उतार चढ़ाव के बीच हम लगातार उन चीजों को खंगाल रहे हैं जो बदल रहीं है और ये स्टॉक्स को कैसे प्रभावित करेंगी। इसके साथ ही हमारी नजर उन चीजों पर भी है जो एकदम नहीं बदल रहीं है। आज के समय में जब हर आदमी बदलाव बदलाव की बात कर रहा है एक निवेशक के तौर पर संतुलन बनाए रखना बेहद अहम है।
कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाना और साबुन से हाथ धोना जरूरी है। आप को अपनी फिक्र नहीं है तो कम से कम पहले से बीमार और उम्रदराज लोगों के बारे में सोचें। ऐसे लोग आपके परिवार में भी हो सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए कोरोना जानलेवा हो सकता है।

