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अप्रत्‍याशित की उम्‍मीद

आने वाले समय में बहुत सी चौंकाने वाली घटनाएं होंगी और इनमें से कई नकारात्‍मक होंगी

आने वाले समय में बहुत सी चौंकाने वाली घटनाएं होंगी और इनमें से कई नकारात्‍मक होंगी

फरवरी में मैंने कॉलम में लिखा था। अगर कोरोना वायरस महामारी का कहर इसी तरह से जारी रहता है जैसा अब तक रहा है तो…. यहां एक समस्‍या है… इस वाक्‍य को पूरा करने का और कोई तरीका नहीं सिवाय इसके कि आप अंधा अनुमान या अंदाजा लगाएं।

कुछ महीने गुजरने के साथ ही अंदाजा लगाने की जरूरत अब बहुत कम हो गई है। कोराना संकट का क्‍या असर हो सकता है यह काफी हद तक दिख रहा है। और हम सबसे बुरे दौर को पार कर अब काफी बेहतर हालात में हैं। कोरोना वायरस अब भी बहुत से लोगों को शिकार बनाएगा लेकिन महामारी का सबसे बुरा दौर खत्‍म हो चुका है। आर्थिक मोर्चे पर भारत की रिकवरी काफी तेज रही है और वैक्‍सीन के मोर्चे पर भी अच्‍छी खबरें आ रहीं हैं। हालांकि मुझे फार्मा इंडस्‍ट्री के काम करने के तौर तरीकों लेकर संदेह है।

हालांकि यहीं एक समस्‍या छिपी हुई है। इस बात का खतरा काफी अधिक है कि हम लोगों में बहुत से लोग ज्‍यादा उत्‍साह में न आ जाएं। जो लोग व्‍यक्तिगत या प्राफेशनल लेवल पर वित्‍तीय समस्‍या का सामना कर रहे हैं उनके साथ तो ऐसा नहीं होने जा रहा है। और ऐसे लोगों की संख्‍या करोड़ों में है। लेकिन ऐसे लोग जो इन्‍वेस्टिंग क्‍लास से हैं उनके लिए यही बात नहीं कही जा सकती है। बाजार नई ऊंचाई पर है। त्‍योहार का सीजन कारोबार के लिहाज से काफी अच्‍छा चल रहा है। ऐसे में बहुत से निवेशक व्‍यक्तिगत स्‍तर पर रकम के लिहाज से काफी अच्‍छा महसूस कर सकते हैं।

मानसिकता के नजरिए से मुझे उन लोगों के लिए खुशी होगी जो ऐसा महसूस कर रहे हैं। हालाकि पिछले कुछ महीनों ने हमें अगर कोई चीज सिखाई है तो वह वह है नकारात्‍मक तौर पर चैंकाने वाली घटनाओं की ताकत। इस तरह की घटनाओं से हमें यह सबक नहीं मिलता है कि हम बेहतर अनुमान लगाएं और सब कुछ इन अनुमानों की सटीकता पर निर्भर है। इसके बजाए सबक यह है कि अप्रत्‍याशित घटनाएं जल्‍दी जल्‍दी होंगी। और अहम बात यह है कि इस बात की आशंका ज्‍यादा है कि ये नकारात्‍मक घटनाएं सकारात्‍मक के बजाए नकारात्‍मक ज्‍यादा होंगी।

क्‍या यह आपको सही लग रहा है ? आप इसे इस तरह से सोच कर देखिए ? क्‍या कोई ऐसी घटना हो सकती है जो दुनिया का आर्थिक उत्‍पादन एक साल में 10 फीसदी तक घटा दें। हां, निश्चित तौर पर। हम शायद इस तरह की घटना देख रहे हैं हालांकि शायद इसे मापा न जा सके। हालांकि, क्‍या इसका उलटा भी हो सकता है ? क्‍या कुछ ऐसा हो सकता है जो दुनिया के आर्थिक उत्‍पादन को 10 फीसदी तक बढ़ा दे। नहीं निश्चित तौर पर नहीं। इस तरह का चमत्‍कार होने की संभावना लगभग शून्‍य है।

आपको यह समझना होगा कि ऐसी चीजें इस बात पर निर्भर करती हैं कि वे किस पैमाने पर हो रही हैं। क्‍या एक व्‍यक्ति बहुत जल्‍द अमीर बन सकता है। इसका जवाब होगा हां। ऐसा दुनिया में कुछ लोगों के साथ रोज होता है। लेकिन क्‍या ऐसा किसी छोटी कंपनी बड़ी कंपनी या समूचे सेक्‍टर या एक देश या पूरी दूनिया के साथ हो सकता है। जैसे जैसे स्‍केल बढ़ता जाता है ऐसा होने की संभावना कम होती जाती है। वहीं नकारात्‍मक झटके का आकार और गति हमेशा बड़ी और तेज होने की संभावना रहती है। नकारात्‍मक घटनाएं आपको सकारात्‍मक घटनाओं की तुलना में ज्‍यादा ताकत से और अचानक चौंका सकती हैं। यह बात न सिर्फ फाइनेंस की दुनिया में सच हे बल्कि आम जीवन में भी उतना ही सच है। उदाहरण के लिए व्‍यक्तिगत रकम के मामले में कुछ माह पहले ही लोगों ने इस बात को महसूस किया है।

इस पूरी कहानी का मतलल बहुत साफ है। हालांकि इसे लागू करना इतना आसान नहीं है। हमेशा अप्रत्‍याशित की उम्‍मीद करें। अप्रत्‍याशित चीजें उम्‍मीदे से ज्‍यादा खराब होने की उम्‍मीद करें। एक पुरानी कहावत है कि सबसे खराब के लिए तैयार रहते हुए सबसे बेहतर की उम्‍मीद करें। ज्‍यादातर कहावत की तरह यह भी कहावत बन गई है क्‍यों यह सच है।

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