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क्या है आपके निवेश की कहानी?

पीटर लिंच का सूत्र: आपकी इन्वेस्टमेंट लॉगबुक बताएगी कि आप अपना इन्वेस्टमेंट कैसे मैनेज करें.

क्या है आपके निवेश की कहानी?Anand Kumar

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पिछले कुछ हफ़्तों में, मैंने निवेश पर लिखने वाले अपने पसंदीदा लेखक, पीटर लिंच को एक बार फिर पढ़ा. पहली बार लिंच को मैंने 1990 में अपना कॉलेज ख़त्म करने के ठीक बाद पढ़ा था. 2023 के मुक़ाबले, तब का दौर काफ़ी सुस्त हुआ करता था और पीटर लिंच की क़िताब 'वन अप ऑन वॉल स्ट्रीट' (One Up on Wall Street) पाना मेरे लिए बड़ी ख़ुशी की बात थी. और हो भी क्यों न, इंटरनेट के पहले के उस ज़माने में जानकारियों का बहाव काफ़ी धीमा और मुश्किल था, और ये शानदार क़िताब तो सिर्फ़ एक साल पहले ही छपी थी. जब ये क़िताब मेरे हाथ लगी तब ख़ासतौर पर भारत में इसके बारे में कम ही लोग जानते थे. असल में, उसी दौर में क्यों, अब भी इसे कम ही निवेशकों ने पढ़ा है हालांकि बहुत से लोगों ने इसके बारे में सुना ज़रूर होगा. एक निवेशक के तौर पर, लिंच की क़िताब मेरे लिए एक प्राइमरी एजुकेशन जैसी थी.

आज भी, तीन दशक से ज़्यादा बीतने के बाद, जब भी मैं लिंच को पढ़ता हूं तो इसमें कुछ-न-कुछ नया और काम का पाता हूं. हाल ही में, 1997 में वर्थ मैगज़ीन में लिखा उनका लेख पढ़ा, जिसमें इस टिप पर मेरा ध्यान गया: हर एक स्टॉक जो आपके पास है, उसकी कहानी को एक लॉगबुक में लिखते रहें. कोई भी नया बदलाव नोट करें और कमाई पर बारीक़ी से ध्यान दें. क्या ये एक ग्रोथ की कहानी है, एक सायकल है, या इसमें वैल्यू की कहानी नज़र आ रही है? स्टॉक किसी ख़ास वजह से अच्छा प्रदर्शन करते हैं और ख़राब प्रदर्शन के भी कारण होते हैं. आप तय कर लीजिए कि आपको ये कारण पता हों.

जो लोग पीटर लिंच को नहीं जानते, उन्हें ये दिलचस्प लगेगा कि लिंच भले ही फ़ंड मैनेजर के तौर पर अपने ज़बरदस्त ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से प्रसिद्ध हुए हों, पर उनका सारा लेखन स्टॉक इन्वेस्टिंग के बारे में है. 1977 से 1990 तक, पीटर लिंच, जब अमेरिका में फ़िडेलिटी मैगेलिन फ़ंड को मैनेज कर रहे थे, तब उन्होंने 29.4% के सालाना रिटर्न दिए, और ये फ़ंड दुनिया का बेस्ट परफ़ॉरमेंस वाला फ़ंड बन गया. इस परफ़ॉरमेंस ने लिंच को निवेश की दुनिया का लेजेंड बना दिया. पर जिस चीज़ ने असल में वैल्थ पाने के रोल पर उनके नाम को एक ख़ास मुकाम पर पहुंचा दिया, वो इक्वटी इन्वेस्टिंग पर लिखी उनकी क़िताबें और लेख थे.

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आइए वापस उनकी उस टिप की बात करते हैं, जिसमें वो अपने निवेश का ब्यौरा या लॉग रखने की बात करते हैं, क्योंकि चाहे वो स्टॉक की बात करते हों, लेकिन उनकी बातें सभी तरह के निवेशों पर लागू होती है. नोट करें कि ये कोई अकाउंटिंग रिकॉर्ड रखने की बात नहीं है—जो आप अपने किसी भी निवेश के लिए डाउनलोड कर सकते हैं. ये बात है नैरेटिव की. यानी, आपके निवेश की कहानी की बात. निवेश का हर फ़ैसला, चाहे ख़रीदने का हो या बेचने का, वो आदर्श रूप में सोचे-समझे तर्कों के आधार पर किया जाता है. ये सिर्फ़ नंबरों की बात नहीं होती; ये बात होती है सब्जेक्टिव, क्वालिटेटिव जजमेंट की, जिसे एक निवेशक के तौर पर आप करते हैं. और इसी के लिए इन्वेस्टेंट लॉगबुक मेंटेन करने की ज़रूरत होती है. वो हर निवेश, जो आप करते हैं, अपनी लॉगबुक के एक हिस्से में उसे दर्ज कर देना, एक बाज़ी पलट देने वाली बात हो सकती है.

जैसा कि लिंच बताते हैं, हर स्टॉक की अपनी अनोखी कहानी होती है. हो सकता है वो ग्रोथ फ़ेज़ में जा रहा हो, सायकल के उतार-चढ़ाव का अनुभव कर रहा हो, या शायद अपनी इंट्रिंसिक वैल्यू से कम हो. इन विचारों को लिखने से, आप अपने निवेश का जीता-जागता इतिहास लिख रहे होंगे. ये आपको बताएगा कि आपने पहले-पहल इन निवेशों पर क्यों भरोसा किया था. जैसे-जैसे आप अपना पोर्टफ़ोलियो मॉनिटर करते रहेंगे, आप इसमें नए बदलाव दर्ज करते जाइए. वो सभी फ़ैक्टर लिखिए जिन्होंने उस निवेश को लेकर आपकी मूल सोच को प्रभावित किया था. अगर ये तर्क आप लिखते रहेंगे, तो होने वाले बदलावों को आप पहचानने भी लगेंगे.

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सभी निवेशों में किसी न किसी वजह से उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. तेज़ी और मंदी, उछाल और गिरावट, इन सभी के कुछ न कुछ कारण होते हैं. आपकी लॉगबुक, आपको उन कारणों की याद लगातार दिलाती रहती है, और आप समझ-बूझ के साथ फ़ैसले ले पाते हैं. ये सिर्फ़ परफ़ॉरमेंस को ट्रैक करने की बात नहीं है; ये हर बदलाव के पीछे छिपे 'क्यों' को समझने की बात है. तो, अपने निवेश की लॉगबुक को अपना साथी बनाएं, ताकि ये पक्का हो सके कि मार्केट के हर बदलाव पर, आप सिर्फ़ प्रतिक्रिया नहीं दे रहे, बल्कि कुछ करने का फ़ैसला कर रहे हैं (या कुछ नहीं करने का फ़ैसला कर रहे हों), और जो कुछ आप कर रहे हैं उसे लेकर आपके पास साफ़-साफ़ कारण हैं और उनके प्रति आप सजग हैं.

ऐसे लॉग से, निवेश के फ़ैसलों को लेकर भटकना और नतीजे न देने वाले निवेशों को नज़रअंदाज़ करना क़रीब-क़रीब असंभव हो जाएगा. हम बिज़नस और निवेश के एक मंत्र के बारे अक्सर सुनते हैं, 'आप जिसे माप नहीं सकते, उसे मैनेज नहीं कर सकते'. इसी में एक और बात जोड़ी जा सकती है: अगर रिकॉर्ड नहीं किया गया, तो उसे मैनेज नहीं किया जा सकेगा.

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