
'काफ़ी अजीब वक़्त चुना है मिड-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड्स के बारे में लिखने का', आप ज़रूर यही सोच रहे होंगे। इस समय, मिड-कैप और स्मॉल-कैप वाले स्टॉक और म्यूचुअल फ़ंड कई महीनों से लगातार नुक़सान झेल रहे हैं। जिन लोगों का इनमें निवेश है, उन्होंने इन दिनों के दौरान अपने निवेश की काफ़ी वैल्यू ग़ायब होते देखी है और इसके बावजूद - बावजूद इसके, वैल्यू रिसर्च ऐसे फ़ंड्स में निवेश की बात कर रहा है! निरी मूर्खता है।
वो भी तब, और ये एक बड़ा 'तब' है, जब कोई भी म्यूचुअल फ़ंड बेचने वाला या वेबसाइट आपको मिड-कैप या स्मॉल-कैप में निवेश के लिए नहीं कह रही। और यही वो वजह है जिसके कारण आम लोग ऐसे फ़ंड्स को नज़रअंदाज़ करेंगे, मगर फिर, स्मार्ट निवेशक उन्हें ग़ौर से देखेंगे। असल में, मिड-कैप म्यूचुअल फ़ंड्स के बारे में बात करने का यही सबसे अच्छा वक़्त है। जैसा हमने अगस्त 2022 के 'Mutual Fund Insight' अंक की कवर स्टोरी में बात की है, कि अगर आप लंबे समय के निवेश को ध्यान में रखते हैं, तो पाएंगे कि इक्विटी के फ़ायदे पाने के लिए आपको बिना सोचे-समझे फ़ैसले करने की आदत छोड़नी होगी और निवेश के विषय पर बिना भावुक हुए विचार करना होगा।
पहली तारीफ़ की बात है कि इक्विटी निवेश में ऐसा कुछ नहीं है, और बिल्कुल भी नहीं है, जो आपको उतना मुनाफ़ा दे, जितना कुछ ही साल में लार्ज-कैप बन जाने वाली ये मिड-कैप कंपनियां दे सकती हैं। ये बात उनके लिए है, जो सीधे स्टॉक ख़रीदने वाले इक्विटी निवेशक हैं, मगर म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों की स्थिति तो और बेहतर है। उन्हें मिड-कैप इक्विटी निवेश में फ़ायदे ज़्यादा मिलते हैं, मगर बहुत कम मेहनत और कहीं कम परेशानियों के, और वो भी कम रिस्क और लगातार बदलती परिस्थितियों के बिना।
मिड-कैप के तनाव से सामना करने का तरीक़ा इस बात को समझने में है कि ये फ़ंड उतार-चढ़ाव को कम तो कर सकते हैं; पर ख़त्म नहीं। जो उतार-चढ़ाव मिड-कैप निवेश में होते हैं, वो लंबे-समय में होने वाले ऊंचे रिटर्न का दूसरा पहलू ही तो हैं। जैसे हर निवेश में रिस्क और रिवॉर्ड जुड़वां की तरह होते हैं, और पहला दूसरे के बिना नहीं होता, मगर फिर भी हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए ये सब एक समस्या है। हमने न जाने कितनी बार देखा है, कि जब मिड-कैप में गिरावट आती है, तो वो बहुत गिरते हैं, और तेज़ी से गिरते हैं। इसके कई कारण हैं, मिसाल के तौर पर, ऐसे स्टॉक में अपेक्षाकृत कम लिक्विडिटी होती है। इसका नतीजा होता है कि जब बुरा वक़्त आता है, तो मिड-कैप निवेशक अपने निवेश में बड़ी गिरावट देखता है।
मुश्किल ये है कि जब मिड-कैप गिरते हैं, तो कई निवेशकों को लगता है कि इस समस्या का कोई हल होगा, मगर उन्हें इसके बारे में नहीं पता है। शायद, उन्होंने ग़लत फ़ंड्स चुन लिए हैं। या उन्हें लगता है कि कोई ऐसा संकेत था कि उन्हें मिड-कैप फ़ंड में अपने निवेश को बेच देना चाहिए था और उन्होंने उस मौक़े को गंवा दिया है। या शायद अब उन्हें बेच कर इससे बाहर हो ही जाना चाहिए। शायद उन्हें अपना सिस्टमैटिक प्लान (SIP) रोक देना चाहिए। उन्हें किसी ने नहीं बताया कि उन्हें क्या करना चाहिए!
ये सभी काम, ख़ुद को बर्बाद करने वाले हैं। ये सब उस विश्वास में गड़े हैं कि मिड-कैप फ़ंड, लार्ज-कैप की तरह होते हैं सिवा एक फ़र्क़ के, कि उनमें ऊंचा रिटर्न मिलता है। पर ये सच नहीं है। उतार-चढ़ाव इस कहानी का हिस्सा हैं - सिवा अपनी SIP को जारी रखने और उन निवेशों को तब तक होल्ड करने के जब तक मंदी का चक्र उछाल पर वापस नहीं आता, आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं। ये निवेश का नहीं, बल्कि निवेशक के मनोविज्ञान का मामला है, उन फ़ंड्स में विश्वास रखने की बात है जिनमें आपने निवेश किया है और मिड-कैप निवेश के कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह से समझने की बात है।
ऐसा लग सकता है कि ये एक मूल गुण है, मगर है नहीं। हर निवेशक अपने निवेश के सफ़र की शुरुआत में इसी संशय और भ्रम की इस स्थिति में होता है। हर बार जब नेट एसेट वैल्यू (NAVs) गिरती है, नए मिड-कैप निवेशक घबरा जाते हैं। अंततोगत्वा जो बात फ़र्क़ लाती है, वो अनुभव और ज्ञान है। और ये वक़्त के साथ आते हैं, और वैल्यू रिसर्च में हमारा यही काम है। अगस्त 2022 के 'Mutual Fund Insight' की कवर स्टोरी अंक, मिड-कैप और स्मॉल-कैप के हर पहलू की बात करेगा, और साथ ही चुने हुए फ़ंड्स का सेट आपको इन फ़ंड्स के चुनाव की प्रक्रिया का एक अच्छा सैंपल देगा। मिड-कैप इन्वेस्टिंग को सिस्टमैटिक तरीक़े से देखने के बाद आप अपने निवेश के रास्त पर आगे बढ़ते रहेंगे और जिस ऊंचे रिटर्न के लिए मिड-कैप फ़ंड जाने जाते हैं उनका फ़ायदा पा सकेंगे।
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ये एडिटोरियल अगस्त 2022 के म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट के अंक में छपा था। इस कवर स्टोरी को पढ़ने के लिए और इसके जानकारी से भरे अनालेसिस, कॉलम और आर्टिकल पाने के लिए (BUTTON)






