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ख़ुदमुख़्तार होने की क़ीमत

हमारे देश के बुद्धिजीवियों के मन में भारतीय उद्योग को लेकर इतनी हिकारत क्यों है?

हमारे देश के बुद्धिजीवियों के मन में भारतीय उद्योग को लेकर इतनी हिकारत क्यों है?

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सभी देश जो पिछले कुछ दशकों में मैन्युफ़ैक्चरिंग पावर बने हैं उन्होंने फ़्री ट्रेड और फ़्री मार्केट के आइडिया को एक स्कैम की नज़र से देखा है. जापान, साउथ कोरिया, ताइवान और दूसरे एशियन टाइगर कहलाने वाले देशों ने, और चीन ने भी, इस महान सिद्धांत पर सिर्फ़ बातें की हैं और अपनी घरेलू इंडस्ट्री को आक्रामक तरीक़े से सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया है. उन्होंने विदेशी कंपनियों की तकनीकों को अपनाया और फिर अपने देश में उनका जीना दूभर कर दिया. ये दुनिया के आर्थिक इतिहास के सर्व-स्वीकार्य तथ्य हैं और इन पर कोई दो राय या विवाद नहीं है.

मगर फिर भी, किसी रहस्यमयी वजह से, भारत के प्रबुद्ध वर्ग को इस सच्चाई का कोई भान नहीं है. कुछ दिन पहले सरकार ने लैपटॉप और कुछ दूसरे तरह के कंप्यूटरों के इंपोर्ट पर पाबंदी की घोषणा की. ये सुनते ही, आलोचकों के एक समूह ने तुरंत एक आवाज़ में फ़्री ट्रेड के सिद्धांतों का भजन शुरू कर दिया और बताने लगे कि अगर भारत घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए आगे बढ़ता है, तो कैसे देश अपने भविष्य को अथाह नुक़सान पहुंचा देगा.

इसी दौरान, असल दुनिया में, स्थितियां कुछ अलग हैं. वायरस का बुरा असर झेलने, यूरोप का युद्ध और चीन की आक्रामकता देखने के बाद, पश्चिमी देश अपना औद्योगिक आधार दोबारा बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. क्या उनका मीडिया/ आर्थिक क्षेत्र के प्रबुद्ध लोग और सरकारें फ़्री ट्रेड को लेकर चिंतित हैं? नहीं, ऐसा नहीं है क्योंकि उन देशों में ये साफ़ तौर पर समझा जा रहा है कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं.

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वहीं, जब भारत में जब लैपटॉप इंपोर्ट का रोना रोया जा रहा था, जर्मन सरकार ने इंटेल और TSMC के दो सेमीकंडक्टर फ़ैब स्थापित करने की घोषणा की. सरकार ने कहा कि वो इन सेमीकंडक्टर फ़ैब को 5 बिलियन यूरो की सब्सिडी देगी. यूरोप में ऐसा कई दशकों में पहली बार हुआ है. ये फ़ैब बॉश (Bosch), इनफ़िनियॉन (Infineon) और NXP के साथ पार्टनरशिप में होंगे. इनमें से पहली दो जर्मन कंपनियां हैं. नोट करें कि ये कटिंग-एज फ़ैब नहीं हैं जो सबसे छोटे, सबसे एडवांस प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं. इसके बजाए, ये पुरानी तकनीकें हैं जो अब भी काफ़ी ज़्यादा इस्तेमाल में हैं. जर्मनी में हर प्रबुद्ध व्यक्ति इस क़दम की तारीफ़ कर रहा है. क्या यहां जो होता है उसमें, और वहां जो हो रहा है उसमें, आपको विरोधाभास नज़र आ रहा है?

पिछले साल, बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने 'अमेरिका के लिए चिप्स' क़ानून पारित किया, जिसने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री फिर से शुरू करने के लिए कई दूसरे उपायों के साथ-साथ 53 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सब्सिडी के लिए अधिकृत किया, जिसे अमेरिका ने पिछले कुछ दशकों में चीन, कोरिया और ताइवान के हाथों गंवा दिया है. फिर से, ये बात साफ़ है कि शुरुआत में सबसे आधुनिक तकनीक अमेरिका नहीं आएगी, लेकिन ये उन 450 कंपनियों के लिए सही है, जो इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने की कोशिश कर रही हैं. ये कम-से-कम एक शुरुआत है.

मुझे नहीं पता कि कितने लोग जानते हैं कि 1950 के दशक में डेट्रॉइट में जापानी कारों को मज़ाक में 'चार-पहिए वाली मोपेड' कहा जाता था. अमेरिकी सोचते थे कि GM, क्रिसलर और फ़ोर्ड असली कारें बनाते हैं, जबकि टोयोटा और डैटसन हास्यास्पद क़िस्म की छोटी-छोटी चीजें बना रही हैं जिनका कभी कोई महत्व नहीं होगा. कैमरों को लेकर भी यही बात रही - लीका और रोलेई असली चीज़ थे, जबकि निकॉन और कैनन सस्ता चाहने वालों के लिए थे. हज़ारों दूसरे उत्पादों पर भी यही बात लागू होती है. मगर सच तो ये है कि आप कहीं-न-कहीं से शुरुआत तो करते ही हैं.

जब ये देश सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो क्या उन्हें 'स्क्रूड्राइवर तकनीक' के लिए घरेलू स्तर पर बहुत ज़्यादा आलोचना का सामना करना पड़ा? पिछले 30 साल में, क्या चीनियों ने केवल असेंबली और नकल से शुरुआत करने के लिए अपने ख़ुद के उद्योग का मज़ाक उड़ाया? खैर, हम उन पर हंसते थे. जो लोग दिल्ली के पालिका बाज़ार या मुंबई के हीरा पन्ना जैसी जगहों पर खरीदारी करने जाते थे, वो पहले ताइवानी सामान, फिर कोरियाई सामान और फिर चीनी सामान पर उसी तरह हंसते थे, जैसे अमेरिकी और जर्मन उन पर हंसते थे. और अब, अब कौन हंस रहा है?

भारतीय बुद्धिजीवियों में से बहुत से लोग भारतीय मैन्युफ़ैक्चरिंग के लिए 'स्क्रूड्राइवर तकनीक' जैसे शब्द का इस्तेमाल क्यों करते हैं? मैं समझता हूं कि ये लोग असल में जो करते हैं उसे दूसरों पर थोप रहे हैं. वो स्वयं केवल 'स्क्रूड्राइवर राय' देने में सक्षम हैं, यानी, नकली विचारों को एक साथ जोड़कर इकट्ठा की गई राय, जिसे वो बिना सोचे-समझे इधर-उधर से उठाते हैं. इनमें से किसी ने भी वास्तव में गर्म हवा के अलावा अपने जीवन में कुछ भी नहीं बनाया है - उन्हें पता ही नहीं है कि वास्तव में कुछ करने के लिए, व्यवसाय खड़ा करने के लिए, आपस में एक दूसरे की पीठ थपथपाने और अपने मालिकों से चांदी के कुछ टुकड़ों के अलावा और कुछ हासिल करने के लिए क्या करना पड़ता है.

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