
Debt Funds: सरकार ने टैक्स से जुड़े नियमों (taxation rules) में बदलाव करते हुए डेट फंड्स को तगड़ा झटका दिया है. नए नियम से टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा और टैक्स के बाद रिटर्न ख़ासा घट जाएगा. क्या बदलाव हुआ? अभी तक, अगर आप तीन साल के भीतर डेट फंड बेचते थे तो फ़ायदे को आपकी आमदनी में जोड़ दिया जाता था, और आपके स्लैब के आधार पर टैक्स लगता था. तीन साल से ज़्यादा वक़्त तक निवेश पर इंडेक्सेशन का फ़ायदा देने के बाद 20 फ़ीसदी टैक्स लिया जाता था. लेकिन नए बदलाव के बाद, इक्विटी में 35 फ़ीसदी से कम एक्सपोज़र वाले म्यूचुअल फंड्स (प्रभावी रूप से डेट फंड्स, गोल्ड फंड्स और इंटरनेशनल फंड्स) से मिले फ़ायदे पर अब इंडेक्सेशन की सुविधा नहीं मिलेगी. इसके बजाय, फ़ायदे को उस साल की आय में जोड़ दिया जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स लगेगा. जहां तक हमारे 'Best Buy' कवरेज की बात है, तो इसका असर शॉर्ट ड्यूरेशन, इंटरनेशनल इक्विटी, लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स पर होगा. इसका पूरा असर आप हमारी नीचे दी गई टेबल से समझ सकते हैं. कितना ज़्यादा है इसका असर? काफ़ी ज़्यादा. मान लीजिए कि आपके एक शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में तीन साल पहले किए गए 5 लाख रुपये के निवेश पर आपको 7.5 फ़ीसदी का कैपिटल गेन हुआ. टैक्स के बाद रिटर्न का नीचे दिया गया हैः जैसा कि देखा जा सकता है कि मौज
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