
क्या रीबैलेंसिंग करते हुए इमरजेंसी फंड की रकम को असेट अलॉकेशन में शामिल करना चाहिए ? या इसे अलग रखना चाहिए ?
- डॉक्टर विजय प्रताप नेगी
मेरा सुझाव है कि आपको पोर्टफोलियो के किसी खास असेट अलॉकेशन पर फोकस नही करना चाहिए। यह आपकी जरूरतों के हिसाब से निवेश का नतीजा होना चाहिए। उदाहरण के लिए आपात जरूरतों के लिए रकम बैंक अकाउंट या लिक्विड फंड में रख सकते हैं। वहीं तीन से पांच साल की अवधि में आने वाली जरूरतों के लिए आप उच्च गुणवत्ता के फिक्स्ड इनकम विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। इसी तरह से आठ साल से अधिक अवधि वाले गोल या जरूरत के लिए आप का पोर्टफोलियो इक्विटी वाला होना चाहिए।
जब आप इन अलग अलग जरूरतों के लिए निवेश अवधि के हिसाब से रकम का अलॉकेशन शुरू करेंगे तो आप असेट अलॉकेशन अपने आप संतुलित हो जाएगा। और इसी तरह से अपने निवेश को रीबैलेंस करते हुए हर निवेश जरूरत पर अलग से फोकस करने की जरूरत है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक जरूरतों के लिए असेट अलॉकेशन में ज्यादा बदलाव न हो। रीबैलेंस करते हुए इस बात का ध्यान रखें कि कि आपको समूचा असेट अलॉकेशन स्वाभाविक नतीजा होना चाहि
जब इन स्टॉक्स पर आपका भरोसा मजबूत हो जाए तो सेक्टर अलॉकेशन बाद में किया जा सकता है। अपना पोर्टफोलियो बनाते हुए प्रत्येक स्टॉक के लिए तय करते समय आप सेक्टर को ध्यान में रख सकते हैं। इन स्टॉक्स के लिए रकम तय करना इसलिए अहम है क्योंकि इससे आपके पोर्टफोलियो में किसी एक सेक्टर का बड़ा हिस्सा नहीं होगा। इस तरीके से आप अपना स्टॉक पोर्टफोलियो बना सकते हैं और अगर आप इन सब चीजों को बहुत ज्यादा जटिल पाते हैं म्युचुअल फंड हमेशा एक बेहतर विकल्प है।
ये लेख पहली बार अगस्त 18, 2021 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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