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अगर मुझे 10 साल की अवधि के लिए निवेश करना है तो क्‍या मैं 70:30 का असेट अलॉकेशन फॉलो कर सकता हूं ?

आशुतोष गुप्‍ता का कहना है कि 70:30 का असेट अलॉकेशन इससे भी अधिक अवधि के गोल के लिए भी सही हो सकता है

अगर मुझे 10 साल की अवधि के लिए निवेश करना है तो क्‍या मैं 70:30 का असेट अलॉकेशन फॉलो कर सकता हूं ?

अगर मेरी निवेश अवधि 10 साल से अधिक है तो क्‍या तब भी मैं 70:30 का असेट अलॉकेशन फॉलो कर सकता हूं या मुझे 100 फीसदी अलॉकेशन इक्विटी में करना चाहिए ? 70:30 असेट अलॉकेशन में क्‍या अग्रेसिव हाइब्रिड फंड में निवेश करना बेहतर है या मुझे इक्विटी डेट का अपना मिक्‍स तैयार करना चाहिए ?
-चंदन अग्रवाल

अगर आप इस अलॉकेशन के साथ सहज महसूस करते हैं तो आप हर तरह से 70:30 के अलॉकेशन पर आगे बढ़ सकते हैं। इक्विटी मार्केट में तेज गिरावट आने पर डेट अलॉकेशन आपको सहारा देगा। इसके अलावा यह सहारा आपको गिरावट के दौर में भी निवेश बनाए रखने और डर कर बाजार से निकलने में आपकी मदद करेगा। इस तरह से कुल मिला कर 70:30 अलॉकेशन 10 की निवेश अवधि या इससे भी अधिक अवधि के लिए सटीक हो सकता है।

अब इस पर बात करते हैं कि आपको अग्रेसिव हाइब्रिड में निवेश करना चाहिए या खुद से इक्विटी और डेट फंड का अलॉकेशन तय करना चाहिए। मैं आपको दोनों विकल्‍प के फायदे और नुकसान के के बारे में बताता हूं इससे आप खुद के लिए बेहतर फैसला कर सकेंगे। निवेश में सहूलियत और टैक्‍स बचाने के लिहाज से अग्रेसिव हाइब्रिड फंड बेहतर है। इसमें रीबैलेसिंग ऑटो मोड में अपने आप हो जाती है और निवेशक को खुद से कुछ नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा रीबैलेंसिंग इस तरह से होती है कि टैक्‍स के मोर्चे पर आपको फायदा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि जब फंड इक्विटी या डेट बेचता है और रकम नए सिरे से निवेश करता है तो कोई कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स लॉयबिलिटी नहीं पैदा होती है। तो टैक्‍स बचाने के लिहाज से यह बहुत अच्‍छा व्‍हीकल है। अग्रेसिव हाइब्रिड फंड का एक कमजोर पक्ष यह है कि ये अपेक्षाकृत ज्‍यादा महंगे होते हैं। इनका एक्‍सपेंश रेशियो काफी हद तक 100 फीसदी इक्विटी फंड के जितना ही होता है। जबकि अग्रेसिव हइब्रिड फंड एक चौथाई रकम फिक्‍स्ड इनकम में निवेश करते हैं। इस नजरिए से ये फंड थोड़े महंगे हैं।

अब अगर हम खुद से इक्विटी और डेट फंड का अलॉकेशन तय करते हैं तो इसके पक्ष में पहली बात तो यह है कि इस तरह का अलॉकेशन पूरे पोर्टफोलियो के लिए कम एक्‍सपेंश रेशियो में बनाया जा सकता है। इस तरह से सेटअप में डेट फंड का एक्‍सपेंश रेशियो कम होगा। इसके अलावा जोखिम से परहेज करने निवेशक जो सिर्फ लार्ज कैप्‍स के साथ बने रहना पसंद करते हैं वे इस तरह के अलॉकेशन के लिए इंडेक्‍स फंड चुन सकते हैं। इस मामले में कुल पोर्टफोलियो अपने आप गिर जाएगा।

इसके पक्ष में दूसरी बात यह है कि आप इस तरह से इक्विटी और डेट फंड दोनों की अच्‍छी चीजों का फायदा उठा सकते हैं। आप सबसे बेहतर संभवनाओं वाले इक्विटी और डेट फंड चुन सकते हैं। लेकिन इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि इस तरह के अलॉकेशन के लिए निवेशक को खुद से काफी काम करना होगा। उसको समय समय पर निवेश से जुड़े फैसले करने होंगे। साल में कम से कम एक बार रीबैलेंसिंग करना होगा और रीबैलेंसिंग करते हुए लोड और टैक्‍स का ध्‍यान रखना होगा। तो इन सब फैसलों के लिए निवेशक को काफी समय देना होगा और प्रयास भी करना होगा।

इन सारी बातों प गौर करते हुए आप यह फैसला कर सकते हैं कि आप अग्रेसिव हाइब्रिड फंड के साथ जाना चाहते हैं या खुद से अलॉकेशन मेनटेन करना चाहते हैं।

ये लेख पहली बार जनवरी 27, 2021 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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