
कोविड, अर्थव्यवस्था की रिकवरी, कॉरपोरेट की कर्ज लेने की क्षमता, ब्याज दर आदि, आदि। एक निवेशक के तौर पर क्या इन बातों को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए ?
हालांकि अगर इसके बारे में सोचें तो क्या आपको यह अजीब नहीं लगता है कि आम तौर पर निवेशक उन बातों की चिंता ज्यादा करते हैं जिनको वे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। वहीं उन बातों को नजरअंदाज करते हैं जिनको वे वास्तव में नियंत्रित कर सकते हैं। क्या आप कोविड की लहर पर असर डाल सकते हैं ? नहीं, आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। क्या आप इस बात को नियंत्रित कर सकते हैं कि आप किस म्युचुअल फंड में और कब निवेश करेंगे ? निश्चित तौर पर आप ऐसा कर सकते हैं।
अब सवाल उठता है कि आपको किस बात पर सोच विचार करना चाहिए ?
कुछ साल पहले मैंने अमेरिका के सिक्योरिटी एक्सपर्ट ब्रूस सेनेयर का एक दिलचस्प आर्टिकल पढ़ा। सेनेयर एक क्रिप्टोग्राफर और कंप्यूटर सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट है। उन्होंने हर तरह के जोखिम और सुरक्षा के बारे में खुद को एक चिंतक और लेखक के तौर पर विकसित किया है। जोखिम और उस पर मानवीय प्रतिक्रिया के बारे में उनके कुछ विचार निवेश को लेकर काफी ज्यादा प्रासांगिक हैं।
उनका जो विचार मैंने पढ़ा वह ऐसी बात को लेकर था जिसे सेनेयर कंट्रोल बॉयस कहते हैं। उनका कहना है कि अक्सर उन स्थितियों में जहां हमारा नियंत्रण होता है वहां हम जोखिम को कम करके आंकते हैं और उन स्थितियों में जहां हमारा नियंत्रण नहीं होता है हम जोखिम को बढ़ा चढ़ा कर देखते हैं। उन्होंने जो सबसे आम उदाहरण दिया वह प्लेन में उड़ने के डर बनाम ड्राइव करते हुए जोखिम की धारणा को लेकर था। इस बात के सबूत स्पष्ट हैं कि एक व्यावसायिक फ्लाइट में यात्रा करना परिवहन का सबसे सुरक्षित मोड है। इसके उलट भारत की सड़कें काफी असुरक्षित हैं। फिर भी बहुत से लोग प्लेन में यात्रा करने को लेकर ज्यादा डरे होते हैं वहीं ड्राइविंग को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं रहते हैं। वास्तव में कोविड के डर के साथ ही हम दूसरे तरह के जोखिम उठाते हैं। एक दिन मेरी कार की टक्कर एक बाइक सवार से होते होते बची। बाइक सवार रोड की गलत साइड पर तेजी से बाइक चला रहा था। और उसने हेलमेट भी नहीं पहना था। हालांकि उसने मास्क अच्छी तरह से पहना हुआ था। उसने कोविड से सुरक्षित रहने का तो इंतजाम किया लेकिन अपने दूसरे कदमों से कहीं ज्यादा जोखिम उठाया।
अक्सर लोग अनजाने में जोखिम के स्तर को बढ़ाते चले जाते हैं। वे ड्राइव करते हुए चैट करते हैं या अपने फोन पर टाइप करते हैं। बाइक चलाने वाले ड्राइव करते हुए व्हाट्स ऐप पर लगे रहते हैं। फिर भी वे फ्लाइट से यात्रा करने से डरते हैं। ये सब कंट्रोल बॉयस के उदाहरण हैं। जब हम खुद से कुछ कर रहे होते हैं तो हमें नियंत्रण का भ्रम रहता है। हम जोखिम को कम करके आंकते हैं क्योंकि हमारे पास सारे फैक्ट होते हैं और हमको लगता है कि हम हालात को नियंत्रित कर सकते हैं जबकि वास्तविकता में हम ऐसा नहीं कर सकते हैं। फ्लाइट में सफर करते हुए हमें पता नहीं होता है कि क्या हो रहा है इसलिए हमें नियंत्रण का भ्रम नहीं होता है।
मेरा मानना है कि नियंत्रण का भ्रम ही वह चीज है जिसकी वजह से लोग निवेश करते हुए जोखिम को कम करके आंकते हैं। ज्यादातर लोग बिना सलाह के निवेश करने के बारे में जरूरी जानकारी नहीं रखते हैं। फिर भी वे ऐसा करते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं कि क्योंकि उनके पास काफी अधिक जानकारी होती है और उनको लगता है कि वे काफी कुछ जानते हैं और हालात को नियंत्रित कर सकते हैं। कोई व्यक्ति निवेशकों को एक स्टोरी बेच देता है। इस स्टोरी में यह बताया जाता है कि क्यों निवेश अच्छा प्रदर्शन करेगा। और स्टोरी में काफी जानकारी होती है जो निवेशक में नियंत्रण का भ्रम पैदा कर देती है।
यही वजह है कि बहुत से बेहतर समझ रखने वाले इक्विटी निवेशक नए निवेशकों को म्युचुअल फंड में निवेश करने से बचने की सलाह देते हैं। इन लोगों के पास स्टॉक्स के बारे में काफी जानकारी होती है लेकिन उनको लगता है कि म्युचुअल फंड में उनकी रकम के साथ क्या हो रहा है। इसके बारे में उनके पास बहुत कम जानकारी है। म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट मैनेजर पॉयलट की तरह है और आपको पता नहीं है कि फ्लाइट में क्या हो रहा है।
दुर्भाग्य से निवेश की दुनिया में भी शराब पीकर या बिना अच्छी ब्रेक या टायर के ड्राइविंग करने वालों की तरह के लोग होते हैं। बहुत कम निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सिस्टमेटिक रिस्क कंट्रोल अपनाते हैं। वे अपने पोर्टफोलियो को सही तरीके डायवर्सीफाई नहीं करते हैं और इस बात को ट्रैक नहीं करते हैं कि जो निवेश वे खरीद चुके हैं उसके साथ क्या हो रहा है। तथ्य यह है कि वे खुद से निवेश कर रह रहे हैं इसलिए उनको भ्रम हो जाता है कि उनको पता है कि क्या हो रहा है और अगर हालात मुश्किल हो जाएंगे तो वे इस मुश्किल से बाहर आ जाएंगे।