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क्‍या इस 50,000 का कोई मतलब है ?

क्‍या यह सिर्फ एक बड़ा नंबर है जिसको लेकर बहुत ज्‍यादा बेकार की बातें की जा रही हैं ? हो सकता है ऐसा न हो

क्‍या यह सिर्फ एक बड़ा नंबर है जिसको लेकर बहुत ज्‍यादा बेकार की बातें की जा रही हैं ? हो सकता है ऐसा न हो

मैंने सोचा था कि सेंसेक्‍स या किसी दूसरे सूचकांक के नंबर का कोई मतलब नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसा लगता है कि अगर सेंसेक्‍स 50,000 तक पहुंच गया है तो यह निवेशकों के लिए बड़ी बात है। या हो सकता है कि निवेशकों के लिए बड़ी बात न हो। सिर्फ मीडिया या सोशल मीडिया में लिखने वाले ही सेंसेक्‍स 50,000 अंक पहुंचने के बारे में लगातार बात कर रहे हैं।

सेंसेक्‍स 50,000 अंक तक पहुंचने के बारे में कई अलग-अलग बातें हैं जो इससे जुड़ी नहीं हैं लेकिन इन पर गौर करना फायदेमंद है। शुरूआत इस बात से करते हैं कि बड़े नंबर का अपने आप में कोई खास मतलब नहीं है। सूचकांक का वास्‍तविक स्‍तर 40 साल से भी अधिक समय पहले एकपक्षीय तरीके से एक चुने हुए दिन पर 100 माना गया था। अगर आगे का दिन चुना गया होता तो नंबर कम होता। निफ्टी का शुरूआत 1995 में 1,000 अंक से हुई थी। इसलिए यह अभी सिर्फ 14,000 पर है।

ज्‍यादा अहम बात यह समझना है कि इंडेक्‍स के स्‍तर में बदलाव का मतलब क्‍या है। गणित समझने वाले निवेशक यह जानते हैं कि यह प्रतिशत है जो मायने रखता है न कि नंबर। सेंसेक्‍स अगर 45,000 से 50,000 के स्‍तर तक पहुंच जाता है तो स्‍तर में बदलाव 11.1 प्रतिशत का हुआ। और इसका उतना ही महत्‍व है जितना दो दशक पहले सेंसेक्‍स के 2,000 से 2,222 के स्‍तर पर पहुंचने का महत्‍व था। या अक्‍टूबर की शुरूआत से सेंसेक्‍स ने 10,000 अंकों की बढ़त दर्ज की है और यह उतना ही अहम है जितना निफ्टी की 2,850 अंकों की बढ़त। इस अवधि में दोनों सूचकांक ने 25 फीसदी की बढ़त दर्ज की है। बाजार गंभीरता से नजर रखने वाले किसी भी व्‍यक्ति के लिए यही नंबर है जो मायने रखता है।

तो क्‍या हम सब इस बात से सहमत है कि सेंसेक्‍स का स्‍तर मायने नहीं रखता है ? नहीं ऐसा नहीं है। वैसे तो सेंसेक्‍स का स्‍तर मायने नहीं रखता है। लेकिन बड़े नंबर की वजह से इक्विटी इन्‍वेस्टिंग के बारे में सामान्‍य से ज्‍यादा बात की जाती है। भारत में इक्विटी इन्‍वेस्टिंग अब भी एक खास गतिविधि है। जिन लोगों ने अभी इक्विटी में निवेश शुरू किया है उनके लिए भी बड़ा नंबर मददगार होता है। उनको लगता है कि यह बेहतर हो रहा है। सेंसेक्‍स का 50,000 के स्‍तर पर पहुंचने से यह साफ है कि 40 सालों में यह नंबर 500 गुना बड़ा हो गया है और जब आप इसे समझ लेते हैं तो इसे दिमाग से निकालना आसान नहीं होता है। खास कर अगर आप इस बात को लेकर चिंतित है कि आपकी बचत भविष्‍य में कितना बढ़ेगी या नहीं बढ़ेगी।

जिनको बाजार में अब तक आई बड़ी गिरावट याद है वे इस बात को अच्‍छी तरह से समझ सकते हैं सेंसेक्‍स का यह नंबर भी अर्थव्‍यवस्‍था और बिजनेस के आगे बढ़ने के साथ पीछे छूट जाएगा। 28 साल पहले हर्षद मेहता घोटाले के समय बाजार 4,500 से गिर कर 2,300 अंक पर आ गया था। अब ये नंबर कितना छोटा लगता है। 12 साल पहले बाजार 20,000 से गिर कर 8,000 अंक पर आ गया था। अब यह सब बहुत पीछे छूट गया है। अहम बात यह है कि बीते सालों में बाजार में जब भी बड़ी गिरावट आई तो बाजार हर बार कुछ समय में इससे उबर गया। और आज इस बात का कोई खास मतलब नहीं है।

जिन लोगों को इक्विटी निवेशक बनना चाहिए लेकिन वे इसके लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है उनको इस पर सोचना चाहिए। इसी तरह से जो लोग इक्विटी में निवेश करते हैं लेकिन इक्विटी के तेज उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो जाते हैं उनको यह समझना चाहिए सब चीजें बीत जाएंगी और लंबी अवधि में कहानी हमेशा खुशी देने वाली होगी।

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