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धीरेंद्र कुमार: आपका स्वागत है. इस बातचीत में हम आपके सवालों का जवाब देंगे. प्रीमियम सब्सक्राइबर हमें सवाल भेजते रहें और हम उन सभी सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे जिनमें ज़्यादा लोगों की दिलचस्पी है. बेशक़, हमारे पास ऐसे कई सवाल आते है और इनमें से कुछ आपके अपने पोर्टफ़ोलियो से जुड़े हैं. हम इन पर बात नहीं करना चाहेंगे. हक़ीक़त में, हमारी सर्विस में हरेक को अलग सलाह देने का प्रोविज़न नहीं है. हम वन-ऑन-वन एडवाइज़र नहीं हैं. लेकिन हमने सब कुछ इस तरह से तैयार किया है कि आप बिना किसी सलाह के आत्मविश्वास के साथ काम कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको हमारी सर्विस की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि हम कैसे काम करते हैं? इसके पीछे की हमारी सोच क्या है? हमारी सलाह का फ़्रेमवर्क है? सर्विस को ज़्यादा बेहतर तरीके़ से कैसे इस्तेमाल करें? और इसे ध्यान में रखते हुए, हम समय-समय पर इस तरह के सेशन करते रहेंगे और आपके सवालों का जवाब देंगे. इसलिए, हमें ऐसे सभी सवाल भेजें जो आपके मुताबिक़ सर्विस के बेहतर इस्तेमाल में आपको मदद कर सकते हैं. अगर आप किसी ख़ास विषय के बारे में जानना चाहते हैं कि हम उस काम को कैसे कर रहे हैं? इसका आधार क्या है? हम आपको सब कुछ बहुत विस्तार से समझाएंगे क्योंकि हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें अपने 30 साल के अनुभव के आधार पर पूरी सावधानी बरतते हैं. मेरी टीम में शामिल लोग सर्विस के अलग-अलग पहलुओं पर काम करते हैं. ये वो लोग हैं जो एनेलिस्ट की पसंद सेक्शन के तहत निवेश का सुझाव देते हैं, या पोर्टफ़ोलियो प्लानर तैयार करते हैं. आशुतोष शुरू से ही सर्विस के बुनियादी स्ट्रक्चर तैयार करने के काम से जुड़े हुए हैं. दरअसल, हमारे जैसी कोई दूसरी सर्विस मौजूद नहीं है. हमने इस सर्विस को एक ऐसे समय पर शुरू किया, जहां इसे उसी वक़्त पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका था. दरअसल, ऐसा लॉकडाउन की शुरुआत में हुआ था. हम इस सर्विस पर काम ही कर रहे थे कि लॉकडाउन लग गया. और फिर हमने इसे जल्दी में लॉन्च कर दिया और लोगों को ये समझाने के लिए ख़ास तैयारी नहीं कर पाए कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं. तो जब, हम और आप में से बहुत से लोग, इस सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं, तब आपके सभी सवालों का जवाब देने का इससे अच्छा मौक़ा और क्या होगा. तो अब मैं सवालों के जवाब देने का काम शुरू करता हूं. ये सवाल अमित का है. उन्होंने पूछा है कि हम कौन से पैरामीटर्स पर म्यूचुअल फ़ंड्स का आकलन करते हैं? हम म्यूचुअल फ़ंड्स का मूल्यांकन कैसे करते हैं? हक़ीक़त में, मैं इनमें से ज़्यादातर सवाल का जवाब दे सकता हूं. लेकिन मैं इन सवालों को उन ख़ास लोगों के सामने ही रखूंगा जो ये काम कर रहे हैं या इसे संभालते हैं या हर वक़्त इसके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा सोचते हैं. तो इस सवाल का जवाब आशुतोष देंगे, क्योंकि वो इस सर्विस को तैयार करने में मेरे साथ जुड़े रहे हैं. आशुतोष गुप्ता: ज़रूर. शुक्रिया, धीरेंद्र. तो, आइडिया ये है कि हम चुनने से पहले ही बहुत से फ़ंड्स को रिजेक्ट कर देते हैं. इसका मतलब है कि ये सर्विस बेहतरीन फ़ंड्स की एक व्यवस्थित लिस्ट तैयार करने से पहले फ़ंड्स को रिजेक्ट करने से जुड़ी है. और पहला क़दम हमेशा आंकड़ों से जुड़ा होता है. दरअसल, हमने अपने अब तक के सफ़र में यही देखा है कि आंकड़े ही एक फ़ंड के प्रदर्शन और उपलब्धियों को बिलकुल साफ़ तौर पर दिखाते हैं. और ज़्यादातर रिजेक्शन इसी स्टेज पर हो जाते हैं. इसके आगे, क्वालिटी पर ज़ोर होता है जहां इन फ़ंड्स के पीछे जो लोग हैं उन्हें जानने पर ध्यान दिया जाता है. और हम अक्सर अपनी रेकमेंडेशन में बदलाव करना पसंद नहीं करते. और ऐसा तभी होता है जब हम इन लोगों के बारे में अच्छी तरह जान लेते हैं, क्योंकि मुश्किल दौर तो आते ही हैं लेकिन फ़ंड के पीछे जो लोग हैं उन्हें जानने से आपको मुश्किल दौर में साथ बने रहने में मदद मिलती है. इसलिए हम फ़ंड मैनेजरों से बात करते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि वो क्या सोचते हैं. उनकी सीमाएं क्या हैं? ऐसा क्या है जो वो कभी नहीं करेंगे? और ये ऐसे सवाल हैं जिनसे कुछ मज़बूत जवाब मिलते हैं. तो मोटे तौर पर इन्हीं सब से मिलकर आंकड़े तैयार होते हैं. लेकिन फिर इक्विटी और डेट फ़ंड के लिए चीज़ें बहुत अलग हैं, और पहले इक्विटी के बारे में बात करते हुए, एक अहम सवाल ये उठता है. जिसका जवाब हम देने की कोशिश करते हैं, क्या हमारी लिस्ट में सबसे अच्छे मूल्यों वाले, और ग्रोथ देने वाले फ़ंड मैनेजर हैं? वास्तव में, हम बहुत ज़्यादा आंकड़े देखते हैं. सबसे ज़रूरी चीज़ों में से एक स्टाइल का लगातार क़ायम रहना है. तो क्या अलग-अलग मार्केट साइकल्स में, फ़ंड मैनेजर के स्टाइल में ज़रूरत के हिसाब से निरंतरता रही है? इससे, वास्तव में हमें पता चलता है कि हम क्या कर रहे हैं. फिर, ज़ाहिर है कि परफ़ॉर्मेंस मायने रखती है. इसलिए हम परफ़ॉर्मेंस के एक अच्छे लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड की तलाश कर रहे हैं, भले ही वो धीरे-धीरे कमज़ोर परफ़ॉर्मेंस के साथ आता है. और मुझे लगता है कि किसी भी फ़ंड को ऐसे दौर से गुज़रना पड़ता है. फिर, हमारे लिए ये आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण हैं. बेशक, हम नहीं जानते कि आने वाले समय में क्या होगा, लेकिन तमाम अच्छे मौकों पर बने परफ़ॉर्मेंस के रिकॉर्ड कुछ समय से सही हो रहे हैं या आंकड़े, जो केवल एक या दो साल के ब्लॉकबस्टर रिटर्न पर तैयार हुए हैं, हम संदेह करते हैं, और हम आलोचक भी हैं क्योंकि हमें उनके भविष्य में अच्छे प्रदर्शन के दोहराने की संभावनाओं पर यकीन नहीं होता. और फिर एक और पहलू जिसे हम बहुत बारीकी से देखते हैं वो है फ़ंड मैनेजमेंट टीम में स्थायित्व. ताकि, हम इन आंकड़ों का क्रेडिट इस समय अगुआई करने वाले लोगों को दे सकें. इसके अलावा, कॉस्ट जैसे कुछ और फ़ैक्टर भी हैं. उदाहरण के लिए, बेशक ये फ़ैक्टर डेट पर ज़्यादा लागू होते हैं लेकिन हम इक्विटी पर भी नजर रखते हैं. और फिर कई टाले जा सकने वाले जोख़िम भी हैं, जैसे- प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों में बहुत ज़्यादा निवेश या ओपन-एंडेड फ़ंड्स का क्लोज-एंडेड फ़ंड्स में बहुत ज़्यादा निवेश करना. इन बातों को हम संदेह की नज़र से देखते हैं. और अब मैं कुछ समय डेट पहलू के बारे में बात करने में लगाऊंगा, जहां साफ़ तौर पर, संतुलन का जोख़िम होता है. दरअसल, फ़िक्स्ड इनकम वाले निवेशक बहुत कम समय में भी निगेटिव रिटर्न पसंद नहीं करते हैं. और इसीलिए, इसमें कम से कम जोख़िम पर जोर दिया जाता है. और हमारा मानना है कि केवल दो फ़ंड्स के साथ एक शानदार फ़िक्स्ड इनकम पोर्टफ़ोलियो बनाया जा सकता है. इसलिए हम चीजों को सरल रखने के लिए, लिस्ट को छोटा करते हैं. और ऐसा फ़िक्स्ड-इनकम से संबंधित हमारे रेकमेंडेड फंड्स की लिस्ट में दिखता है. और जहां तक आंकड़ों का सवाल है, तो हम जिस अहम सवाल का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं, वो ये है कि एक फ़िक्स्ड इनकम वाले निवेशक को असल में क्या चाहिए? ये लोग अभी भी फ़िक्स्ड डिपॉजिट में फंसे हुए हैं. और वो उतना रिटर्न खोज रहे हैं, जो उससे थोड़ा बेहतर है और उसके लिए उन्हें कोई जोख़िम भी ना लेना पड़े. इसलिए हम पिछले तीन-चार साल से ऐसे फ़ंड्स की तलाश कर रहे हैं, जो क्रेडिट क्वालिटी या ब्याज दरों पर कोई बहुत बड़ा दांव नहीं लगाते हैं और जिनका किसी भी बड़े हादसे के बिना मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी वाले इशुअ
ये लेख पहली बार जून 15, 2023 को पब्लिश हुआ.
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