
बिटक्वाइन और दूसरी क्रिप्टोकरंसी केवल दो ही काम के लिए इस्तेमाल होती हैं। पहला है, सट्टेबाज़ी और दूसरा है, क्राइम। ये दोनों ही हर लिहाज़ से बेकार की चीज़ हैं। इसलिए, क्रिप्टोकरंसी पर पूरी तरह से रोक लगनी ही चाहिए। इसके अलावा जो भी शोरगुल आप सुन रहे हैं, ये वो लोग कर रहे हैं, जो या तो दूसरों के नुकसान पर पैसा बना रहे हैं, या इसलिए, क्योंकि उन्हें लगता है ये जश्न सदा ऐसे ही चलता रहेगा।
जब आप बिटक्वाइन ख़रीदते या बेचते हैं, तो आपको क्या लगता है, इसमें दूसरी पार्टी कौन है? वो या तो आपकी तरह का कोई दूसरा पंटर होता है, या अगर कोई सच में इसका इस्तेमाल करने वाला है, तो ये उसके पास जा रही है जिसे क्रिप्टो में पैसे अदा करने हैं या पाने हैं, किसी रैनसमवेयर या नारकोटिक्स या आतंकी फ़ंडिंग या ऐसे ही किसी और लेन-देन के लिए। इस तथाकथित करंसी का असल में और दूसरा कोई इस्तेमाल है ही नहीं।
अगर आप 2008 का न्यूज़पेपर पढ़ें जिसमें सातोशी नाकामोटो नाम के किसी इंसान, या किसी चीज़ ने इस सिस्टम के आधार और डिज़ाइन के बारे में बताया था, तो आपकी समझ में आयेगा कि इस डिजिटल कैश सिस्टम के डिज़ाइन का गोल सिर्फ़ यही था-कैश जैसी एक डजिटली ट्रांसफ़र की जाने वाली करंसी, जिसमें वैसी ही गोपनीयता और प्राइवेसी हो जो कैश में होती है। मुझे मानना पड़ेगा कि इस गोल को हासिल करने में बिटक्वाइन ने अच्छी सफलता हासिल की है। आज जिस रैनसमवेयर की दुनिया भर में क्राइम-वेव नज़र आ रही है, ये इस बात को साबित करता है। जो ग्लोबल डिजिटल क्राइम गैंग उभर रहे हैं, उनके लिए क्रिप्टो एक बहुत बड़ा बोनांज़ा है।
बिटक्वाइन से चलने वाली ग्लोबल क्राइम वेव में किसी को अचरज नहीं होना चाहिए। आख़िर, क्राइम में बड़े पैमाने पर कैश की ज़रूरत होती है, और अगर आपने कैश को डिजिटल बना लिया है, तो इससे बिल्कुल नई तरह के क्राइम संभव हो जाते हैं, और वो भी ग्लोबल स्केल पर, क्योंकि अब आप कैश को इंटरनेट के ज़रिए दुनियाभर में भेज सकते हैं।
मंगलवार, नवंबर 23, जब लोक सभा सचिवालय ने शीत-सत्र के एजेंडे की सूची जारी की, तो क्रिप्टो की दुनिया में तूफ़ान खड़ा हो गया। कई करंसियों के दाम बुरी तरह गिरने से, करोड़ों और अरबों ग़ायब हो जाने की भयानक ख़बरों के स्क्रीन-शॉट शेयर किए जाने लगे। अगर ट्विटर पर बहुत से लोगों की मानें, तो कई पॉपुलर 'क्रिप्टो एक्सचेंज' ठप्प पड़ गए, जिससे क्रिप्टो ख़रीदने-बेचने वालों में पैनिक फैला, और अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया।
सरकार ने जो कहा उस पर किसी को भी अचरज नहीं करना चाहिए। सरकार का इरादा "क्रिप्टोकरंसी को बैन करने वाले बिल को लाने का है, और वो भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक डिजिटल करंसी का फ़्रेमवर्क तैयार करने जा रही है”। ये बात काफ़ी वक़्त पहले साफ़ चुकी है, कि इन तथाकथित करंसियों का बुरा असर काफ़ी गंभीरता से लिया जा रहा है और ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। ये बात एक ऐसे माध्यम की है, जिससे फ़ंड को ख़ासतौर पर बिना ट्रेस, और पहचान छिपाने के लिए ही डिज़ाइन किया गया है, और (ये बात महत्वपूर्ण है) दुनिया भर में फैल रहे रैनसेमवेयर की वेव में इसने बड़ा रोल अदा किया है। अब इसे लेकर आप सरकार से और क्या उम्मीद कर सकते हैं, कि वो क्या करे? क्या इसे 'फ़ाइनेंशियल इनोवेशन' के नाम पर चलते रहने दे।
मुझे तो क्रिप्टो के सनकी लोगों की सोच-समझ के तरीक़े में बहुत बड़ी कमी लगती है। अगर आप उनसे पूछें कि क्रिप्टो में अच्छा क्या है, तो सबसे अहम कारण ये गिनाया जाता है, कि इसपर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है। इसके पक्ष में बाक़ी कारण भी इसी तर्क से उपजे हैं। तो सरकार इसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं करेगी इस सोच का क्या आधार हो सकता है? क्या कोई भी सरकार क्यों जानबूझकर एक वैकल्पिक करंसी की इजाज़त देगी, जिसे वो कंट्रोल ही नहीं कर सकती हो? जिसकी होने से अर्थव्यवस्था में मुद्रा का लेन-देन ही उसके हाथ से निकल जाए, और बिना रोक-टोक के क्राइम और टैक्स चोरी हो सके?
अब बात उसकी जो आगे होने वाला है। कुछ ही समय में, दुनिया के सभी बड़े देश भई इसी नतीजे पर पहुंचेंगे-क्रिप्टोकरंसियों को पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी घोषित किया जाएगा, और कुछ आधिकारिक डिजिटल टोकन, जो असल करंसी के आधार पर होंगी, उन्हें प्रमोट किया जाएगा। अगर कोई ऐसा तरीक़ा तलाश लिया जाता है, जिससे क्रिप्टोकरंसियों का लेन-देन पारदर्शी रखा जा सके, और जिसे ट्रेस किया जा सके, तो उन्हें इजाज़त दी जाएगी। वर्ना जो चीन पहले ही कर चुका है, और जो भारत जल्दी ही करने वाला है, वही क्रिप्टो से निपटने के लिए दूसरी सरकारों का भी स्टैंडर्ड मॉडल बन जाएगा। हां, अगर क्रिप्टो का लेन-देन सीक्रेट ही न रहे, तो ये अपने आप ही ख़त्म हो जाएगी, क्योंकि उसके इस्तेमाल का असल कारण ही ख़त्म हो जाएगा।

