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इंटरनेशनल फंड की भरमार

आजकल बड़े पैमाने पर नए इंटरनेशनल फंड लॉंच किए जा रह हैं। लेकिन क्‍या ये फंड निवेश के लायक हैं

आजकल बड़े पैमाने पर नए इंटरनेशनल फंड लॉंच किए जा रह हैं। लेकिन क्‍या ये फंड निवेश के लायक हैं


फरवरी की शुरूआत से लेकर सिर्फ चार माह में भारतीय म्‍युचुअल फंड कंपनियों ने आठ इंटरनेशनल फंड लांच किए हैं। वास्‍तव में इनमें से चार फंड सिर्फ इसी माह में लांच किए गए हैं या लांच किए जाने की प्रॉसेस में हैं। अगर आप 2020 के आखिरी सप्‍ताह में लांच किए दो फंड को जोड़ लें तो पांच माह में 10 इंटरनेशनल फंड हो जाते हैं। जब से इस कैटेगरी को कानूनी तौर पर अनुमति मिली है और मार्च 2004 में इस तरह का पहला फंड लांच होने के बाद इस समय सबसे तेज गति से इंटरनेशनल फंड लांच हो रहे हैं।

सवाल उठता है कि नए इंटरनेशनल फंड लांच करने के लिए अचानक इतना उत्‍साह क्‍यों दिख रहा है ? ऐतिहासिक तौर पर सभी कंपनियों की तरह म्‍युचुअल फंड कंपनियां कई वजहों से नए फंड लांच करने को प्राथमिकता दे रही हैं। अब नए फंड बेचना आसान और मुनाफे वाला हो गया है। हालांकि दो साल पहले फंड रेग्‍युलेटर सेबी ने कैटेगरीज को परिभाषित किया था जिसके तहत म्‍युचुअल फंड स्‍कीम लांच की जा सकती हैं। मुख्‍यधारा की सभी कैटेगरीज जैसे लार्ज कैप अथवा मिड कैप में यह हर कैटेगरी के लिए एक फंड तक सीमित था।

हालांकि ऐसी कैटेगरीज में जहां कई तरह के अंतर संभव हैं वहां कंपनियां जितने चाहें उतने फंड लांच कर सकती हैं लेकिन हर एक फंड का थीम या फोकस अलग होना चाहिए। इसके अलावा जिस तरह से महामारी के दौरान कम से कम अब तक ग्‍लोबल इक्विटी मार्केट मजबूत रहा है इससे इंटरनेशनल फंड लांच करने के लिए प्रोत्‍साहन मिला है। हर तरह के फंड लांच हो रहे हैं। ऐसे में आपको यह जानने के लिए कि क्‍या हो रहा है सिर्फ फंड का नाम पढ़ना होगा। एक्सिस ग्‍लोबल इनोवेशन, एक्सिस ग्रेटर चाइना इक्विटी, बीएनपी पारीबास अक्‍वा, एचएसबीसी ग्‍लोबल इक्विटी क्‍लाइमेट चेंज, इन्‍वेस्‍को ग्‍लोबल कंज्‍यूमर ट्रेंड्स, कोटक इंटरनेशनल आरईआईटी, कोटक नास्‍डाक 100, मीरे एनवाईएसई फैंग, एसबीआई इंटरनेशनल एक्‍सेस- यूएस इक्विटी। इनमें से कुछ इंटरनेशनल फंड एक सामान्‍य डायवर्सीफाइड फंड के काफी करीब हैं।

कोई भी चाहे वह घरेलू इक्विटी फंड या इंटरनेशनल फंड के बारे में बात कर रहा हो निवेश का काम यह पता करना नहीं है कि कौन सा थीम, सेक्‍टर या रीजन अच्‍छा प्रदर्शन करेगा। जब आप म्‍युचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपके लिए निवेश के बारे में फैसले लेने के लिए फंड मैनेजर को भुगतान करते हैं। यह उसका काम है कि वह पता करे कि इस समय किस तरह का निवेश सबसे बेहतर है। यह पता करना कि फार्मा या बैंकिंग या क्‍लाइमेट चेंज या अक्‍वा कौन सा सेक्‍टर निवेश करने के लिए सही है यह उस सर्विस का हिस्‍सा है जो आप म्‍युचुअल फंड में निवेश करते हुए हासिल करते हैं। हालांकि जब आप किसी ऐसे फंड के लालच में आ जाते हैं जो एक बहुत ही सीमित दायरे में फोकस करता है तो आप फंड मैनेजर के हाथ बांध देते हैं अपने लिए निवेश से जुड़े फैसले खुद करते हैं।

अगर आपमें अपने लिए निवेश से जुड़े फैसले करने की समझ है तो ऐसा करना ठीक है। हालांकि अगर आप किसी की मार्केटिंग रणनीति में आकर ऐसा कर रहे हैं तो यह आपके लिए अच्‍छा नहीं है। मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि हर भारतीय इक्विटी निवेशक को अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का कुछ हिस्‍सा विदेशी इक्विटी में निवेश करना चाहिए। निवेश का तर्क अपने आप में बेजोड़ है। घरेलू फंड में निवेश से टैक्‍स के मोर्चे पर मिलने वाला फायदा कुछ खास नहीं है और एक्‍सचेंज रेट अतिरिक्‍त सुरक्षा मुहैया कराता है। हालांकि घरेलू फंड की तरह ही निवेश से जुड़ी बुनियादी बातों को नजरअंदात नहीं किया जा सकता है। वास्‍तव मे कुछ भारतीय निवेशक जिस भारत की कंपनियों और निवेश के माहौल पर करीब से नजर रखते हैं उसी तरह वे वैश्विक कंपनियों पर रोज नजर रखते हैं। ऐसे में आप किस फंड में निवेश करते हैं यह बात काफी अहम हो जाती है।

अगर आप को किस किसी तरह का संदेह है जानकारी का अभाव है तो कम जोखिम वाला विकल्‍प चुनने से शुरूआत कर सकते हैं। आपको एक सरल और डायवर्सीफाइड इक्विटी फंड चुनना चाहिए। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि आपको निवेश के लिए एसआईपी का इस्‍तेमाल करना चाहिए।

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