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अच्‍छे फंड वाली एएमसी आजकल संघर्ष क्‍यों कर रही हैं ?

आशुतोष गुप्‍ता बता रहे हैं कि निवेशकों को क्‍यों कम अवाधि में फंड के खराब प्रदर्शन को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए उनको इसके बजाए लंबी अवधि के प्रदर्शन पर गौर करना चाहिए

अच्‍छे फंड वाली एएमसी आजकल संघर्ष क्‍यों कर रही हैं ?

मैं डायवर्सीफिकेशन के नजरिए से कई असेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) में निवेश कर रहा हूं। लेकिन हाल में मैने पाया है कि एचडीएफसी, आदित्‍य बिड़ला सन और फ्रैंकलिन सहित चार स्‍कीमों में से तीन स्‍कीम अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर रहीं हैं। सिर्फ आईसीआईसीआई का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर है। इसका क्‍या कारण है ? इन एएमसी के पास ज्‍यादातर अच्‍छे फंड होते हैं।

-योगेंद्र दाते

म्‍युचुअल फंड के लिए प्रदर्शन के लिहाज से बुरे दौर से गुजरना असामान्‍य बात नहीं है। जब एक फंड मैनेजर पोर्टफोलियो बनाता है तो वह कुछ स्‍टॉक्‍स चुनता है और इनसे पोर्टफोलियो बनाता है। वह उम्‍मीद करता है कि एक समय आएगा जब बाजार स्‍टॉक्‍स की संभावनाओं को पहचानेगा और और इनकी कीमतों में इजाफा होगा। लेकिन बाजार इस बात के लिए बाध्‍य नहीं है कि वह उसी दिन से पुरस्‍कार देने लगे जिस दिन से फंड मैनेजर ने अपना पोर्टफोलियो बनाया है। स्‍टॉक्‍स की कीमतें बढ़ने में कुछ समय लग सकता है। निवेशक के लिए यह परीक्षा का दौर होता है। कई मामलों में एक फंड मैनेजर अपने फैसलों को लेकर गलत हो सकता है और कुछ समय के बाद वह इस गलती को स्‍वीकार करता है और पोर्टफोलियो में बदलाव करता है। ऐसे में कुल मिला कर मेरा मानना है कि म्‍युचुअल फंड निवेश्‍कों को फंड के बुरे प्रदर्शन के दौर से बहुत परेशान नहीं होना चाहिए। हां अगर फंड सालों से लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है तो यह जरूर चिंता की बात है और इसके बारे में जांच पड़ताल की जानी चाहिए। और जरूरत पड़ने पर उस फंड को बेच कर बेहतर प्रदर्शन कर रहे दूसरे फंड में निवेश करना चाहिए।

ये लेख पहली बार दिसंबर 01, 2020 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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