
कुछ भारतीय निवेशक हाल के सप्ताह में सुस्त रकम की समस्या का सामना कर रहे हैं। मैं कुछ निवेशक इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ऐसे निवेशकों की संख्या छोटी, मध्यम या बड़ी है इस समय यह जानने का कोई सटीक तरीका नहीं है। लोगों को उनके फंड निवेश का आवंटन उनके बैंक अकाउंट से रकम कटने के कई दिन बाद मिल रहा है। मैं यह बात 11 फरवरी को लिख रहा हूं इस समय तक कुछ निवेशकों को कुछ ट्रांजैक्शन का आवंटन अब भी नहीं हुआ है जबकि उनके बैंक अकाउंट से रकम 1 फरवरी को ही कट गई है।
हाल में म्युचुअल फंड में निवेश के तंत्र में बड़ा बदलाव हुआ है। आपको आवंटित की गई यूनिट तभी मिलती है जब फंड कंपनी को आपकी रकम स्कीम के बैंक अकाउंट में मिल जाती है। यानी जब रकम निवेश के लिए तैयार होती है। एनएवी जिस पर यूनिट आवंटित की जाती है वह भी उसी दिन की होती है जिस दिन यूनिट आवंटित होती है।
बहुत से लोगों को लग रहा होगा कि जाहिर तौर पर यही सही प्रक्रिया है। हालांकि, तथ्य यह है कि सभी निवेशकों के लिए इसे कुछ दिन पहले ही यानी इस साल 31 जनवरी को लागू किया गया है। इसके पहले तक 2 लाख रुपए से कम निवेश करने वाले निवेशक को उसी दिन की एनएवी पर आवंटन मिलता था जिस दिन 3 बजे से पहले खरीद अनुरोध प्राप्त होता था।
अगर आप रकम के प्रवाह के बारे में सोचते हैं तो यह अजीब लगेगा कि आपकी रकम फंड कंपनी तक पहुंचने से पहले ही फंड में निवेश हो सकता है। अब अगर रकम फंड में नहीं पहुंचती है और एनएवी बढ़ जाती है तो आपको कुछ रिटर्न मिलेगा। अब सवाल उठता है कि यह रिटर्न कहां से आया ? जिस तरह से म्युचुअल फंड काम करता है उस हिसाब से आपको यह रिटर्न किसी दूसरे निवेशक से ही मिल सकता है जिसने पहले से ही फंड में निवेश किया हुआ है। और अगर एनएवी बढ़ने के बजाए गिरती है तो इसका उलटा भी उतना ही सच है।
ऐसा एक संयोग की वजह से हुआ है। 2 लाख रुपए से कम रकम के निवेश के लिए हुए बदलाव के साथ नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) में कुछ तकनीकी दिक्कत पैदा हो गई। एनपीसीआई रिटेल पेमेंट और सेटेलमेंट सिस्टम के लिए बैंक एंड सिस्टम संचालित करता है। बहुत से निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस अवधि में इक्विटी मार्केट कम अवधि के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनको लगता है कि एक दिन इधर-उधर होने से उनको मिलने वाली खरीद एनएवी में कुछ फीसदी का अंतर हो सकता है।
गणित के लिहाज से निश्चित तौर पर यह सही है। लेकिन यह लंबी अवधि के निवेश की भावना के खिलाफ है और लंबी अवधि की एसआईपी के रिटर्न पर मामूली असर डालता है। इसके बावजूद निवेशकों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहां उनको वादे के मुताबिक चीजें मिलनी चाहिए और अगर किसी तरह की बाधा आती है तो उनको इस बात की सही जानकारी मिलनी चाहिए कि क्या गलत है और इसे कब तक ठीक किया जाएगा। मौजूदा संकट में इस बात का पूरी तरह से अभाव है। इस मामले में रकम लोगों के बैंक अकाउंट से निकल गई है और रकम सिस्टम में कहीं है। निवेशकों को इस बारे में स्पष्टीकरण मिलना चाहिए कि क्या हो रहा है।
यह बात समूचे बिजनेस के दिलचस्प पहलू की ओर इशारा करती है। इस अवधि में किसी सामान्य यूजर को यूपीआई, एनईएफटी, आईएमपीएस, चेक क्लियरेंस या किसी ऐसे सेटलमेंट सिस्टम के साथ किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़। ये सभी एनपीसीआई से संचालित हैं। कुछ समय के लिए सामान्य बाधा थी लेकिन 10 दिन की देरी का कोई कारण नहीं समझ आता है।
सवाल उठता है कि हो क्या रहा है ? क्या कोई यह बात निवेशकों को स्पष्ट करेगा ? निवेशकों को यह बात जानने का हक है।


